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    Eyesight: सावधान, ये दवा छीन सकती है आंखों की रोशनी, कहीं आप तो नहीं कर रहें यूज

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    Eyesight: सावधान, ये दवा छीन सकती है आंखों की रोशनी, कहीं आप तो नहीं कर रहें यूज

    Eyesight: आजकल कई लोग स्वास्थ्य समस्याओं से निजात पाने के लिए स्टेरॉयड का इस्तेमाल करते हैं। यह दवा कई प्रकार के शारीरिक समस्याओं जैसे एलर्जी, सूजन, अस्थमा, और त्वचा रोगों के इलाज में सहायक मानी जाती है। हालांकि, जब इसका अत्यधिक या गलत तरीके से इस्तेमाल किया जाता है, तो यह आंखों पर गंभीर असर डाल सकता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक स्टेरॉयड का उपयोग आंखों की रोशनी को खतरे में डाल सकता है। आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह और इससे बचने के उपाय।

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    क्या हैं स्टेरॉयड? Eyesight

    स्टेरॉयड एक प्रकार की एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करने वाली) दवा होती है, जो सूजन और एलर्जी की समस्या को कम करने में मदद करती है। यह अस्थमा, गठिया, त्वचा रोगों और ऑटोइम्यून डिजीज के इलाज में उपयोगी होता है। स्टेरॉयड का उपयोग टैबलेट, इंजेक्शन, क्रीम, और आई ड्रॉप्स के रूप में किया जाता है। यह दवा शरीर में सूजन और इन्फेक्शन को कम करने का काम करती है, लेकिन अगर इसका इस्तेमाल बिना डॉक्टर की सलाह के या अत्यधिक समय तक किया जाए, तो यह शरीर के विभिन्न अंगों, खासकर आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है।

    आंखों पर क्या असर डालता है स्टेरॉयड?

    एम्स (AIIMS) के डॉक्टरों के अनुसार, स्टेरॉयड का अत्यधिक उपयोग आंखों पर खतरनाक असर डाल सकता है। अगर कोई व्यक्ति 6 हफ्तों से ज्यादा समय तक स्टेरॉयड का उपयोग करता है, तो यह आंखों की ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचा सकता है। ऑप्टिक नर्व वह नस होती है, जो आंखों को मस्तिष्क से जोड़ती है। यदि यह नर्व डैमेज हो जाती है, तो आंखों से दिखना पूरी तरह से बंद हो सकता है, और बाद में इसे ठीक भी नहीं किया जा सकता।

    विशेषज्ञों का कहना है कि स्टेरॉयड का लंबे समय तक उपयोग ग्लूकोमा (Glaucoma) जैसी गंभीर आंखों की बीमारी का कारण बन सकता है। ग्लूकोमा तब होता है, जब आंखों में दबाव बढ़ जाता है, जिससे ऑप्टिक नर्व पर दबाव पड़ता है और यह नर्व धीरे-धीरे डैमेज हो जाती है। इस प्रक्रिया में शुरुआत में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, जिससे रोग का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, जब बीमारी बढ़ जाती है, तो एक आंख से पूरी तरह से दिखाई देना बंद हो सकता है। इसलिए, ग्लूकोमा को “साइलेंट चोर” कहा जाता है, क्योंकि यह चुपके-चुपके आंखों की रोशनी को छीन लेता है।

    कौन से उत्पादों में होते हैं स्टेरॉयड?

    स्टेरॉयड केवल दवाओं में ही नहीं, बल्कि कई अन्य उत्पादों में भी होते हैं, जैसे कि खांसी की दवाइयां (इन्हेलर), नाक की एलर्जी के लिए नेजल स्प्रे, और स्किन इंफेक्शन के लिए उपयोग होने वाली क्रीम। इन सभी में स्टेरॉयड का मिश्रण होता है, और इनका लगातार उपयोग आंखों पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है। इसीलिए, डॉक्टरों का कहना है कि इन दवाओं और उत्पादों का लंबे समय तक उपयोग आंखों के लिए खतरनाक हो सकता है।

    तनाव और आंखों का दबाव | Eyesight

    इसके अलावा, ज्यादा तनाव भी आंखों के दबाव को बढ़ा सकता है। जब शरीर में तनाव बढ़ता है, तो कॉर्टिसोल नामक हार्मोन का स्तर भी बढ़ जाता है। यह हार्मोन आंखों के दबाव को प्रभावित करता है, जिससे ग्लूकोमा और काले मोतिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। सामान्य तौर पर, आंखों का दबाव 10 से 21 मिमी एचजी (mmHg) के बीच रहता है, लेकिन तनाव के कारण यह बढ़ सकता है, जिससे आंखों में गंभीर समस्या हो सकती है।

    सावधानी और उपचार| Eyesight

    इसलिए, यदि आप स्टेरॉयड का उपयोग कर रहे हैं, तो आपको इसे सावधानीपूर्वक और डॉक्टर की सलाह से ही इस्तेमाल करना चाहिए। डॉक्टर की सलाह के बिना लंबे समय तक इसका उपयोग न करें, क्योंकि इससे आंखों की रोशनी पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही, मानसिक तनाव से बचने के लिए नियमित ध्यान और तनावमुक्त जीवन जीने का प्रयास करें। आंखों की सेहत को लेकर सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

    अगर आप भी स्टेरॉयड का उपयोग कर रहे हैं और इस संबंध में कोई चिंता है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और अपनी आंखों की जांच करवाएं। इस प्रकार, स्टेरॉयड का उपयोग करते समय अपनी सेहत के प्रति जागरूक रहना बेहद जरूरी है। इसका अधिक उपयोग आपकी आंखों के लिए घातक साबित हो सकता है, और आपको अनजाने में इसकी गंभीरता का सामना करना पड़ सकता है।