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    बेअदबी मामला: पांच डेरा श्रद्धालुओं को मिली जमानत

    Kairana News
    सांकेतिक फोटो

    पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की चोरी के पुलिस के पास नहीं कोई सबूत: एडवोकेट मोंगा

    फरीदकोट (सच कहूँ न्यूज)। पवित्र श्री गुरु गं्रथ साहिब जी की बेअदबी के मामले (Coarseness Case) में पंजाब पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) द्वारा गिरफ्तार किए गए पांच डेरा श्रद्धालुओं की जमानत सोमवार को फरीदकोट की माननीय अदालत ने मंजूर कर ली। बचाव पक्ष द्वारा एडवोकेट विनोद कुमार मोंगा व एडवोकेट विवेक गुलबधर पेश हुए। सुनवाई के बाद पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए एडवोकेट मोंगा ने बताया कि सुनवाई दौरान उन्होंने माननीय अदालत में यह दलील पेश की कि बेअदबी मामले की जांच सीबीआई भी कर रही है, इसीलिए एसआईटी की जांच पूरी तरह गैर-कानूनी है व यह मामला अदालत में विचारधीन है।

    डेरा श्रद्धालुओं को निर्दोष करार दे चुकी है सीबीआई | Coarseness Case

    उन्होंने कहा कि एसआईटी ने आरोपियों के खिलाफ श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की चोरी का आरोप लगाया है लेकिन इसे साबित करने के लिए पुलिस के पास कोई तथ्य नहीं हैं। इसीलिए डेरा श्रद्धालुओं का इन मामलों से कोई संबंध नहीं है। डेरा श्रद्धालु निर्दोष हैं व उन्हें बिना वजह फंसाया जा रहा है। एडवोकेट मोंगा ने यह भी बताया कि सीबीआई पहले भी इस मामले में बारीकी से जांच कर डेरा श्रद्धालुओं को निर्दोष करार दे चुकी है।

    सीबीआई ने पोलीग्राफ टैस्ट, फिंगर प्रिंट, नार्को टैस्ट और हैंड राईटिंग के सैंपल आदि भी लिए थे, जिनमें डेरा श्रद्धालुओं के खिलाफ कुछ भी नहीं मिला था। मोंगा ने बताया कि सीबीआई मामले की गहराई से जांच कर 1200 पन्नों की क्लोजर रिपोर्ट मोहाली अदालत में पेश कर चुकी है लेकिन अचानक रणबीर सिंह खटड़ा के नेतृत्व में गठित एसआईटी ने 2 जुलाई को फरीदकोट अदालत को बताया कि उन्होंने बेअदबी मामले की जांच शुरू कर दी है।

    एसआईटी ने चार दिन में जांच मुकम्मल कर 6 जुलाई को चालान भी पेश कर दिया। मोंगा ने एसआईटी की कार्रवाई पर सवाल करते हुए कहा कि जो जांच 5 वर्षों में 5 एजेंसियों द्वारा की गई, उसे एसआईटी ने रद्द करते हुए नामजद व्यक्तियों के खिलाफ मात्र चार दिन में चालान भी पेश कर दिया जो दर्शाता है कि यह सारी कार्रवाई पूरी तरह राजनीति से प्रेरित व गैर-कानूनी है। गौरतलब है कि एसआईटी ने चार जुलाई को सात डेरा श्रद्धालुओं को गिरफ्तार किया था। दो लोगों को उसी दिन ही अदालत ने गैर-कानूनी बताकर रिहा कर दिया था।

     

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