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    Gujarat: भावनगर हीरा उद्योग मंदी की चपेट में! 1,500 इकाइयाँ बंद, दिवाली के बाद भी नहीं लौटी रौनक

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    Gujarat: भावनगर हीरा उद्योग मंदी की चपेट में! 1,500 इकाइयाँ बंद, दिवाली के बाद भी नहीं लौटी रौनक

    Bhavnagar’s Diamond industry Grip: भावनगर। गुजरात के भावनगर ज़िले का हीरा उद्योग, जो वर्षों से आर्थिक सुस्ती और कमज़ोर बाज़ार स्थितियों से जूझ रहा है, दिवाली के बाद भी सुधार के कोई ठोस संकेत नहीं दिखा पा रहा है। क्षेत्र की लगभग 3,000 लघु एवं मध्यम इकाइयों में से करीब 500 इकाइयाँ पहले ही बंद हो चुकी हैं, जबकि शेष इकाइयों में से केवल लगभग 1,500 इकाइयों ने ही त्योहारों के बाद उत्पादन शुरू किया है। Gujarat News

    उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ते अंतरराष्ट्रीय टैरिफ़, घटती वैश्विक मांग और परिचालन लागत में भारी बढ़ोतरी ने इस क्षेत्र की स्थिति को और गंभीर बना दिया है। कभी जहाँ भावनगर में प्रतिदिन ₹150 करोड़ से लेकर ₹1,500 करोड़ तक का कारोबार होता था, वहीं वर्तमान में यह घटकर मात्र ₹20–25 करोड़ रह गया है। लगभग 80% पॉलिश किए हुए हीरे विदेशों में निर्यात किए जाते थे, लेकिन अमेरिका द्वारा लगाए गए 100% टैरिफ़ ने उद्योग की कमर तोड़ दी है। इसका सबसे बड़ा असर छोटे और मध्यम वर्ग की इकाइयों पर हुआ है, जो सीमित पूँजी में काम करती थीं।

    टैरिफ और बाज़ार सुस्ती का प्रभाव पहले से ही स्पष्ट था—लगभग 300 इकाइयाँ पहले बंद हुई थीं, और अब 200 और इकाइयाँ ताला बंद होने की कगार पर पहुँच गईं। हजारों कुशल कारीगरों को मजबूरी में वैकल्पिक रोजगार की तलाश करनी पड़ रही है। दिवाली के बाद सामान्यतः लाभ पंचम और अगियारस के शुभ अवसरों पर कारोबार में तेज़ी आती है, लेकिन इस वर्ष वह परंपरागत उछाल देखने को नहीं मिला। नवरात्रि के दौरान कुछ दिनों के लिए हल्की बढ़त जरूर महसूस हुई थी, परन्तु त्योहारों की छुट्टियों के कारण वह भी ठहर गई। Gujarat News

    सिंथेटिक हीरों का प्रचलन प्राकृतिक हीरों के बाजार में नई चुनौती बनकर उभर रहा

    इधर प्रयोगशाला में विकसित किए जा रहे सिंथेटिक हीरों (Lab-Grown Diamonds) का तेज़ी से बढ़ता प्रचलन प्राकृतिक हीरों के बाजार में नई चुनौती बनकर उभर रहा है। मात्र ₹20–25 की कीमत में उपलब्ध कृत्रिम हीरों ने प्राकृतिक हीरों की माँग को कम कर दिया है। सीवीडी (CVD) तकनीक से बने इन पत्थरों को बहुत कम प्रोसेसिंग की आवश्यकता होती है, जिसके चलते छंटाई और कार्यालय कार्य से जुड़े बड़ी संख्या में कर्मचारी बेरोजगार हो रहे हैं।

    वर्तमान में लगभग 1,500 इकाइयाँ अब भी बंद पड़ी हैं, निर्यात घट रहा है और कृत्रिम हीरों की हिस्सेदारी बढ़ती जा रही है। उद्योग से जुड़े लोग स्पष्ट तौर पर कह रहे हैं कि यदि सरकार द्वारा लक्षित निर्यात प्रोत्साहन, वित्तीय सहयोग और दीर्घकालिक पुनरुद्धार उपाय जल्द नहीं लागू किए गए, तो भावनगर का यह कभी चमकदार रहा उद्योग आने वाले महीनों में और अधिक संकट में घिर सकता है। Gujarat News