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Wednesday, March 4, 2026
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    बिन सिर-पैर की दलीलों वाली रिपोर्ट

    Bin head-footed report

    जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की रिपोर्ट का एक ओर झूठ सामने आता है, जिसका कोई सिर-पैर ही नहीं। आयोग ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की पवित्र बीड़ के चोरी होने, अंगों को बिखेरना व पोस्टर लगाने संबंधी दलील दी है कि सन 2015 में बुर्ज जवाहर सिंह वाला में एक सिख प्रचारक के कार्यक्रम में कुछ डेरा प्रेमियों ने अपने गले से डेरा सच्चा सौदा के लॉकेट उतार कर डेरे से नाता तोड़ लिया था, जिससे भड़क कर डेरा श्रद्धालुओं ने श्री गुरु गं्रथ साहब की पवित्र बीड़ की बेअदबी की।

    एक नहीं ऐसे कई तथ्य हैं जो आयोग की यह दलील बेबुनियाद सिद्ध करते हैं। पहली बात तो यह है कि किसी भी सिख प्रचारक ने यह ऐलान कर कार्यक्रम नहीं रखा था कि वह डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालुओं को डेरे से तोड़ेगा। दूसरी बात किसी भी सिख प्रचारक ने दावा नहीं किया था कि उसने कुछ डेरा श्रद्धालुओं को डेरा सच्चा सौदा जाने से रोक दिया है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में उस प्रचारक का बयान दर्ज नहीं किया। आयोग ने यह बात डीआईजी रणबीर सिंह खटड़ा के नेतृत्व वाली एसआईटी की रिपोर्ट भी प्राप्त की है, जो पहले ही विवादों में घिरी हुई है। रणबीर सिंह खटड़ा मीडिया के सामने यह स्वीकार कर चुके हैं कि तलाशी दौरान डेरा प्रेमियों के घर से कुछ भी नहीं मिला। आयोग ने उक्त सिख प्रचारक तक पहुंचकर उसकी गवाही दर्ज नहीं की जबकि आयोग ने मामले की तह तक जाना होता है। खटड़ा की रिपोर्ट में भी यह लिखा है ‘एक सिख प्रचारक हरजिन्द्र सिंह मांझी ने दीवान लगाया, जिसमें उसने कथित तौर पर (कहा जाता है) लोगों को डेरा सच्चा सौदा न जाएं के बारे में कहा’’ आयोग के पास कोई जानकारी नहीं, बस रिपोर्ट में बार-बार लिखा है यह कहा जा रहा था, वह कहा जा रहा था। आयोग ने तब बिना प्रचारक को मिले ही सुनी-सुनाई अफवाहों को जोड़-तोड़कर अपनी रिपोर्ट का महल खड़ा कर दिया।

    अब यदि रणजीत सिंह आयोग के झूठ की बात करें यदि ये भी मान लिया जाए कि वहां 5-7 डेरा श्रद्धालुओं ने लॉकेट उतार दिए तो यह बात डेरा सच्चा सौदा के लिए कोई आफत नहीं थी, जिसके साढ़े छह करोड़ श्रद्धालु है। अकेले मालवा में डेरा सच्चा सौदा के लाखों श्रद्धालु है। लोगों की डेरा सच्चा सौदा में पूरी श्रद्धा है। पंजाब के अन्य जिलों की तरह जिला फरीदकोट के कई शहरों में सत्संगें हुई हैं, जिनमें 70-80 हजार व्यक्तियों ने नाम-शब्द लिया था। फिर 5-7 श्रद्धालुओं के बदल जाने से करोड़ों की संगत को क्या फर्क पड़ता था।
    दूसरी तरफ हर कोई यह जानता है कि डेरा सच्चा सौदा से नाम लेने वाला व्यक्ति सिख धर्म से टूट नहीं जाता या वह सिखों का दुश्मन नहीं बन जाता। डेरा सच्चा सौदा का नियम ही यही है कि नाम-शब्द लो और अपने-अपने धर्म में रहो, अपना पहनावा पहनो, बस नेकी करो। डेरा सच्चा सौदा के लाखों सिख श्रद्धालु डेरा की शिक्षा को भी मानते हैं और सिखों के पवित्र धार्मिक स्थानों पर भी जाते हैं। अधिकतर तो अपने बच्चों के विवाह-शादियों और अन्य दुख-सुख के काम भी पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब की हजूरी में पूरे करते हैं।

