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Wednesday, February 4, 2026
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    Barnawa: बरनावा आश्रम में उमड़ा जन सैलाब, साध-संगत ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

    Barnawa:
    Barnawa: बरनावा आश्रम में उमड़ा जन सैलाब, साध-संगत ने तोड़े सारे रिकॉर्ड छाया: सुशील कुमार

    Barnawa: बरनावा, रकम सिंह। डेरा सच्चा सौदा के 76वें रूहानी स्थापना माह का शुभ भंडारा रविवार को उत्तर प्रदेश के जिला बागपत के बरनावा स्थित एमएसजी डेरा सच्चा सौदा व मानवता भलाई केंद्र शाह सतनाम जी आश्रम बरनावा में उत्तर प्रदेश की साध-संगत द्वारा बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।  फसली सीजन और गर्मी के बावजूद भंडारे के नामचर्चा सत्संग कार्यक्रम में आस्था व भक्ति का विहंगम संगम देखने को मिला। साध-संगत के अनूठे प्रेम के आगे जहां विशाल पंडाल साध-संगत से खचाखच भरा था। वहीं आश्रम की ओर आने वाले रास्तों पर नामचर्चा सत्संग की समाप्ति तक साध-संगत के जनसैलाब का आना जारी रहा।

    साध-संगत के जोश के समक्ष प्रबंधकीय समिति द्वारा किए गए सभी प्रबंध छोटे पड़ते नजर आए। पूज्य गुरु संत डा. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन प्रेरणा पर चलते हुए डेरा सच्चा सौदा की ओर से 162 मानवता भलाई के कार्य किए जा रहे है। इन्हीं कार्यों में शामिल क्लाथ बैंक मुहिम के तहत नामचर्चा सत्संग के दौरान 76  जरूरतमंद लोगों को गर्मी के कपड़े वितरित किए गए। इससे पूर्व 11 बजे धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा का इलाही नारा व अरदास बोलकर सत्संग भंडारे कार्यक्रम की शुरुआत हुई। तदुपरांत कविराजों ने सुंदर भजन वाणी के माध्यम से प्रभु परमात्मा की महिमा का गुणगान किया। इसके पश्चात सत्संग पंडाल में लगाई गई बड़ी-बड़ी एलईडी स्क्रीनों पर पूज्य गुरु जी के अनमोल वचन चलाए गए, जिसे साध-संगत ने एकाग्रचित होकर श्रवण किया। इस अवसर पर समस्त साध-संगत ने धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा का इलाही नारा बोलकर पूज्य गुरु जी को रूहानी स्थापना माह की बधाई दी।

     बता दें कि डेरा सच्चा सौदा के संस्थापक बेपरवाह साईं  शाह मस्ताना जी महाराज ने 29 अपै्रल 1948 में डेरा सच्चा सौदा की नींव रखी थी। पूजनीय साईं जी, दूसरे पातशाही पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज व मौजूदा पूज्य गुरु संत डा. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पावन सान्निध्य में रूहानियत के इस सच्चे दर से जुड़कर अब तक करोड़ों लोग नशा व अन्य सामाजिक बुराईयां छोड़कर खुशहाल जीवन जी रहे हैं।

    नामर्चा सत्संग भंडारे कार्यक्रम में कविराजों ने सुंदर भजन वाणी से साध-संगत को निहाल किया। कविराजों ने ये लॉकेट इन्सां का गले में लटकाए रखों, मुर्शिद की निशानी है सीने से लगाए रखों…,  हम है दीवाने सतगुरु तेरी अदा के और कुछ माँगते न चरणों में जगह…,  नाम जैसा अनमोल पदार्थ और नहीं दूजा…, अखियां उड़ीक दिया सहित अनेक भजन बोले। वहीं नामचर्चा सत्संग कार्यक्रम के दौरान पूज्य गुरु जी द्वारा नशा मुक्त समाज की संरचना को लेकर नशे से जागरूक करता गाया गया भजन जागो दुनिया दे लोको व आशीर्वाद मांओं का सुनाया गया। जिस पर साध-संगत ने नाच गाकर खुशियां मनाई।

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