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Sunday, February 8, 2026
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    गुरमुख बनकर पा सकते हो मन पर काबू

    Anmol Vachan by Saint Dr. MSG
    सरसा। पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मन एक ऐसी बुरी बला है जो जल्दी से काबू में नहीं आता। जिन लोगों को मन की खुराक मिलनी शुरू हो जाती है वो सारी हदें पार करके मन की खुराक लेने कहीं भी पहुंच जाते हैं। चुगली, निंदा, दूसरों की बुराई करना, अपने आपको समझदार तथा बाकी सबको बेवकूफ समझना, लड़ाई-झगड़ा, नफरत करने वाले लोगों का संग करना ये सब मन की खुराक है।
    पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मन ऐसी जालिम चीज है जो इन्सान को तिगड़ी नाच नचाता रहता है। अगर आप कहते हैं कि मेरे पास बहुत ताकत है, मेरे माता-पिता बड़े पॉवरफुल हैं, मेरे भाई की ऊपर तक पहुंच है, आपके पास माया रानी (धन-दौलत) बहुत है और आप यह कोशिश करें कि इन सबकी धौंस दिखाकर मन को रोक दें तो यह असंभव है क्योंकि मन बहुत बुरी बला है। मण 40 किलो को भी कहते हैं लेकिन यह मन तो टन से भी ज्यादा भारी है। मन इन्सान को सोते-जागते, उठते-बैठते कहीं भी नहीं छोड़ता है। मन आदमी को ऐसा नचाता है कि आदमी कठपुतली बनकर रह जाता है। मन इतना गंदा है कि गुरु के हुक्म में न रहते हुए मनमते लोगों का संग ज्यादा करोगे तो पता नहीं यह कब फट्टी पोंछ दे, इसका कोई भरोसा नहीं है। इसलिए कहीं जाओ तो हुक्म में, चलो तो हुक्म में, खाओ तो हुक्म में। आप जी फरमाते हैं कि एक मुरीद को अंधा, बहरा, गूंगा होना चाहिए अर्थात् गुरु की आंखों से देखें, गुरु जैसे वचन कहे वैसे ही मीठा व प्रेम-प्यार से बोलना चाहिए। किसी को गलत नहीं बोलना, जैसा गुरु कहे वैसा सुनो। अगर आपको मजबूरी में सुनना पड़ जाए तो सुमिरन करो वहां से चलते बनो। तो भाई! जितना कोई मनमर्जी करेगा उतना ही वह दुखी, परेशान रहेगा। अगर गुरु का कहा मान लिया तो गुरमुख और मन का मानता है तो मनमुख।
    पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि रूहानियत में जो डूबते हैं और वही डूबकर तर जाते हैं। दीनता-नम्रता, अणख, गैरत के साथ जो चलता है वही मन का मुंह मोड़ सकता है। जो सत्संगी है चाहे उसने थोड़ा ही अभ्यास किया है वह जानता है कि मन की आवाज कौन-सी है और आत्मा की आवाज कौन-सी है लेकिन मन इतना हावी हो जाता है कि यही सोचता है कि देखा जाएगा। जब रगड़ा जाएगा फिर देखते रहना। इसलिए गुरमुख बनो, राम-नाम का जाप करो। प्रभु की भक्ति करोगे तो मन काबू में आएगा और मालिक के दर्शन कण-कण, जर्रे-जर्रे में जरूर कर पाओगे।

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