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    बैंक ऑफ़ बड़ौदा ने कर्ज पर ब्याज में की 0.25 प्रतिशत की कमी

    Bank of Baroda
    Bank of Baroda बैंक ऑफ़ बड़ौदा ने कर्ज पर ब्याज में की 0.25 प्रतिशत की कमी

    नई दिल्ली। बैंक आॅफ बड़ौदा ने कर्ज पर ब्याज की अपनी मुख्य दर 0.25 प्रतिशत कम कर दी है। सार्वजनिक क्षेत्र का यह बैंकिंग प्रतिष्ठान रिजर्व बैंक की रेपो दर में इसी स्तर की कमी के बाद कर्ज सस्ता करने की घोषणा करने वाले पहले प्रमुख बैंकों में शामिल हो गया है। बैंक आॅफ बड़ौदा की शनिवार को जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है, “यह आप की जानकारी के लिए है कि भारतीय रिजर्व बैंक की नीतिगत रेपो दर कम करने के बाद देश के बड़े सार्वजनिक बैंकों में से एक बैंक आॅफ बड़ौदा ने 06 दिसंबर 2025 से अपने बड़ौदा रेपो-सम्बद्ध ऋण की ब्याज दर (बीआरएलएलआर) में 25 आधार अंक (0.25 प्रतिशत) की कटौती की है। बैंक का बीआरएलएलआर अब 7.90 प्रतिशत है।” विज्ञप्ति में कहा है कि बीआरएलएलआर में इस बदलाव के साथ बैंक आॅफ बड़ौदा ने रिजर्व बैंक की नीतिगत दर में कटौती का पूरा फायदा अपने रेपो-सम्बद्ध ऋण पर ब्याज दर के जरिये उधार लेने वाले अपने ग्राहकों को दे दिया है।

    उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को अपनी रेपो दर को 5.50 प्रतिशत से घटा कर 5.25 कर दिया है तथा बैंकों के पास कर्ज के लिए नकदी की मात्रा बढ़ाने के उपाय के तहत इस महीने खुले बाजार में एक लाख करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद की घोषणा की है। इससे पहले सरकारी क्षेत्र के बैंक आॅफ इंडिया और इंडियन बैंक ने शुक्रवार को रिजर्व बैंक की नीतिगत घोषणा के कुछ ही घंटे के अंदर रेपो आधारित अपनी ऋण दर में 25-25 आधार अंकों की कमी कर क्रमश: 8.10 प्रतिशत और 7.95 प्रतिशत किये जाने की घोषणा की।

    इस बीच, देश के सबसे बड़े ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन सी.एस. सेट्टी ने रिजर्व बैंक के मौद्रिक उपायों पर शनिवार को टिप्पणी करते हुए कहा, “आरबीआई की दिसंबर 2025 की मौद्रिक नीति ने एक साफ और भरोसे वाला संदेश दिया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में है, जिसमें सशक्त आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ इस समय महंगाई भी कम है। आरबीआई का 2025-26 के लिए जीडीपी वृद्धि का पूवार्नुमान पहले के 6.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत करना यह दिखता है कि केंद्रीय बैंक अर्थव्यवस्था को लेकर आश्वस्त है। रेपो दर में कटौती करने का फैसला, साथ ही भविष्य में और कटौती की गुंजाइश के लिए दरवाजा खुला रखने से अर्थव्यवस्था को अचानक आने वाले संभावित झटकों या बाहरी मुश्किलों से बचाने में मदद मिलती है।” सेट्टी की राय में आरबीआई का यह नीतिगत कदम “लंबे समय तक, और अधिक वृद्धि ” की रणनीति की निवेश, कर्ज और उपभोग तक फैली बुनियाद को मजबूत करने वाला है। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक नकद धन के प्रवाह के प्रबंध के उपायों का मकसद उधार के बाजार को स्थिर रखने और उधार लेने की लागत कम करना है। उनके अनुसार, आरबीआई का रेपो में कटौती करना, भविष्य की दिशा को लेकर रुख तटस्थ रखना और तरलता के लिए लक्षित हस्तक्षेप की घोषणा का मकसद कीमत और वित्तीय स्थिरता को सुरक्षित रखते हुए अर्थव्यवस्था के आवेग को बनाये रखना है।”