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Saturday, February 21, 2026
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    परीक्षा रद्द करने के निर्णय का शिक्षाविदें ने किया स्वागत, अभिभावक-छात्र नाखुश

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    परिचर्चा। कोरोना के चलते सीबीएसई ने देश भर में रद्द की 12वीं की परीक्षाएं

    सच कहूँ/सुनील वर्मा
    सरसा। बढ़ते कोविड संक्रमण के चलते दसवीं के पश्चात अब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने बारहवीं कक्षा की परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। वहीं सीबीएसई के पश्चात हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने भी प्रदेश में बारहवीं की परीक्षा को रद्द कर दिया है। सरकार के इस फैसले से जहां कुछ विद्यार्थी खुश नजर आ रहे है। वहीं पढ़ाई में अव्वल रहने वाले विद्यार्थियों में इस फैसले को लेकर मायूसी देखी जा रही है। विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों का कहना है कि सरकार ने परीक्षा की टेंशन तो दूर कर दी है।

    लेकिन इसके साथ ही परीक्षाओं से जुड़ी अनेक समस्या सामने आकर खड़ी हो गई है। जिनमें मुख्य रूप से विद्यार्थियों को उत्तीर्ण कैसे किया जाएगा, उनका कॉलेजों में दाखिला किस प्रकार होगा तथा उसके क्या मापदंड होंगे। बारहवीं कक्षा की परीक्षाओं को रद्द करने के बारे में सच कहूँ द्वारा जब अभिभावकों, विद्यार्थियों व शिक्षाविदों से बातचीत की गई तो उनके प्रमुख विचार इस प्रकार है।

    कोविड संक्रमण के इस दौ में सरकार ने बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए एक साकारात्मक फैसला लिया है। लेकिन 12वीं कक्षा की परीक्षा विद्यार्थियों को भविष्य में आगे बढ़ने में एक अहम भूमिका निभाती है। विद्यार्थियों की काबिलियत को जांचने का परीक्षा एक उचित माध्यम है, इसलिए परीक्षा का होना जरूरी था।
    -निष्ठा, छात्रा 12वीं कक्षा

    देश में कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते मामलों के बीच सीबीएसई का 12वीं की बोर्ड परीक्षा रद्द करने का फैसला उचित है। क्योंकि बच्चों की जिंदगी ज्यादा महत्वपूर्ण है। जहां तक विद्यार्थियों के भविष्य का सवाल है, वे लगातार तैयारी करते रहें और आने वाले समय में जो भी प्रतियोगी परीक्षाएं होंगी, उसमें सर्वश्रेष्ठ करने का प्रयत्न करें।
    -नीरज पाहुजा, जिला गणित विशेषज्ञ, सरसा।

    मेरी पोती ने कक्षा बारहवीं के एग्जाम देने थे, लेकिन सरकार ने एक दम से परीक्षा रद्द कर दी। अच्छे बच्चों के लिए फैसला अच्छा नहीं है।क्योंकि पूरा साल मेहनत करते हैं और उसके बाद आम बच्चों के साथ उनकी गिनती हो जाती हैं। फिर अच्छे और आम बच्चों में अंतर ही क्या रहा।
    -तारा मणी, अभिभावक।

    कोरोना काल के इस चुनौतीपूर्ण समय में बच्चों और अभिभावकों के सामने परीक्षाओं को लेकर चिंता बनी हुई थी, लेकिन अब एग्जाम कैंसल होने से ये चिंता दूर हुई है। लेकिन बोर्ड परीक्षाओं से जुड़े अभी भी बहुत सारे ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब मिलना बाकी है। कौन कैसे उत्तीर्ण होगा? आगे विश्वविद्यालय में एडमिशन कैसे होगा? क्या मानदंड होंगे?
    -डॉ. मुकेश कुमार, जिला विज्ञान विशेषज्ञ सरसा।

    हम पूरे साल मेहनत करते रहे और अंत में यही होना था तो हमें 2 महीने से लटकाए क्यों रखा। हमें अप्रैल में ही बता देना चाहिए था कि पेपर नहीं होंगे। ताकि हम भविष्य के बारे में कुछ सोच पाते।
    -रिया, स्टूडेंट।

    मैं सरकार के इस निर्णय से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हूँ। क्योंकि मैने परीक्षा की अच्छे से तैयारी की थी। लेकिन अब अंक एवरेज के हिसाब से मिलेंगे और उनकी परसेंटेज भी कम बनेगी। जिसका हमें भविष्य में जॉब आदि में नुकसान होगा। हमने जो मेहनत की थी, उसका हमें फायदा नहीं होगा।
    -लक्ष्य चुघ, दसवीं कक्षा।

    हमारे बच्चे मार्च से लेकर अब तक परेशान रहे और अब आकर सरकार ने फरमान जारी कर दिया की परीक्षा नहीं होगी। बिल्कुल गलत है। अगर ऐसा ही करना था तो पहले बता देना चाहिए था। कम से कम बच्चे परेशान तो ना होते।
    -मंजू बाला अभिभावक।

    आज सरकार का फैसला सुनकर बड़ा दुख हुआ। सभी बच्चे पूरा साल तैयारी कर रहे थे और एकदम से सरकार ने कह दिया कि परीक्षा रद्द है। तीन बार परीक्षाओं को स्थगित किया गया। ऐसा ही हमारे बीएससी के छात्रों के साथ हो रहा है। हम भी परेशान हैं कि क्या होगा जो सिलेबस आता था, वह हम भूल चुके हैं। अगर सरकार ने ऐसे ही फैसले करने हैं तो जल्दी से फैसला करना चाहिए। ताकि कॉलेज वाले बच्चों को कोई परेशानी ना हो
    -भव्य वशिष्ठ।

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