उत्तर प्रदेश के जातीय समीकरण को साधने की कोशिश में भाजपा

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BJP will contest elections in all 117 seats of Punjab

नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 5 राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी प्रभारियों की सूची जारी कर दी जिसमें कई केंद्रीय मंत्रियों समेत भारी भरकम नेताओं के नाम शामिल हैं। इन पांच राज्यों में उत्तर प्रदेश राजनीतिक लिहाज से सबसे अहम है जहां भाजपा के सामने अपनी साख और प्रतिष्ठा बरकरार रखने की कड़ी चुनौती है। उत्तर प्रदेश में भाजपा ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को चुनाव प्रभार का दायित्व सौंपा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधान को हाल ही में हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में शिक्षा मंत्रालय जैसा अहम विभाग दिया। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण चुनावी राज्य में प्रधान को प्रभारी बनाया जाना साबित करता है कि सत्ता और संगठन दोनों में प्रधान की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

उत्तर प्रदेश में प्रधान को मिली जिम्मेदारी

भाजपा में मोदी के प्रभुत्व के बाद से ही उत्तर प्रदेश में प्रभारी का दायित्व पार्टी के दिग्गजों और मोदी के भरोसेमंद नेताओं के हाथ रहा है। इनमें सबसे पहले मौजूदा गृह मंत्री और तत्कालीन भाजपा महासचिव अमित शाह को 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रभारी की जिम्मेदारी दी गयी। उत्तर प्रदेश में भाजपा ने 2014 के लोक सभा चुनाव में अभूतपूर्व प्रदर्शन किया और उसी प्रदर्शन की बदौलत शाह की पदोन्नति हुई और उनकी ताजपोशी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर हो गई। इसके बाद मोदी के ही खास और उनके मुख्यमंत्री काल के समय लंबे समय तक गुजरात के प्रभारी रहे वरिष्ठ नेता ओम माथुर को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया।

इसके बाद उत्तर प्रदेश के 2017 के विधानसभा और 2019 के लोकसभा में भाजपा के वरिष्ठ नेता जगत प्रकाश नड्डा को चुनाव का प्रभार सौंपा गया और राज्य में पार्टी की शानदार जीत के बाद नड्डा की राह राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचने के लिए आसान हो गई। स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में प्रधान को मिली जिम्मेदारी भाजपा में उनकी बढ़ती अहमियत को दशार्ती है।

प्रधान की चुनौती उत्तर प्रदेश में पिछड़ों को अपने पाले में खींचने की

दरअसल प्रधान केंद्रीय मंत्रिमंडल में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का प्रमुख चेहरा है। ऐसे में भाजपा ने उनके नाम का एलान कर उत्तर प्रदेश में ओबीसी के बड़े वर्ग को साधने की कोशिश की है। माना जा रहा है कि प्रधान की भूमिका एक रणनीतिकार के रूप में केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश पार्टी संगठन के बीच एक कड़ी के रूप में काम करने की होगी। प्रधान इससे पहले बिहार, उत्तराखंड , छत्तीसगढ़ और कर्नाटक जैसे राज्यों के प्रभारी का दायित्व निभा चुके हैं जिनमें भाजपा ने कामयाबी हासिल की। इन राज्यों में उन्होंने ओबीसी के बड़े तबके को पार्टी से जोड़ने का काम किया था। अब प्रधान की चुनौती उत्तर प्रदेश में पिछड़ों को अपने पाले में खींचने की है।

ब्राह्मण वर्ग को लुभाने में जुटीं बीजेपी

उत्तर प्रदेश में मतदाताओं की कुल आबादी का 42 फीसदी से अधिक ह?िस्?सा ओबीसी का है। इस कारण प्रधान के नाम का एलान इसे उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के जवाब के रूप में भी देखा जा रहा है। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी इस बार चुनाव में ब्राह्मण वर्ग को लुभाने में जुटीं हैं, जो क?ि लंबे समय से भाजपा के पक्ष में मतदान कर रहे हैं। भाजपा ने उत्तर प्रदेश से तीन ओबीसी नेताओं- बीएल वर्मा , पंकज चौधरी और अनुप्रिया पटेल को जुलाई में केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया था, जिससे राज्य के ओबीसी वर्ग को व?िशेष संदेश देने की भी कोश?िश की गई थी।

6 सह प्रभारी और 6 संगठन प्रभारी भी नियुक्त

उत्तर प्रदेश के जातीय समीकरण को देखते हुए प्रधान के अलावा 6 सह प्रभारी और 6 संगठन प्रभारी भी नियुक्त किये हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर जहां क्षत्रिय समुदाय से हैं, वहीं अर्जुन राम मेघवाल दलित हैं। दूसरी ओर, राज्य सभा सांसद सरोज पांडे ब्राह्मण हैं जबकि केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे को कर्नाटक में वोक्कालिगा अगड़ी जाति का एक प्रमुख चेहरा माना जाता है। हरियाणा सरकार में पूर्व मंत्री कैप्टन अभिमन्यु जाट हैं, वहीं एक केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी यादव हैं । इसके अलावा अन्य सह प्रभारी राज्यसभा सांसद विवेक ठाकुर भूमिहार हैं।

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