हमसे जुड़े

Follow us

11.1 C
Chandigarh
Tuesday, February 3, 2026
More
    Home विचार सम्पादकीय संकट में ’आप’...

    संकट में ’आप’

    Aam Aadmi Party, Crisis

    लोक सभा चुनाव 2014 से पहले आम आदमी पार्टी का उत्तरी भारत में जोर-शोर से प्रचार देखा गया, लेकिन चुनावी परिणामों में यह पार्टी पंजाब की चार लोक सभा सीटों तक सीमित रह गई। पंजाब विधान सभा चुनाव 2017 में भी पार्टी ने 100 सीटें जीतने का दावा किया किंतु पार्टी को 20 सीटें ही मिली। ताजा हालात पार्टी के अस्तित्व के लिए खतरा बने हुए हैं। पार्टी में अनुशासन की कमी के कारण बागी नेता सुखपाल खैहरा ने खुद को पार्टी का प्रधान घोषित कर दिया है।

    दरअसल पार्टी के टूटने की चर्चा तब ही शुरू हो गई थी जब हाईकमान ने दूसरी पार्टियों से निकाले गए या पार्टियां छोड़कर आए नेताओं को न केवल पार्टी में शामिल किया बल्कि चुनावी टिकट के अलावा पद भी सौंप दिए। आम आदमी पार्टी निकाले हुए नेताओं के लिए ‘डूबते को तिनके का सहारा’ बन गई थी। लोक सेवा व नियमों की धज्जियां उड़ाई गई। कई नेता केवल इसी कारण ही आप में शामिल हुए कि पार्टी पंजाब विधान सभा चुनाव में बहुमत से जीतेगी लेकिन बाजी कांग्रेस जीत गई तो अब वही नेता आप को छोड़ने के लिए कोई न कोई विवाद खड़ा कर रहे हैं ताकि हाईकमान उन्हें पार्टी से निकाले और वह किसी अन्य पार्टी में शामिल हो जाएं। एक नेता पंजाब का सत्तापक्ष पार्टी कांग्रेस में शामिल होने के लिए प्रयास कर रहा है।

    इस संकट में हाईकमान की लाचारी यहीं से समझ में आ जाती है कि एक नेता के पहले बगावत करने, फिर खुद को पार्टी प्रधान घोषित करने के बावजूद बगावत को घर का मामला बताया जा रहा है। एक तरफ अनुशासनहीन बयानबाजी करने पर पार्टी पद छीन लेती है दूसरी तरफ इतनी बेबसी है कि पार्टी का अनुशासन पूरी तरह से भंग करने पर भी हाईकमान चुप है। पार्टी का यह हश्र तय था क्योंकि अधिकतर नेता अन्य पार्टियों के वरिष्ठ नेता रह चुके थे।

    वैसे भी आम आदमी पार्टी एक लहर की पार्टी है जिसके पास ठोस विचारधारा व राजनैतिक संस्कृति की बड़ी कमी है। पंजाब की राजनीति का चरित्र दो पार्टियों से अलग रूप नहीं हो सका। पंजाबियों ने नई लहर को समर्थन तो दिया लेकिन मृग तृष्णा ही साबित हुआ। पांच साल पूरे करने से पहले ही किसी पार्टी का अस्तित्व संकट में आना बड़ी राजनीतिक घटना है। सबसे हैरानी वाली बात यह है कि आम आदमी पार्टी के लिए संंकट किसी विरोधी पार्टी ने खड़ा नहीं किया बल्कि उसकी अपनी राजनीतिक संस्कृति में उभरी कमियों का ही परिणाम है।

    Hindi News से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।