    आयोग ने बदलेखोरी वाली राजनीति के लक्ष्य अनुसार डेरा श्रद्धालुओं को भी बदलाखोर के तौर पर पेश कर दिया लेकिन आयोग ने यह नहीं देखा कि डेरा श्रद्धालु किस तरह अपने-अपने धर्म में व पहनावे में रहते हैं, इसका सबूत नामचर्चा व सत्संगों के मौके देखा जा सकता है, जहां हिंदू-सिख सब अपने-अपने सांस्कृतिक पहरावे में नजर आते हंै। अभी तक पंजाब में पुलिस प्रशासन या किसी धार्मिक संस्था के पास एक भी शिकायत नहीं आई कि डेरा सच्चा सौदा ने उसे अपने धर्म को मानने से रोका।

    डेरा श्रद्धालु अपनी-अपनी श्रद्धा के अनुसार गुरुद्वारा साहिबानों की सेवा में सहयोग करते हैं। जिस दिन समाचार पत्रों में बरगाड़ी में बेअदबी की खबरें प्रकाशित हुई थी। उसी दिन जिला पटियाला के एक गांव में डेरा सच्चा सौदा के सेवादारों द्वारा गुरुद्वारा साहिब के सरोवर की सफाई करने की तस्वीर भी छपी हुई थी। यह तस्वीर सच कहूँ के पास मौजूद है। आयोग ने अपने राजनीतिक स्वार्थों के अनुसार रिपोर्ट बनाने के लिए उन डेरा श्रद्धालुओं पर सिख विरोधी होने की तोहमत लगाई, जिन डेरा श्रद्धालुओं के नाम के पीछे भी सिख सभ्याचार अनुसार ‘सिंह’ शब्द लगता है, जिनका बचपन, जवानी का समय सिख धर्म की मर्यादा अनुसार बीता लेकिन आयोग ने अपने राजनीतिक मिशन को पूरा करना था। जस्टिस रणजीत सिंह ने डेरा सच्चा सौदा को समझने की बजाय डेरा विरोधियों व अफवाहों से अपनी कचरा रिपोर्ट तैयार कर ली।

    आयोग के लिए इतना ही काफी था कि वह फरीदकोट व अन्य जिलों में डेरा श्रद्धालुओं द्वारा जरूरतमन्दों के लिए किए गए भलाई कार्यों की तरफ भी देख लेता। डेरा श्रद्धालु कहीं भी बदले की भावना व असमाजिक कार्यों में शामिल नहीं हुए।
    सन् 2007 की बात करें तो डेरा सलाबतपुरा पर हमला करने के लिए कई गाड़ियों का काफिला डेरा सच्चा सौदा की तरफ बढ़ा, जिसे पुलिस प्रशासन ने रोका। सुनाम व मौड़ मंडी के नामचर्चा घर पर हमले हुए। हरियाणा के जिला सिरसा में गांव घुक्कियांवाली में शरारती तत्वों ने डेरा सच्चा सौदा की शाखा को आग के हवाले कर दिया। दर्जनों स्थान पर नामचर्चा घरों पर हमले हुए, जिनमें सैकड़ों हमलावरों के खिलाफ मामले दर्ज हुए। डेरा सच्चा सौदा ने कभी भी टकराव का रूख नहीं अपनाया। फिर भी आयोग ने डेरा श्रद्धालुओं की नम्रता, शराफत, समाज सेवा, भाईचारे व धार्मिक सदभावना को तुच्छ समझकर अपने राजनीतिक शासकों की विचारधारा के अनुसार पंजाब के भाईचारे की कुर्बानी देने की कोशिश की। जारी हैं…

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