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    मेंड-इन-इंडिया टीके से सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम संभव: डॉ पुरोहित

    जालंधर (सच कहूँ न्यूज)। सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला चौथा सबसे आम कैंसर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के अनुसार, 2018 में दुनिया भर में अनुमानित 570 000 महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का पता चला था और लगभग 3.11 लाख महिलाओं की इससे मृत्यु हो गई थी। भारत में भी इसके रोगी काफी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार भारत में हर साल 122,844 महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का पता चलता है, वहीं 67 हजार से अधिक महिलाओं की इस बीमारी से मौत हो जाती है।अब सीरम इंस्टीट्यूट आॅफ इंडिया (एसआईआई) और डिपार्टमेंट आॅफ बायोटेक्नोलॉजी (डीबीटी) ने पहले स्वदेशी रूप से विकसित क्वाड्रिवेलेंट ह्यूमन पैपिलोमावायरस वैक्सीन (क्यूएचपीवी) को लॉन्च किया है। यह टीका महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की बढ़ती समस्या की रोकथाम की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।

    मोहाली स्थित मदर – चाइल्ड हेल्थ केयर सेंटर द्वारा शुक्रवार को आयोजित सर्वाइकल कैंसर के विरुद्ध जंग विषय पर आयोजित वेबीनार को सम्बोधित करने के पश्चात , राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के सलाहकार डॉ नरेश पुरोहित ने यूनीवार्ता को बताया कि लगभग 90 प्रतिशत सर्वाइकल कैंसर के मामले ह्यूमन पेपिलोमा वायरस (एचपीवी) के कारण होते हैं। परीक्षण में इस स्वदेशी टीके को इस वायरस के खिलाफ काफी असरदार पाया गया है। अगर इस टीके को युवाओं को दिया जाए तो इससे अगले 30 साल तक उन्हें इस गंभीर प्रकार के कैंसर के जोखिम से बचाया जा सकता है। गर्भाशय कैंसर के बचाव हेतु यह वैक्सीन 200 से 400 रुपए मे मिलेगी। उन्होने कहा कि यह वैक्सीन हर साल लगभग लाखों महिलाओं की इस कैंसर से होने वाली मौत के जोखिम को कम करने में मदद कर सकेगी।

    कैंसर के खतरे को भी कम करने में लाभकारी हो सकती है

    डॉ. पुरोहित ने बताया कि इससे पहले सर्वाइकल कैंसर के लिए अब तक यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा अनुमोदित ‘गार्डासिल 9’ नामक एचपीवी वैक्सीन दी जा रही थी। अध्ययनों में पाया गया है कि यह वैक्सीन योनि और वुल्वर कैंसर के खतरे को भी कम करने में लाभकारी हो सकती है। कई गंभीर रोगो के शोधार्थी और महामारी रोग विशेषज्ञ डॉ.पुरोहित ने कहा,ह्लउम्मीद है अब हमारे पास स्वदेशी टीके उपलब्ध होंने से इसे 9-14 साल की लड़कियों के लिए राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के रूप में उपलब्ध करके उन्हें भविष्य मे सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित करने में मदद मिल सकेगी।

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