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Saturday, February 7, 2026
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    एक प्रयास और बदल गई सुखदुआ समाज की तकदीर

    Dera Sacha Sauda, Gurmeet Ram Rahim, Welfare Works, Attempt, Luck

    समाज की मुख्यधारा में सिर उठाकर जीने का मिला कानूनी हक

    • रंग लाया डेरा सच्चा सौदा का अभियान
    • पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शुरू की थी मुहिम

    सरसा। कुदरत भले ही उनके साथ इंसाफ नहीं कर पाई, सुख की दुआ करने के बावजूद भले ही वे जमाने के लिए हंसी के पात्र हों, दुनिया उन्हें कितनी ही हिकारत भरी नजरों से देखती हो, ट्रेनों बसों और घरों में उनके ताली ठोंकने पर लोग ठहाके लगाते हों लेकिन समाज के उपहास, उपेक्षा को झेलने के लिए अभिशप्त इन किन्नरों की जिंदगी के पीछे के असल दर्द को समझने व इनके जीवन को बदलने की अगर किसी ने सही मायने में पहल की तो वो मानवता भलाई के पुंज सर्व धर्म संगम डेरा सच्चा सौदा सरसा ने। Dera Sacha Sauda

    किन्नरों की दशा सुधारने व उन्हें समाज की मुख्य धारा में डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पावन दिशा निर्देशन में पूज्य माता नसीब कौर जी इन्सां वुमेन वैल्फेयर सोसायटी ने वर्ष 2013 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका-604 दायर की थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए अप्रैल 2014 में न्यायमूर्ति के.एस. राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति ए. के. सिकरी की खंडपीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए किन्नरों को पहचान के साथ कानूनी दर्जा देने का आदेश देते हुए थर्ड जेंडर यानि लिंग की तीसरी श्रेणी में शामिल करने का सम्मानजनक आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही न केवल किन्नरों को सदियों से मिले। Dera Sacha Sauda

    श्राप से मुक्ति मिल गई और अभिशप्त लाखों किन्नरों की अंधेरी जिंदगियों में उजियारा छा गया। सामाजिक व कानूनी मान्यता मिलने से किन्नर भी स्वंय को इस दुनिया का हिस्सा मानने लगे और उन्हें यकीन हो गया कि अब वे भी इस जमाने के साथ सर उठा के जी सकते हैं। फैसले में वाकई हाशिये पर धकेले जाने वाले किन्नरों को समाज द्वारा कानूनी तौर पर स्वीकार करने का साहस दिखाया गया। लिंग की तीसरी श्रेणी में शामिल होने के साथ ही अब न केवल सुखदुआ समाज को शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश और नौकरियों में आरक्षण मिलने लगा है। Dera Sacha Sauda

    बल्कि सरकार उन्हें चिकित्सा व अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध करा रही है। केंद्र और राज्य सरकारें इनकी सामाजिक और लिंगानुगत समस्याओं का भी निवारण करने के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थानों व नौकरियों में पिछड़ों को दिया जाने वाला आरक्षण भी प्रदान करने लगी है। बगैर किसी जाति-धर्म व ऊंच-नीच के भेदभाव से परे हटकर जीने वाले किन्नर समाज को कानूनी मान्यता दिए जाने के लिए बता दें कि डेरा सच्चा सौदा हमेशा ही किन्नरों को सामाजिक व कानूनी मान्यता दिए जाने का पक्षधर रहा है। पूज्य गुरू जी के आह्वान पर डेरा श्रद्धालुओं ने कई सालों तक लगातार देश-विदेश में हजारों जनजागरूकता रैलियां निकाल किन्नरों को सामाजिक हक दिलाने की मांग की थी। (Dera Sacha Sauda)

    मानवता भलाई के लिए चलते हैं कंधे से कंधा मिलाकर | Dera Sacha Sauda

    मानवता भलाई के लिए बनाई गई शाह सतनाम जी ग्रीन एस वैल्फेयर फोर्स विंग में भी सुखदुआ समाज के लोगों की भारी तादाद है और यही नहीं इनमें मानवता भलाई को लेकर गजब का जोश भी है। विंग द्वारा किए जा रहे जनकल्याण के सभी कार्यों में ये बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं और साध संगत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते हुए नजर आते हैं।

    …जब किन्नर से बने सुखदुआ | Dera Sacha Sauda

    हारमोनल इनबायलेंस के कारण आयी एक बीमारी की वजह से हमारा समाज हमेशा ही उन्हें कौतुहल से देखता आया है। सैंकड़ो-हजारोंं वर्षों से उपेक्षित इस समाज को किन्नर, हिजड़ा, छकका और भी न जाने किन-किन नामों से पुकारा जाता रहा लेकिन पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने 14 नवंबर 2009 को इन्हें समाज की मुख्यधारा में लाने की अनोखी व ऐतिहासिक मुहिम शुरू की और इन्हें सुखदुआ समाज का सम्मानजनक नाम देकर इनकी जिंदगी पर लगा धब्बा हमेशा के लिए मिटा दिया और इसी के साथ हो गई सुखदुआ समाज की अंधेरी जिंदगी में उजाले की श्ुारूआत जो आज भी निरंतर जारी है। Dera Sacha Sauda