हमसे जुड़े

Follow us

12.4 C
Chandigarh
Saturday, February 7, 2026
More
    Home विचार सम्पादकीय संपादकीय : बै...

    संपादकीय : बैकिंग सिस्टम मजबूत करने की आवश्यकता

    Banking-System
    Banking-System
    पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के साथ हुई धोखाधड़ी का मामला अभी शांत नहीं हुआ कि अब यस बैंक के ग्राहक अपना पैसा डूब जाने से भयभीत हैं, लेकिन राहत की बात यह है कि केंद्र सरकार व भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) लोगों का पैसा नहीं डूबने का भरोसा दिलवा रहे हैं। सरकार व आरबीआई इस बात की गारंटी दे रहे हैं। वैसे भी पांच लाख तक जमा करवाने वाले तो बिल्कुल चिंता न करें क्योंकि यह तो बीमा स्कीम के अंतर्गत ही आ जाएंगे लेकिन बात केवल लोगों के पैसे डूबने या न डूबने की नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था और बैकिंग सिस्टम की है।
    बैंक अर्थव्यवस्था का अहम अंग बन गए हैं। निजी बैंकों ने अर्थव्यवस्था में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है, जिनका कारोबार सरकारी बैंकों से कम नहीं। सेवाओं की गुणवत्ता के दृष्टि से निजी बैंक अच्छा मुनाफा कमा रहे थे यस बैंक तो मार्किट में मजबूत पकड़ बना चुका था, तुरंत कार्य होने और तेजी से लोन मिलने जैसी सुविधाएं ग्राहकों को आकर्षित कर रही थी लेकिन भ्रष्टाचार जैसा कलंक ही निजी बैंकों पर लगने लगा है। यस बैंक पर आरोप भी पंजाब नेशनल बैंक की तरह ही लग रहे हैं। दोनों बैंकों के संदर्भ में यही कहा जा रहा है कि बैंकों ने उन कंपनियों को लोन दिए, जो कर्ज लौटाने में असमर्थ थे। नीरव मोदी और मुहैल चौकसी जैसे लोग पीएनबी का 14000 करोड़ कर्ज न लौटाने के कारण ही विदेशों में बैठे हैं। इतनी बड़ी रकम न लौटाने के बावजूद वे विदेश कैसे पहुंच गए यह सवाल बैंक अधिकारियों पर उठता रहा है।
    ताजा मामला यस बैंक का है, चर्चा अब यह भी है कि रिजर्व बैंक ने कमान कब संभाली या कमान संभालने के बावजूद स्थिति क्यों नहीं सुधरी। आरबीआई अधिकारियों के अनुसार उन्होंने सही समय पर कदम उठाए, फिर भी ग्राहकों को कुछ हद तक समस्या का सामना करना पड़ेगा। पैसा डूबेगा भी नहीं तो एक ही दिन में मिलेगा भी नहीं। लेकिन यहां सवाल भी अहम है कि यस बैंक की मैनेजमेंट अपनी हेराफेरी को छुपाने में कामयाब रहा। सवाल यह भी है कि क्या यस बैंक ने अपना डूबा कर्ज (एनपीए) को छुपाए रखा? यहां यह बात भी चिंता वाली बन गई है कि निजी बैंकों की सरकारी बैंकों से भी अलग है। लोग निजी बैंकों पर भरोसा नहीं करेंगे, कुछ भी हो न केवल लोगों का पैसा सुरक्षित होना चाहिए बल्कि बैकिंग सिस्टम को विश्वसनीय बनाना होगा। पैसा बैंकों में आएगा फिर ही देश की अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ेगी, अन्यथा निवेशक बैंकों के शेयर कैसे खरीदेंगे? व्यवस्था की खामियों को ढूँढने और स्वीकार करने में देरी नहीं होनी चाहिए। बैंक सरकारी हो या प्राईवेट ठोस व्यवस्था बनानी होगी।

     

    अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।