सुमिरन से कटते हैं संचित कर्म

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Anmol Vachan, True Saint

सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान सच्चे दिल से सुमिरन, भक्ति-इबादत करे तो उसके जन्मों-जन्मों के संचित पाप-कर्म कट जाया करते हैं। संचित कर्मों का दायरा बड़ा जबरदस्त है। चौरासी लाख शरीरों को भोगते-भोगते आखिर में मनुष्य शरीर मिला है। अगर आप इनका एक-एक कर्म मानें तो 84 लाख कर्म इस शरीर को उठाने पड़ते हैं। लेकिन इन्सान सुमिरन, भक्ति-इबादत करे, अपने अल्लाह, वाहेगुरु, राम पर दृढ़ यकीन रखे, तो जन्मों-जन्मों के पाप-कर्म कट जाया करते हैं। पूज्य गुरू जी फरमाते हैं कि पाप-कर्मों के कारण इन्सान को यह नहीं पता होता कि आने वाले समय में उसे किस स्थिति का सामना करना पड़ेगा इसलिए आप सुमिरन के पक्के बन जाओ। एक-एक घंटा सुबह-शाम मालिक की याद में समय लगाओ ताकि पाप-कर्म कट जाएं और जीते-जी गम, दु:ख, दर्द, चिंताओं से मुक्ति हासिल करके इन्सान मालिक की कृपा-दृष्टि के काबिल बन जाए।

पूज्य गुरू जी फरमाते हैं कि इस कलियुग में इन्सान वचनों पर अमल नहीं करता बल्कि मनमर्जी करता है और मनमर्जी करने से परेशानियां आती हैं, फिर इन्सान इसका दोष मालिक को देता है। वह कभी यह नहीं कहता कि मुझमें कमियां हैं। पूज्य गुरू जी फरमाते हैं कि जब आप सेवा कर रहे हों, तो निगाह सेवा की तरफ ही रखनी चाहिए। निंदा-चुगली, बुराइयां नहीं करनी चाहिए। अगर आप वाकई में फल चाहते हैं, तो सेवा करते समय आप अपने अल्लाह, वाहेगुरु, सतगुरु, मौला में ध्यान रखें, मेहनत, हिम्मत करें, तो पाप-कर्म भी कटेंगे और मालिक की कृपा दृष्टि के काबिल भी बनते चले जाएंगे। इन्सान को कभी किसी को दोष नहीं देना चाहिए क्योंकि दोष इन्सान के कर्मों का होता है। इन्सान वचन नहीं मानता, तो दु:ख-दर्द, परेशानी झेलनी पड़ती हैं और अगर इन्सान वचन मान लेता है तो आने वाले पहाड़ जैसे कर्म भी कंकर में बदल जाया करते हैं। इसलिए आप वचन सुना करो और अमल किया करो।

संत यही वचन करते हैं कि आप अल्लाह, वाहेगुरु का नाम जपो और उसकी बनाई सृष्टि की नि:स्वार्थ भावना से सेवा करो। यकीनन आप मालिक की कृपा-दृष्टि के काबिल बन जाएंगे और दोनों जहान की खुशियों के हकदार भी बनेंगे। पूज्य गुरू जी फरमाते हैं कि इन्सान कई बार जो सोचता है, वो पूरा नहीं होता। इसका मतलब यह नहीं होता कि यह आपके लिए बुरा हो रहा है। हो सकता है कि आपके लिए अच्छा हो रहा है। जो लोग सच्चे दिल से मालिक की भक्ति-सेवा करते हैं, मालिक उनका कभी भी, कुछ भी बुरा नहीं होने देते।

हमेशा उनका साथ देते हैं, हमेशा उनके साथ रहते हैं और किसी भी तरह की अंदर-बाहर से कमी नहीं आने देते। इसलिए टेंशन न करो, जो हुआ अच्छा था, हो रहा है अच्छा है और होगा, वो भी अच्छा है। क्योंकि सब भगवान ने ही करना है और जिसने उस मालिक पर डोरी छोड़ दी कि मेरा अल्लाह, वाहेगुरु, राम, सतगुरु, मौला जाने, तो फिर वो ही जाने। जरा सोचो कि कठपुतली को क्या पता कैसे नाचना है। यह तो अंगुलियां बताती हैं कि वो कैसे नाचेंगी। उसी तरह एक मुरीद जब अपने अल्लाह, वाहेगुरु पर डोरियां छोड़ देता है, तो उस पर पूर्णत: छोड़ दो और खुद मेहनत, हिम्मत करो तो यकीनन मालिक उसको अच्छे-नेक रास्ते पर लेकर जाएगा और खुशियों से मालामाल बना देगा।

 

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