‘भाई! कौन कहता है बच्चे को काल ले गया?

Spirituality

5 अक्तूबर 1969

गांव कोट बख्तू (बठिंडा) में पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने सत्संग फरमाया। उस समय प्यारे सतगुरू जी रात के सत्संग के समय 11-12 बजे ही स्टेज पर आया करते थे। इस सत्संग से कुछ दिन पहले गांव त्योणा पूजारियां में 10-11 साल के एक बच्चे की किसी हादसे में मौत हो गई थी। उस बच्चे ने पूजनीय परम पिता जी से नाम शब्द की अनमोल दात प्राप्त की हुई थी। मनमुखों के बहकावे में आकर उस परिवार को यह भ्रम हो गया था कि वह लड़का समय आने से पहले की मर गया है व उसे काल ले गया है।

वह परिवार हाकम सिंह निवासी संगत खुर्द को लेकर गांव बख्तू के सत्संग में पहुंचा। रात को सत्संग सुना। सत्संग बहुत ही प्रभावशाली था। सुबह पूजनीय परम पिता जी ने नाम अभिलाषी जीवों को नाम शब्द की अनमोल दात प्रदान की। सुबह विश्राम वाले घर में उस लड़के की मौत के संबंध में हाकम सिंह व उस लड़के का परिवार परम पिता जी से मिला व बच्चे संबंधी पूरी घटना बताई। इस पर परम पिता जी ने फरमाया, ‘‘भाई! कौन कहता है कि उस बच्चे को काल ले गया? यह शरीर तो काल का है।

इसमें जो आत्मा है, उसका संबंध मालिक सतगुरू के साथ है। उस बच्चे की आत्मा को सतगुरू राई भर भी तकलीफ नहीं आने देंगे। बचपन व जवानी की भक्ति को मालिक पहले दर्जे की स्वीकार करता है। वह बच्चा तो उच्च श्रेणी की भक्ति कमाकर गया है, आप उसकी चिंता न करो। भाई वह तो अपने सच्चे घर, सचखंड में जा विराजा है।’’ इस तरह परम पिता जी ने उस परिवार का भ्रम दूर किया।

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