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    रिहर्सल के लिए जर्मनी से खरीदा है 40 लाख रुपये का घोड़ा, हॉर्स राइडिंग में विश्व में आई है 84वीं रैंकिंग

    Horse Riding

    रविवार को दिल्ली में हुई प्रतियोगिता में जीता है सिल्वर मेडल

    • हॉर्स राइडिंग देखने की दिलचस्पी ने बना दिया प्रगति को हॉर्स राइडर

    गुरुग्राम(सच कहूँ/संजय कुमार मेहरा)। प्रगति जीवन में कुछ अलग करना चाहती थी। इस चाहत में उसे हॉर्स राइडिंग (Horse Riding) का शौक लगा। इस शौक को पूरा करने के लिए वह गुरुग्राम में ही एक हॉर्स राइडिंग अकादमी में गई। हॉर्स राइडिंग उसे इतनी भायी कि आज वह विश्व स्तर की चैंपियन बन चुकी है। हॉर्स राइडिंग की विश्व रैंकिंग में उसका 84वां स्थान है। जॉब छोड़कर अब प्रगति अपना पूरा फोकस हॉर्स राइडिंग में और अधिक महारत हासिल करने में जुटी है।

    प्रगति का सपना इस क्षेत्र में भारत को ओलम्पिक में गोल्ड मेडल दिलाना है। 24 साल की हॉर्स राइडर प्रगति तायल इस खेल को सब खेलों से अलग मानती है। इसमें व्यक्ति की अपनी दिमागी सूझ-बूझ को घोड़े के साथ तालमेल करना पड़ता है। या फिर घोड़े को अपने अनुसार ढालना होता है। यह बहुत कठिन होता है। इसके लिए देशी के साथ विदेशी स्टैंडर्ड से खेलना आना जरूरी है। उस लेवल की कोचिंग भी चाहिए। तीन महीने पहले वर्ल्ड रैंकिंग में 84वें स्थान पर रहीं प्रगति तायल ने हाल ही में दिल्ली के छत्तरपुर स्थित टार्क अकादमी में हुई चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता है।

    इससे पूर्व दिल्ली कैंट स्थित आर्मी पोलो एंड राइडिंग क्लब में गोल्ड मेडल जीता था। अपने जीवन का पहला हॉर्स राइडिंग शो प्रगति ने जनक राइडिंग स्कूल गुरुग्राम में किया था। उसमें उसे बेस्ट राइडर चुना गया। यहीं से उनके जीवन का टर्निंग प्वायंट भी शुरू हुआ। आत्मविश्वास इतना बढ़ा कि प्रगति ने इस क्षेत्र में प्रोफेशनल तरीके से काम करना शुरू किया। बेहतर प्रशिक्षण हासिल किया जा सके, इसके लिए प्रगति ने जर्मनी से 40 लाख रुपये खर्च करके घोड़ा भी मंगवाया।

    अगले महीने मेरठ में होगी इंटरनेशनल हॉर्स राइडिंग

    प्रगति कहती हैं कि हॉर्स राइडिंग में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ एक घोड़ा काफी नहीं है, बल्कि उसे तीन घोड़े और चाहिए। अगर एक घोड़ा चोटिल हो जाता है तो उसका आॅप्शन जरूरी है। पिछले दिनों उसके घोड़े के पांच में चोट लगी थी तो वह दो महीने तक अभ्यास नहीं कर पाई। प्रगति के अनुसार ओलम्पिक की तैयारी करने के लिए उसे बाहर जाना पड़ेगा। उसके लिए तीन-चार घोड़े चाहिए। अगले महीने मेरठ के मोदीपुरम में होने जा रही इंटरनेशनल हॉर्स राइडिंग की वह तैयारी कर रही है।

    2021 में नौकरी छोड़कर हॉर्स राइडिंग को अपनाया

    प्रगति ने वर्ष 2015 से 2021 तक कंपनी में नौकरी भी की, लेकिन जीवन में कुछ बड़ा करने की सोच से उसने नौकरी को त्यागकर हॉर्स राइडिंग पर पूरा फोकस किया। उनके बिजनेसमैन पिता सतीश तायल एवं गृहिणी मां ललिता तायल ने सदा उसे अपने सपने पूरे करने के लिए सहयोग किया है।

    यूएसए की जेसिक स्पिंगस्टिन को करती हैं फॉलो

    प्रगति हॉर्स राइडिंग में यूएसए की राइडर जेसिका स्प्रिंगस्टिन को फॉलो करती हैं। भारत में वह ट्रेनर तेजस धींगड़ा से हॉर्स राइडिंग के गुर सीख रही है। प्रगति का कहना है कि हॉर्स राइडिंग ऐसा खेल है, जिसमें महिला-पुरुष समान भाग लेते हैं। किसी के भी कोई छूट नहीं, बल्कि बराबर के नियम-कायदे हैं। इस खेल में उम्र की भी कोई सीमा नहीं है। इस बार के ओलंपिक में 50 साल की उम्र से भी ज्यादा के खिलाड़ियों ने भाग लिया है। प्रगति के मुताबिक हॉर्स राइडिंग में दिल्ली, गुरुग्राम, मुंबई चेन्नई, बंगलोर में ज्यादा क्रेज है। उनका कहना है कि क्रिकेट की तरह भारत में हॉर्स राइडिंग पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। भारत में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। महंगा खेल होने के कारण इसमें सभी हिम्मत नहीं कर पाते।

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