हमसे जुड़े

Follow us

28.2 C
Chandigarh
Saturday, February 28, 2026
More
    Home विचार सम्पादकीय अनाज की बहुता...

    अनाज की बहुतायत बनाम भुखमरी

    Abundance, Grain, Starvation, Poor, India

    ग्लोबल हंगर इंडेक्स ने भुखमरी के मसले पर भारत की स्थिति को अभी चिंताजनक बताया है। इस सूचि के अनुसार भारत भुखमरों में 100वें पायदान पर है, जबकि वर्ष 2000 में हालात ठीक थे, तब भारत 87वें पायदान पर था। 15 वर्ष पूर्व भारत में परिस्थितियां ठीक थी। यह मामला जिस तरह ऊपरी तौर पर गंभीर दिख रहा है, सरकार को इस दशा की बारीकी से छानबीन करनी चाहिए कि क्यों देश में भुखमरी बढ़ रही है। देश के अनाज भण्डार इतने ज्यादा भरे हुए हैं कि देश से अनाज संभाला नहीं जा रहा। पिछले वर्षों में प्रतिवर्ष हजारों टन अनाज बर्बाद हो रहा है। यहां तक कि गत वर्ष उच्चतम न्यायालय ने सरकार को निर्देश दिया था कि अनाज को सड़ने न दिया जाए, बल्कि गरीबों में बांट दिया जाए। अफसोस सरकार अदालत के निर्देशों की पालना नहीं कर पा रही।

    भारत में केन्द्र व राज्य सरकारों ने कुपोषण मिटाने के लिए सस्ता अनाज, सस्ती दाल व भोजन उपलब्ध कराने की योजनाएं चला रखी हैं। यह प्रशासनिक विफलता ही कही जाएगी कि देश में उक्त योजनाओं व अनाज की भरपूर उपलब्धता के बावजूद भी भुखमरी की डरावनी तस्वीर बनी हुई है। स्कूलों में संचालित मिड-डे-मील योजना एवं सस्ता राशन उपलब्ध करवाने वाली योजनाओं का यदि अक्षरश: पालन हो जाता है, तब देश तेजी से भुखमरी व्यक्त करने वाले आंकड़ों से अपना पिंड छुड़ा सकता है। लेकिन यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार द्वारा चलाई जा रही भोजन उपलब्धता योजनाओं, अनाज भण्डारण की योजनाओं में खामियां रह जाती हैं, जबकि यह सब पात्र लोगों के हिस्से आना चाहिए।

    आम नागरिकों में भी सरकार की पौष्टिक भोजन योजनाओं को लेकर गंभीरता अभी शत्-प्रतिशत नहीं बनी हैं। लाखों परिवार ऐसे हैं, जो सस्ता राशन पाने की योजनाओं, आंगनबाड़ी केन्द्र में उपलब्ध सुविधाओं, मिड-डे-मील योजनाओं की सुविधाओं से अनभिज्ञ हैं व वंचित हैं। देश में बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध करवाने के लिए आंगनबाड़ी केन्द्र चल रहे हैं। यहां बच्चों को राज्यवार प्रचलित भोजन दाल, चावल, चपाती उपलब्ध करवाई जा रही है, साथ ही विटामिन-ए भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। लेकिन विभिन्न चरणों में नागरिकों की उदासीनता का अवैध लाभ भ्रष्ट लोग उठा रहे हैं।केन्द्रीय व राज्य प्रशासन को भोजन उपलब्ध करवाने वाली योजनाओं की कमियों को तेजी से दूर करने के प्रयास करने होंगे। अभी डिजीटल इंडिया के दौर में योजनाओं को मूर्त रूप लेने में वक्त लग रहा है। तेजी से तरक्की कर रही अर्थव्यवस्था के लिए यह देरी चुनौती हैं।