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    बड़ा सवाल ….? क्या प्रदुषण के लिए सिर्फ किसान ही जिम्मेदार

    Kaithal News
    Kaithal News: कैथल बस स्टैंड पर कूड़े में लगाई गई आग से उठ रहा धुआं, पराली जलाता हुआ किसान, फैक्ट्रियों से निकलता हुआ धुआं, फैक्ट्रियों से निकलता हुआ धुआं, पराली जलाता हुआ किसान

    पिछले सालो में कम हुए पराली जलाने के केस फिर भी प्रदुषण बढ़ा

    • प्रदुषण के लिए सिर्फ किसानो को जिम्मेदार ठहराना गलत: कृषि मंत्री

    कैथल (सच कहूं/कुलदीप नैन)। Kaithal News: सितम्बर में जैसे ही धान की कटाई शुरू होती है, वैसे ही अक्टूबर आते-आते हरियाणा और खासकर दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण का स्तर भी चर्चा का विषय बन जाता है। धान की कटाई के बाद कई किसान पराली जलाने का काम करते हैं तो फिर प्रदूषण का ठीकरा भी किसानों पर फूट जाता है। जिसके बाद इस मुद्दे पर लगातार किसानो को घेरा जाता हैं। हरियाणा में पराली जलाने को लेकर अब किसानों पर एफआईआर दर्ज हो रही है। किसानो की गिरफ्तारी तक हो रही है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या वाकई इस प्रदुषण के लिए 100 प्रतिशत किसान जिम्मेदार है? क्या अन्य कोई दूसरा कारण नहीं है जिससे प्रदुषण बढ़ता हो? तो बहुत से ऐसे कारण है जो किसान के साथ साथ या यु कहे उससे भी ज्यादा इस प्रदुषण को बढ़ाने में बराबर के हिस्सेदार है फिर प्रदुषण के लिए सिर्फ किसान को दोषी ठहराना कितना उचित है? शायद इस पर विचार करना कोई नहीं चाहता। Kaithal News

    हर किसी के मन में ये फिट बैठा दिया गया है कि किसान पराली जलाता है और इससे प्रदुषण बढ़ता है। कुछ साल पहले पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की रिपोर्ट बके मुताबिक प्रदूषण में पराली का औसत योगदान महज 20 से 30 प्रतिशत तक ही है। ऐसे में सवाल ये उठता है कि फिर प्रदूषण के लिए 70 फीसदी जिम्मेदार कौन है और क्या उन पर भी इसी तरह का कड़ा एक्शन लिया गया है या लिया जाएगा? दरअसल, अंधाधुंध कंस्ट्रक्शन, सड़कों की धूल, इंडस्ट्री , बड़ी बड़ी चिमनिया और एसयूवी कारों के अलावा बढ़ रहे प्रदूषण का एक बड़ा कारण लगातार कम होता वन क्षेत्र भी है. लेकिन कुछ पर्यावरणविदों ने प्रदूषण के लिए सिर्फ किसान को ही खलनायक बना दिया है। हालाँकि इस बात से बिल्कुल भी इंकार नहीं किया जा सकता कि पराली जलाने से प्रदुषण नहीं होता लेकिन एक सच्चाई ये भी है इसके साथ अन्य बहुत से संसाधन भी जिम्मेदार है। Kaithal News

    हरियाणा में 5 साल कम हुए पराली जलाने के केस | Kaithal News

    सरकारे प्रदुषण (Pollution) रोकने के लिए फसल अवशेष प्रबन्धन के लिए नई नई मशीने लेकर आ रही है जोकि अनुदान राशि पर दी जाती है। वहीं फसल अवशेष प्रबन्धन को लेकर लगातार जागरूकता कैंप भी लगाये जाते है जिसके परिणामस्वरूप पराली जलाने के मामलो में कमी देखि जा रही है। अगर पिछले पांच साल के आंकड़ो की बात कि जाये तो पराली जलाने के मामलो में बड़ी गिरावट आई है बावजूद इसके प्रदुषण का स्तर हर साल बढ़ता जा रहा है। इससे साफ जाहिर है कि प्रदुषण के लिए सिर्फ किसान की पराली जिम्मेदार नहीं है। प्रदुषण के अन्य कारणों में ट्रांसपोर्ट, इंडस्ट्री और धूल से प्रदूषण कायम रहा है , जिस और बहुत कम ध्यान दिया जाता है। बस हमने अपनी गलतियों का ठीकरा दूसरों पर फोड़ना अच्छी तरह से सीख लिया है। Kaithal News

