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    पूर्व महापौर अशु कुमार वर्मा ने निगम से हाउस टैक्स नीति स्पष्ट करने की उठाई मांग 

    Ghaziabad
    Ghaziabad: पूर्व महापौर अशु कुमार वर्मा ने निगम से हाउस टैक्स नीति स्पष्ट करने की उठाई मांग 

    हाउस टैक्स पर असमंजस, नागरिकों में बढ़ी परेशानी, स्पष्ट नहीं हाउस टैक्स नीति,अशु कुमार वर्मा ने महापौर को लिखा पत्र

    गाजियाबाद (सच कहूँ/रविंद्र सिंह)। Ghaziabad: नगर निगम में हाउस टैक्स की दरों को लेकर एक बार फिर भ्रम की स्थिति सामने आई है। बढ़ी हुई दरों के लागू होने अथवा न होने को लेकर असमंजस के चलते आम नागरिक असहज महसूस कर रहे हैं। इसी क्रम में राजनगर निवासी एवं गाज़ियाबाद के पूर्व महापौर अशु कुमार वर्मा ने नगर निगम प्रशासन से हाउस टैक्स की नीति को स्पष्ट रूप से सार्वजनिक करने की मांग की है और इस संबंध में महापौर सुनीता दयाल  को पत्र भी लिखा है।अशु कुमार वर्मा ने बताया कि समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि हाउस टैक्स की बढ़ी हुई दरें वर्तमान वित्तीय वर्ष में लागू नहीं होंगी।

    नागरिक पुराने दरों पर ही 20 प्रतिशत छूट के साथ हाउस टैक्स जमा कर सकेंगे तथा नई बढ़ी हुई दरें अगले वित्तीय वर्ष से लागू होंगी। इन्हीं सूचनाओं के आधार पर उन्होंने 17 दिसंबर 2025 को अपने निवास आर -9/11, राजनगर, गाज़ियाबाद का हाउस टैक्स जमा करने के लिए कविनगर जोन कार्यालय में राशि भेजी।उन्होंने बताया कि जोन कार्यालय में उपस्थित कर्मचारियों ने पहले पुराने दरों पर टैक्स जमा करने पर सहमति जताई। इसके बाद जोनल प्रभारी से फोन पर हुई बातचीत में भी यही जानकारी दी गई कि नगर निगम के पास ऐसा कोई लिखित आदेश या सॉफ्टवेयर अपडेट उपलब्ध नहीं है, जिससे यह स्पष्ट हो कि हाउस टैक्स बढ़ी हुई दरों पर जमा कराया जाए। Ghaziabad

    इसके बावजूद, उनके द्वारा भेजी गई धनराशि को  पार्ट  पेमेंट के रूप में जमा कर लिया गया, जबकि वर्तमान बिल भी संलग्न था। इस प्रक्रिया से न केवल उन्हें, बल्कि अन्य नागरिकों को भी असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व महापौर अशु कुमार वर्मा ने नगर निगम गाज़ियाबाद से मांग की है कि हाउस टैक्स से संबंधित निगम की नीति को स्पष्ट रूप से सार्वजनिक किया जाए, ताकि नागरिकों को यह जानकारी मिल सके कि टैक्स किस दर से और किन शर्तों पर जमा किया जाना है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव में आम जनता को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसे शीघ्र दूर किया जाना आवश्यक है।

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