नई दिल्ली/ढाका। बांग्लादेश में आज यानि गुरुवार 12 फरवरी को 13वें संसदीय चुनाव की वोटिंग संपन्न हो गई है। कड़ी सुरक्षा और लोगों में भारी उत्साह के बीच 299 सीटों पर वोट डाले गए। हालांकि, वोटिंग के दौरान भारी हिंसा और पोलिंग बूथों पर महिला एजेंट्स के साथ बदतमीजी करना भी शामिल बताया गया है। कई महीनों की राजनीतिक अस्थिरता, विरोध प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन के बाद यह पहला राष्ट्रीय चुनाव है, जिसे देश के लोकतांत्रिक भविष्य की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। वर्ष 2024 के जनआंदोलन के परिणामस्वरूप पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद छोड़ना पड़ा था। उसके बाद से देश संक्रमण काल से गुजर रहा है। Bangladesh News
इस बार के चुनाव में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। अवामी लीग के चुनाव में भाग लेने पर प्रतिबंध लगाए जाने के कारण मुकाबला मुख्यतः दो प्रमुख ध्रुवों के बीच सिमट गया है। एक ओर तारिक रहमान के नेतृत्व में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) है, तो दूसरी ओर जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला व्यापक गठबंधन मैदान में है।
बीएनपी की रणनीति और वादे
पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र तारिक रहमान लंबे समय तक विदेश में रहने के बाद सक्रिय राजनीति में लौटे हैं। उन्होंने अपने अभियान को आर्थिक पुनरुत्थान, प्रशासनिक सुधार और कानून-व्यवस्था की बहाली जैसे मुद्दों पर केंद्रित किया है। बीएनपी का दावा है कि वह संस्थागत ढांचे को सुदृढ़ कर रोजगार सृजन और निवेश को बढ़ावा देगी। रहमान स्वयं को स्थिर नेतृत्व और पारदर्शी शासन का विकल्प बताते हुए मतदाताओं से समर्थन की अपील कर रहे हैं।
दूसरी ओर जमात-ए-इस्लामी ने वर्षों बाद अपनी राजनीतिक उपस्थिति को सशक्त रूप में स्थापित किया है। उसने कई छोटे दलों और युवा नेतृत्व वाले संगठनों के साथ मिलकर एक साझा मोर्चा बनाया है। इसमें 2024 के आंदोलन से जुड़े युवाओं द्वारा गठित नेशनल सिटिजन पार्टी भी शामिल है। यह गठबंधन भ्रष्टाचार, वंशवाद और केंद्रीकृत सत्ता के विरुद्ध अभियान चला रहा है। उसका उद्देश्य जनआक्रोश को मतों में परिवर्तित कर राजनीतिक परिवर्तन को स्थायी स्वरूप देना है।
अंतरिम सरकार और संवैधानिक सुधार
अंतरिम प्रशासन का नेतृत्व कर रहे मुहम्मद यूनुस ने इस चुनाव को देश के लिए निर्णायक क्षण बताया है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं के पुनर्निर्माण का अवसर कहा है। इस चुनाव में केवल 300 सांसदों का चयन ही नहीं होगा, बल्कि मतदाता संवैधानिक सुधारों पर भी अपना मत देंगे। प्रस्तावित सुधारों में प्रधानमंत्री के कार्यकाल की सीमा निर्धारित करना तथा कार्यपालिका की शक्तियों पर संस्थागत नियंत्रण को मजबूत करना शामिल है।
देश में लगभग 12.7 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं। चुनाव परिणाम न केवल बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति को प्रभावित करेंगे, बल्कि दक्षिण एशिया के शक्ति संतुलन पर भी असर डाल सकते हैं। क्षेत्रीय शक्तियां ढाका की राजनीतिक दिशा पर गहन दृष्टि बनाए हुए हैं, क्योंकि इसका प्रभाव व्यापार, सुरक्षा और कूटनीतिक संबंधों पर पड़ सकता है। विश्लेषकों का मत है कि यह चुनाव बांग्लादेश के लोकतांत्रिक ढांचे की स्थिरता की वास्तविक परीक्षा है। Bangladesh News