    प्रदुषण के लिए सिर्फ किसान जिम्मेदार नहीं : कृषि मंत्री

    हरियाणा सरकार के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा कहते हैं कि पराली जलाने के मामले में हरियाणा में अभी तक तीन हजार के करीब एफआईआर हुई है. हरियाणा में 6 हजार गांव है तो ऐसे में दो गांव में एक मामला है, लेकिन प्रचार ऐसा हो गया कि सारा प्रदूषण किसान कर रहा है. दिल्ली में सिर्फ किसानों की वजह से प्रदूषण नहीं है, दिल्ली की आबादी ही इसके लिए जिम्मेदार है. जहां लोग ज्यादा होंगे, वहां प्रदूषण भी ज्यादा होगा. एयरपोर्ट और प्लेन से भी प्रदूषण होता है. कंस्ट्रक्शन के काम से भी होता है। 28 गंदे नाले दिल्ली के यमुना में मिलते हैं, इनसे भी प्रदूषण होता है। फिर भी हरियाणा सरकार हर तरह से प्रदुषण रोकने के लिए प्रयास कर रही है।

    कूड़े में जब आग लगाई जाती है तब क्यों नहीं लोकेशन उठती: किसान

    सरकारे और प्रशासन सैटेलाइट की सहायता से धान अवशेषों में लगी आग की लोकेशन उठाकर किसानो पर जुर्माना लगाते है। किसानो का कहना है कि सेटेलाइट में केवल किसानों के धान अवशेषों में लगी आग ही नजर आती है। वहीं जब किसान की 6 महिने की मेहनत से तैयार हुई फसल पककर तैयार होती है और उसमे आग लगती है तो किसी को नहीं दिखता| किसानो का कहना है कि बड़े बड़े शहरो रोजाना पता नहीं कितने हजारो क्विंटल कूड़ा कर्कट जलाया जाता यह न तो सैटेलाइट में आता है तथा शायद न ही इससे वायु प्रदूषण होता है। कुछ ऐसा ही कैथल में देखने में पाया जा रहा है।

    इस ओर किसी का ध्यान नहीं | Kaithal News

    पिछले दिनों कैथल के बस स्टैंड के मुख्य द्वार के निकट पड़े कबाड़ को उठाने की बजाय उसे आग के हवाले कर दिया गया। यह आग करीब 2 घंटे तक सुलगती रही, लेकिन किसी भी अधिकारी या कर्मचारी ने इसे रोकने का प्रयास नहीं किया | बस स्टैंड पर आने वाले यात्रियों के लिए इस धुए में से निकलकर आना बहुत मुश्किल था। ये नजारा सिर्फ कैथल बस स्टैंड का नहीं है | हर छोटे बड़े शहर में बहुत सी जगहों पर इसी तरह कूड़े में आग लगाई जाती है।

    लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा भी सरेआम प्रदूषण करते देखा जा सकता है। संबंधित विभाग के कर्मचारी नवनिर्माणाधीन सड़क निर्माण व मुरम्मत के समय सरेआम तारकोल व अन्य पदार्थों की सहायता से बजरी का मिक्सर तैयार करते हैं। क्या इससे वायु प्रदूषण नहीं होता? पिछले सप्ताह नगर के नागरिक अस्पताल के सामने मुरम्मत हो रही सड़क के समय तारकोल के कई ड्रमों को आग के हवाले कर बजरी तैयार की गई। Kaithal News

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