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    गिल के निधन से मैने अपना दोस्त खोया: कैप्टन

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    मेरी नजरों में मसीहा थे केपीएस गिल: डीजीपी

    • पूर्व डीजीपी को अंतिम अरदास में अमरेन्द्र सिंह ने दी श्रद्धांजलि
    • अमन-शांति के लिए दिए योगदान को याद किया

    चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रदेशवासियों को अमन-शांति व तरक्की के लिए कार्य करने का आह्वान करते हुए पूर्व डीजीपी केपीएस गिल के गुणों की सराहना की। उन्होंने कहा कि खुशहाल और शांतमई पंजाब की स्थापना ही इस महान व्यक्ति को एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी। एक कुशल अधिकारी के तौर पर गिल के योगदान को याद करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व डीजीपी के निधन से उन्होंने निजी तौर पर अपना एक दोस्त खो दिया है।

    शांति बहाल करने में अहम योगदान

    गिल जोकि 82 वर्ष की आयु में 26 मई को चल बसे, की अंतिम अरदास के अवसर पर मुख्यमंत्री ने बिछुड़ी आत्मा और उन लोगों के लिये प्रार्थना की जिन्होंने पंजाब की शांति के लिये अपनी जानें कुर्बान कर दी। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि देश ने एक महान व्यक्तित्व को खो दिया है जिन्होंने पंजाब और देश में अमन शांति कायम करने के लिये अपना योगदान डाला जिस स्वरूप आंतकवाद वातावरण में तरक्की एवं विकास हो सका है।

    आतंकवाद से डलकर लड़े गिल

    पंजाब में आंतकवाद से लड़ाई में गिल के योगदान को स्मरण करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि उस काले दौर के दौरान 35000 से अधिक लोग मारे गये थे और जिन लोगों ने वह काला दौर नही झेला, वह गिल के योगदान को कभी भी समझ नहीं सकते। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि जब गिल ने पंजाब पुलिस का चार्ज संभाला था तो उस समय पंजाब पुलिस का मनोबल काफी कमजोर था जो आंतकवादियों के खौफ के कारण सूर्य छिपने के बाद पुलिस थानों के गेट बंद कर लेती थी। उन्होंने कहा कि पंजाब को उस समय मजबूत नेतृत्व की जरूरत थी जिस पर गिल खरे उतरे।

    डीजीपी ने दी श्रद्धांजलि

    डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने कहा कि आंतकवाद के दिनों के दौरान जिस प्रकार गिल ने पुलिस फोर्स का नेतृत्व किया। इसने उनको मेरी नजरों में मसीहा बना दिया। उन्होंने श्री गिल से पहले मुलाकात को याद करते हुये कहा कि वह स्वयं उस समय ए एस पी थे जबकि श्री गिल आई जी थे। श्री अरोड़ा ने कहा कि जिस मजबूती से गिल पंजाब पुलिस से जुड़े हुए थे वह कभी भी पूरी तरह सेवानिवृत नहीं हुए। डीजीपी ने कहा कि मैं उनकी सेवा निवृति के बाद भी उनके साथ आम तौर पर सलाहमशवरा करता रहता था। श्री अरोड़ा ने कहा कि पंजाब में अमन-शांति और सुख शांति को कायम करके श्री गिल की उम्मीदों को सदा जीवित रखना ही उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

     

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