एफआर लगाने के लिए आरोपी से रिश्वत लेते हुए एएसआई गिरफ्तार

मुकदमा दर्ज होने के एक महीने बाद भी एक भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की

श्रीकरणपुर (सच कहूँ न्यूज)। श्रीकरणपुर थाना क्षेत्र में पाकिस्तान सीमा के समीप एक गांव में दो व्यक्तियों में मकान संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद में एक महीना पहले दर्ज हुए मुकदमे में आरोपियों की गिरफ्तारी करने की बजाय मुकदमे में अंतिम प्रतिवेदन(एफआर) लगा देना के नाम पर एक आरोपी से आज रिश्वत लेते हुए थाना भवन में सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) महावीर प्रसाद रंगे हाथों पकड़ा गया। श्रीगंगानगर में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो एसीबी की (द्वितीय इकाई)में विजेंद्र सीला के नेतृत्व में टीम ने आज दोपहर श्रीकरणपुर थाना में अपने कक्ष में परिवादी उग्रसेन जाट (42) निवासी चक 2- एफसी गांव मुकुन से रिश्वत के 5 हजार लेते हुए एएसआई महावीर प्रसाद को जैसे ही पकड़ा थाने में मौजूद कर्मचारियों में हड़कंप मच गया।

कई कर्मचारी तो थाना छोड़कर गायब हो गए।रिश्वत की राशि एएसआई के पहने हुए कपड़ों में मिली। हाथ धुलवाने पर रिश्वत का गुलाबी रंग भी उतर आया। वह इस मामले में 10 हजार रुपए परिवादी से पहले ले चुका था। एसीबी ने बताया कि श्रीकरणपुर थाना में मुकुन निवासी इंद्रसेन जाट ले 3 जुलाई को मुकदमा दर्ज करवाया कि 3 जून की रात 9 बजे उसके चाचा धर्मपाल और धर्मपाल का बेटा उग्रसेन उर्फ लाला,श्रवण, राकेश, मोतीलाल (पुत्र रामलाल) हरियाणा के बदमाशों के साथ तीन गाड़ियों में भरकर आए। साथ में जेसीबी मशीन भी लाए। उसके द्वारा गांव में निर्मित मकान एवं दुकान को एसीबी से तोड़कर नेस्तनाबूद कर दिया। इस मकान में रह रहे बलराज शर्मा को उन्होंने बाहर निकाल दिया।

मौके पर मौजूद सुभाष जाट और चंद्रपाल आदि ने रोकने का प्रयास किया लेकिन उक्त लोगों ने पूरा मकान तहस-नहस कर दिया। बलराज ने धर्मपाल आदि द्वारा की गई तोड़फोड़ का वीडियो बना लिया। इंद्रसेन के अनुसार उसे सुभाष जाट ने फोन पर इस घटना के बारे में बताया।उस समय वह किसी काम से जयपुर गया हुआ था।जयपुर से वापस आने पर धर्मपाल आदि ने अपनी गलती मानी और मामले को पंचायत में निपटा लेने के लिए कहा, लेकिन कोई पंचायत उसने नहीं की। पुलिस ने इस रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों के खिलाफ धारा 457, 427, 143 के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच एएसआई मंशाराम के सुपुर्द कर दी।

मंशाराम का तबादला हो जाने पर जांच एएसआई महावीर प्रसाद के पास आ गई। एसीबी सूत्रों ने बताया कि एएसआई महावीर प्रसाद ने मुकदमे की जांच पड़ताल कर आरोपियों की गिरफ्तारी करने की बजाए आरोपियों से मुकदमे में एफआर लगा देने का कहकर रिश्वत की मांग करनी शुरू कर दी। उसने एक भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की। उग्रसेन जाट ने एसीबी को की शिकायत में बताया कि उसके खिलाफ दर्ज इस मुकदमे में एफआर लगाने के लिए एएसआई महावीर प्रसाद ने 50 हजार की रिश्वत मांगी, लेकिन बाद में वह 15 हजार रुपए में सहमत हो गया। एसीबी ने रिश्वत के लेनदेन की बातचीत का गोपनीय रूप से परसों गुरुवार को सत्यापन करवाया।

इस दौरान महावीर प्रसाद ने परिवादी से 10 हजार रुपए ले लिए। बाकी 5 हजार आज दोपहर थाने में अपने कक्ष में लेते हुए वह रंगे हाथ पकड़ा गया। महावीर प्रसाद मूल रूप से श्रीगंगानगर जिले में ही सादुलशहर तहसील क्षेत्र के गांव नूरपुरा ढाणी का निवासी है। फिलहाल वह श्रीगंगानगर में सूरतगढ़ रोड पर जिला अस्पताल के समीप विकासपुरी में रह रहा है। एसीबी की एक टीम उसके घर की सर्चिंग कर रही है। महावीर प्रसाद को कल रविवार को एसीबी की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।

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