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    दिल्ली में बन रहा सबसे बड़ा एसटीपी : सत्येंद्र जैन

    Biggest STP sachkahoon

    सटीपी का काम दिसंबर 2022 तक पूरा होने की उम्मीद

    नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। केजरीवाल सरकार दिल्ली में देश का सबसे बड़ा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बना रही जो 110 एकड़ क्षेत्रफल में फैला होगा और प्रतिदिन 564 मिलियन लीटर (एमएलडी) की क्षमता से सीवेज को शोधित करेगा और इसे 2022 के अंत तक पूरा कर दिया जाएगा। दिल्ली के जल मंत्री सत्येंद्र जैन ने ओखला में बन रहे भारत के सबसे बड़े एसटीपी के निर्माण स्थल का शुक्रवार को दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि केजरीवाल सरकार भारत में सबसे बड़ा सिंगल एसटीपी का निर्माण कर रही है।

    इस एसटीपी की क्षमता 564 एमएलडी है। इसका मतलब है यह कि निर्माण के बाद यह एसटीपी 564 एमएलडी सीवेज को यमुना में बहने से रोकेगा। इसके साथ ही यह एसटीपी बायो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) और टोटल सस्पेंडेड सॉलिड (टीएसएस) को 10 मिलीग्राम प्रति लीटर करेगा जो कि शोधित (ट्रीट) किए गए पानी का मानदंड हैं। ट्रीट किए गए दूषित पानी का इस्तेमाल विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाएगा जिनमें बागवानी, झीलों का कायाकल्प, धुलाई, फ्लशिंग आदि शामिल है। दिल्ली सरकार अतिरिक्त संसाधनों का उपयोग करके कोविड-19 के कारण हुई देरी की भरपाई के लिए अपने पूर्ण समर्पण के साथ काम कर रही है। इस एसटीपी का काम दिसंबर 2022 तक पूरा होने की उम्मीद है।

    इस एसटीपी में 150 टन कीचड़ को सुखाने के लिए सोलर-ड्राइंग की व्यवस्था

    उन्होंने कहा कि एसटीपी में दक्षिण और मध्य दिल्ली के विभिन्न नालों और सीवरेज नेटवर्क से सीवेज प्राप्त होगा। अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए उन्नत प्रणालियों को इस एसटीपी के साथ एकीकृत किया जा रहा है। इस एसटीपी में 12 एकड़ में फैले लगभग 150 टन कीचड़ को सुखाने के लिए सोलर-ड्राइंग की व्यवस्था भी होगी। दूषित पानी से ठोस कणों को हटाने के लिए उन्नत सक्शन प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। इस एसटीपी के पूरा होने के बाद यमुना में बहने वाले दूषित पानी को रोका जा सकेगा।

    इसके अलावा, मौजूदा समय में ओखला एसटीपी परिसर में 72 एमएलडी और 136 एमएलडी के दो एसटीपी काम कर रहे हैं। इसके बाद, ओखला एसटीपी कॉम्प्लेक्स की कुल क्षमता 771 एमएलडी हो जाएगी। इनमें से 136 एमएलडी पानी बायो केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) और टोटल सस्पेंडेड सॉलिड (टीएसएस) 10 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम पहले ही किया जा चुका है।

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