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    अम्बाला: भाजपा-कांग्रेस में सीधी जंग, किसे मिलेगी जीत?

    Ambala: BJP-Congress direct battle, who will win?

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    अम्बाला/यमुनानगर सच कहूँ/लाजपतराय/कंवरपाल। अंबाला संसदीय सीट हरियाणा की एकमात्र ऐसी सीट है जहां एक साथ दो सांसद चुने जाने का रिकॉर्ड है। ऐसा अम्बाला सीट के सामान्य और आरक्षित दो भागों में बंटे होने के कारण हुआ था। यही कारण है कि 16 लोकसभा चुनाव में से यहां 17 सांसद चुने गए। लेकिन 2 सांसद चुनने की प्रक्रिया हरियाणा बनने से पहले की बात है। आजादी के बाद हुए 16 लोकसभा चुनाव में अंबाला रिजर्व सीट पर मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा में ही रहा है। अगर पहले के राजनीतिक समीकरण देखें तो इस सीट पर अधिकतर कांग्रेस का कब्जा रहा है। एक बार बाजी बसपा के अमन कुमार नागरा के हाथ लगी जबकि शेष 15 में से 9 बार कांग्रेस और 6 बार भाजपा ने यहां अपना दबदबा बनाया।

    आप से 7 नेताओं ने जताई है चुनाव लड़ने की इच्छा

    वर्तमान में अंबाला संसदीय सीट तीन जिलों अंबाला, यमुनानगर व कालका तक फैली है। अंबाला हलका आजादी के बाद पटियाला एवम ईस्ट पंजाब स्टेट यूनियन अर्थात पेप्सू का हिस्सा रहा। वर्ष 1962 में आरक्षित चुनाव क्षेत्र घोषित होने के बाद से यह अब तक अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित संसदीय क्षेत्र है। वर्ष 1952 में हुए आम चुनाव में अम्बाला-शिमला लोकसभा क्षेत्र था। उस चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के टेकचंद चुनाव जीते। तब पटियाला से शिमला और कुरुक्षेत्र तक का क्षेत्र में आता था। वर्ष 1957 में यह सीट अंबाला संसदीय क्षेत्र बन गया। लेकिन यहां से दो सांसद चुने गए। सुभद्रा जोशी और चुन्नीलाल कांग्रेस के ही नेता थे। आरक्षित सीट घोषित होने के बाद यहां से जीत मिली कांग्रेस के चुन्नीलाल को। उसी वर्ष यहां से 2 सांसद की व्यवस्था खत्म हो गई।

    सैलजा के नाम है 10 साल तक केंद्र में मंत्री रहने का श्रेय

    अंबाला संसदीय क्षेत्र से सबसे ज्यादा 9 बार चुनाव लड़ने का श्रेय जनसंघ के सूरजभान को जाता है जबकि केंद्र में 10 साल मंत्री बनने वाली कांग्रेस की कुमारी शैलजा एकमात्र सांसद रही। भाजपा के सूरजभान लोकसभा में उपाध्यक्ष रहे। 13 दिन की अटल सरकार में वे कृषि मंत्री भी रहे। अब तक की सर्वाधिक अंतर की जीत भाजपा के रतन लाल कटारिया के नाम है। जबकि जीत की तिकड़ी बनाने का श्रेय कांग्रेस के रामप्रकाश के नाम है।

    अम्बाला : अब तक कब-कौन रहा सांसद

    सांसद पार्टी वर्ष

    टेकचंद कांग्रेस 1952-57
    सुभद्रा जोशी कांगेस 1957-62
    चुनीलाल कांग्रेस 1957-62
    चुनीलाल कांग्रेस 1962-67
    सूरजभान भारतीय जनसंघ 1967-71
    राम प्रकाश कांग्रेस 1971-77
    सूरजभान भारतीय लोकसभा 1977-80
    सूरजभान जनता पार्टी 1980-84
    राम प्रकाश कांग्रेस 1984-89
    राम प्रकाश कांग्रेस 1989-91
    राम प्रकाश कांग्रेस 1991-96
    सूरजभान भाजपा 1996-98
    अमन कुमार बसपा 1998-99
    रतनलाल भाजपा 1999-2004
    शैलजा कांग्रेस 2004-2009
    शैलजा कांग्रेस 2009-2014
    रतनलाल भाजपा 2014-2019

     

     

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