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    यूपी में हरियाणा के सीएम सैनी… और फिर कर दिया बड़ा ऐलान, जानकर आप भी हो जाओगे हैरान

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    Muzaffarnagar यूपी में हरियाणा के सीएम सैनी... और फिर कर दिया बड़ा ऐलान, जानकर आप भी हो जाओगे हैरान

    मुज्जफरनगर, अनु सैनी । उत्तर भारत की ऐतिहासिक व पौराणिक तपोभूमि शुक्रताल में भारतवर्ष के महान शिक्षा ऋषि व युगदृष्टा स्वामी कल्याण देव जी महाराज की 21वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धा एवं भक्ति का अनुपम संगम देखने को मिला। हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी मुख्य अतिथि के रूप में श्री शुकदेव आश्रम पहुंचे और उन्होंने स्वामी जी को श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा के पूर्व डीजीपी केपी सिंह ने की, जबकि मंच पर अनेक संत, समाजसेवी, पत्रकार और किसान नेता उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने स्वामी जी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा:-

    * “स्वामी कल्याण देव जी केवल एक संत नहीं, बल्कि स्वयं में एक संस्था थे। उन्होंने शिक्षा, सेवा और सत्य का जो दीप जलाया, उसकी रोशनी आज भी समाज का मार्ग प्रशस्त कर रही है।”* मुख्यमंत्री सैनी ने इस अवसर पर ₹11 लाख रुपये सहयोग राशि देने की घोषणा भी की। साथ ही योगी सरकार की कानून-व्यवस्था व 2017 के बाद से आई सकारात्मक बदलावों की सराहना की।

    स्वामी कल्याण देव जी का जीवन परिचय – एक तपस्वी, एक कर्मयोगी

    स्वामी जी का जन्म 21 जून 1876 को बागपत जनपद के कोताना गांव में हुआ था और उनका पालन-पोषण मुंडभर, मुज़फ्फरनगर में हुआ। उन्होंने 1900 में मुनि की रेती, ऋषिकेश में स्वामी पूर्णानंद जी महाराज से संन्यास की दीक्षा ली।
    अपने 129 वर्षों के जीवनकाल में उन्होंने करीब 100 वर्ष जनसेवा में समर्पित किए। उन्होंने 350 से अधिक शिक्षण संस्थाओं, कृषि विज्ञान केन्द्रों, गऊशालाओं, चिकित्सालयों, और वृद्धाश्रमों की स्थापना कर समाज को शिक्षित और सशक्त किया।
    उनका मानना था –
    “ईश्वर महलों में नहीं, गरीबों की सेवा में बसता है।”
    स्वामी जी कभी भी मनुष्य द्वारा खींची जाने वाली रिक्शा पर नहीं बैठे। वे इसे अमानवीय मानते थे। उनका हर कार्य समाज के उत्थान और सेवा को समर्पित था।
    सम्मान और पुरस्कार
    स्वामी जी को देशभर में अनेक सम्मानों से नवाजा गया:
    1982: पद्मश्री (राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी)
    1994: नैतिक पुरस्कार (गुलजारीलाल नंदा फाउंडेशन)
    2000: पद्मभूषण (राष्ट्रपति के आर नारायणन)
    2002: डी-लिट उपाधि (चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ)
    श्रद्धांजलि सभा के मुख्य संदेश और मांग
    कार्यक्रम में राष्ट्रीय किसान नेता नरेश टिकैत ने सभी पत्रकारों और अतिथियों का आभार व्यक्त किया, जबकि राजेश्वर त्यागी ने सरकार से मांग की कि स्वामी कल्याण देव जी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाए।
    वक्ताओं ने कहा कि
    “स्वामी जी केवल प्रवचनकर्ता नहीं थे, बल्कि स्वयं अपने जीवन को आदर्श बनाकर प्रस्तुत करते थे।”
    “उन्होंने भागवत कथा को माध्यम बनाकर समाज को जागरूक किया और शिक्षा को जनक्रांति का रूप दिया।”
    युगों-युगों तक अमर रहेंगे स्वामी जी के विचार
    आज भी स्वामी जी की मूर्तियाँ अनेक स्थानों पर स्थापित हैं और उनके द्वारा स्थापित संस्थान समाज सेवा में लगे हुए हैं।
    स्वामी कल्याण देव जी की पुण्यतिथि पर हजारों श्रद्धालुओं ने पुष्पांजलि अर्पित की और उनके सिद्धांतों को अपनाने का संकल्प लिया।
    श्रद्धांजलि के शब्दों में समर्पण:-
    *”ऐसे महामानव कभी-कभी ही इस धरती पर जन्म लेते हैं,
    जो युगों तक अमर हो जाते हैं।
    भारत भूमि को उन पर गर्व है।
    दिव्य आत्मा को शत-शत नमन!”*