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    AI: एआई तकनीक चिकित्सा क्षेत्र में एक अत्यंत उपयोगी सपोर्ट सिस्टम के रूप में उभर रही

    New Delhi
    New Delhi: एआई तकनीक चिकित्सा क्षेत्र में एक अत्यंत उपयोगी सपोर्ट सिस्टम के रूप में उभर रही

    नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज़)। Artificial Intelligence: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक चिकित्सा क्षेत्र में एक अत्यंत उपयोगी सपोर्ट सिस्टम के रूप में उभर रही है। विशेष रूप से रेडियोलॉजिकल रिपोर्ट्स, एमआरआई, सीटी स्कैन, इको और ईसीजी जैसे जांच माध्यमों के विश्लेषण में एआई टूल्स ने 70 से 80 प्रतिशत तक की उल्लेखनीय सफलता दर्ज की है। इसी प्रकार, ईसीजी के आधार पर एआई तकनीक के माध्यम से भविष्य में संभावित हृदयाघात (हार्ट अटैक) के जोखिम का पूर्वानुमान लगाने में भी 70 प्रतिशत से अधिक मामलों में सटीक परिणाम प्राप्त हुए हैं।

    यह तकनीक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सटीक, तीव्र और सुलभ बनाने की दिशा में क्रांतिकारी योगदान दे रही है। यह जानकारी वार्क रिसर्च सेंटर सिडनी यूनिवर्सिटी ऑस्ट्रेलिया में साइंटिफिक डायरेक्टर प्रोफेसर क्लारा चाओ ने दी। वे महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी में चौथे डॉ के डी गुप्ता ऑरेशन में मुख्य वक्त के तौर पर बोल रही थीं। प्रोफेसर क्लारा ने कहा कि एआई टूल्स के जरिए हार्ट अटैक की संभावना की पूर्व सूचना देने में उल्लेखनीय मदद मिल रही है। इसमें भी 85 प्रतिशत तक मामलों में सूचनाएं सही पाई गई हैं।

    यह एक सुखद संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि डेटा, रिकॉर्ड रखने, लो रेजोल्यूशन सूचनाओं को हाई रेजोल्यूशन बनाने में भी यह तकनीक उपयोगी साबित हो रही है। बहुत जल्द ही मोबाइल गैजेट्स में बल्ड प्रेशर, धड़कन तथा श्वास गति आदि की जानकारी के लिए अधिक विश्वसनीय टूल्स आ रहे हैं जो सामाजिक स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने कहा कि भारत में भी अब बड़े अस्पतालों में इस तकनीक का प्रयोग बढ़ रहा है। उन्होंने महात्मा गांधी अस्पताल की अत्याधुनिक सेवाओं की सराहना करते हुए इसे विश्वस्तरीय बताया। Artificial Intelligence

    इस अवसर पर महात्मा गांधी मेडिकल यूनिवर्सिटी के चेयरमैन डॉ विकास स्वर्णकार ने बताया कि महात्मा गांधी अस्पताल में साइबर नाइफ, पैट स्कैन, न्यूरो नेविगेशन, रोबोट आदि में ए आई तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। संस्थापक डॉ एम एल स्वर्णकार ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को डॉक्टर का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि यह तकनीक भी मानवीय समझ से बनाई जा रही है। और फिर इसे रोगी के लक्षणों, हिस्ट्री आदि के बारे में भी समझना होता है। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही महात्मा गांधी अस्पताल को पेपरलेस बनाया जाएगा।

    प्रोफेसर के डी गुप्ता की स्मृति में आयोजित इस वैज्ञानिक कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी वाइस चांसलर डॉ अचल गुलाटी, डॉ विनय कपूर, डॉ राजीव गुप्ता, डॉ संजीव गुप्ता, श्रीमती मीना स्वर्णकार, डॉ शोभित स्वर्णकार, श्री आर आर सोनी, डॉ एन डी सोनी, श्री प्रदीप पायने, डॉ राजा बाबू पंवार, डॉ नीरज कासलीवाल सहित बड़ी संख्या में डॉक्टर्स मौजूद रहे।

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