चेन्नई। चेन्नई महानगर जल आपूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड (मेट्रो वाटर) ने शहर की भूमिगत जलापूर्ति और सीवर व्यवस्था की निगरानी के लिए उन्नत रोबोटिक तकनीक लागू करने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य सड़कों की बार-बार खुदाई से होने वाली असुविधा को कम करना और पाइपलाइनों की आंतरिक स्थिति का सटीक आकलन करना है। Chennai News
नई व्यवस्था के अंतर्गत सक्रिय पाइपलाइनों के भीतर विशेष रोबोटिक क्रॉलर कैमरे उतारे जाएंगे, जो अंदरूनी संरचना का विस्तृत निरीक्षण करेंगे। इन उपकरणों की सहायता से रिसाव, संरचनात्मक दरारें, गाद जमाव, अवरोध तथा जोड़ों में आई खराबी जैसी समस्याओं की पहचान बिना सड़क खोदे की जा सकेगी। सामान्यतः इस प्रकार की खामियों का सतही निरीक्षण से पता लगाना कठिन होता है।
योजना के अनुसार विभिन्न आकार की पाइपलाइनों के लिए अलग-अलग रोबोटिक प्रणालियाँ तैनात की जाएंगी। लगभग 50 मिलीमीटर व्यास की छोटी लाइनों से लेकर 250 मिलीमीटर की मध्यम पाइपलाइनें तथा 1,000 मिलीमीटर या उससे अधिक व्यास वाली मुख्य जल एवं सीवर लाइनों का परीक्षण किया जाएगा। Chennai News
शहर के सभी 15 प्रशासनिक जोनों में चयनित खंडों का चरणबद्ध निरीक्षण होगा। रोबोटिक इकाइयाँ उच्च-गुणवत्ता कैमरों और लेज़र प्रोफाइलिंग यंत्रों से युक्त होंगी, जो निरंतर वीडियो रिकॉर्डिंग, छायाचित्रण तथा पाइपलाइन की आंतरिक स्थिति का डिजिटल मानचित्र तैयार करेंगी। निरीक्षण एजेंसियों को विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा, जिससे मरम्मत और प्रतिस्थापन कार्यों की योजना प्रभावी ढंग से बनाई जा सके।
मेट्रो वाटर के कार्यकारी निदेशक ने कहा कि शहर के अनेक पाइपलाइन खंड लगभग चार दशक पुराने हैं और समय के साथ आंतरिक क्षरण की समस्या बढ़ रही है। इसलिए ऐसी तकनीक आवश्यक है, जो बिना व्यवधान के वास्तविक स्थिति का आकलन कर सके।
यह निर्णय वर्ष 2023 में संचालित एक पायलट परियोजना की सफलता के बाद लिया गया है, जिसमें लगभग ढाई किलोमीटर पाइपलाइनों का परीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर क्षति चिन्हित हुई, जिसके आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए गए।
अब बोर्ड ने दो वर्षों के लिए व्यवस्थित रोबोटिक निरीक्षण हेतु निविदा जारी की है। चयनित एजेंसी को बैकअप प्रणाली उपलब्ध रखना और नियमित प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करना होगा। प्रतिदिन अधिकतम दस घंटे तक निरीक्षण कार्य किया जाएगा तथा भुगतान निरीक्षण की गई लंबाई के आधार पर निर्धारित होगा। प्राधिकरण को विश्वास है कि तकनीक-आधारित यह पहल न केवल दोषों की शीघ्र पहचान में सहायक सिद्ध होगी, बल्कि शहरी यातायात में व्यवधान घटाकर चेन्नई की जल एवं सीवर अधोसंरचना की विश्वसनीयता भी बढ़ाएगी। Chennai News















