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    Commercialisation of Education: शिक्षा का व्यवसायीकरण चिंताजनक

    Commercialisation of Education: आज के समय में शिक्षा का व्यवसायीकरण एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है, जिसमें कोचिंग सेंटरों का फैलता जाल विशेष रूप से ध्यान आकर्षित करता है। शिक्षा प्रणाली में बदलाव और प्रतिस्पर्धा के बढ़ते स्तर के चलते कोचिंग सेंटरों की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। विद्यार्थी और उनके अभिभावक यह मानने लगे हैं कि बिना कोचिंग के सफलता प्राप्त करना लगभग असंभव हो गया है। Commercialisation of Education

    भले ही यह वह किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी हो, स्कूल या कॉलेज की पढ़ाई हो, या फिर किसी विशेष करियर की ओर अग्रसर होने का मार्ग, कोचिंग सेंटर अब एक अपरिहार्य हिस्सा बन गए हैं। इन सेंटरों का मुख्य उद्देश्य छात्रों को कठिन परीक्षाओं में सफलता दिलाना होता है, लेकिन यह प्रक्रिया कई बार शिक्षा के मूलभूत सिद्धांतों से दूर जाती दिखती है।

    आज यह शिक्षा का एक बड़ा व्यवसाय बन गया

    कोचिंग सेंटर न केवल शहरों में बल्कि छोटे कस्बों और गांवों तक भी फैल चुके हैं, जिससे यह शिक्षा का एक बड़ा व्यवसाय बन गया है। हालांकि, इन संस्थानों में कई बार अत्यधिक शुल्क वसूला जाता है, जिससे शिक्षा गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों के लिए कठिन हो जाती है। इसके अतिरिक्त, इन सेंटरों में शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करने तक सीमित हो जाता है, जिससे विद्यार्थियों की समग्र बौद्धिक और सृजनात्मक क्षमता का विकास रुक जाता है।

    यहां शिक्षक विद्यार्थियों को विषयवस्तु का गहन ज्ञान देने के बजाय उन्हें केवल परीक्षा की दृष्टि से तैयार करते हैं, जिससे उनके वास्तविक शिक्षा के अनुभव का अभाव होता है। इसके बावजूद, कोचिंग सेंटरों का आकर्षण कम नहीं हो रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि हमारे समाज में शिक्षा का मापदंड परीक्षा परिणामों से लगाया जाता है। अच्छे अंकों और प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश पाने के लिए छात्रों पर अत्यधिक दबाव होता है और यही दबाव उन्हें कोचिंग सेंटरों की ओर धकेलता है।

    बिना कोचिंग के सफल होना असंभव है

    कोचिंग सेंटर अपनी अत्यधिक सफलता दर के विज्ञापनों के माध्यम से छात्रों और अभिभावकों का ध्यान आकर्षित करते हैं, और उन्हें यह विश्वास दिलाते हैं कि बिना कोचिंग के सफल होना असंभव है। कई बार ये संस्थान छात्रों की असफलताओं को उनके व्यक्तिगत प्रयासों की कमी के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि यह प्रणाली स्वयं में त्रुटिपूर्ण है। Commercialisation of Education

    शिक्षा को व्यवसाय बना देने वाली यह प्रणाली छात्रों की मानसिक और भावनात्मक स्थिति पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है। कोचिंग सेंटरों में प्रतियोगिता का अत्यधिक दबाव, समय की कमी, और अत्यधिक पाठ्यक्रम से छात्रों में तनाव, चिंता, और अवसाद जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। इसके बावजूद, हमारे समाज में कोचिंग सेंटरों का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है, और यह शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनते जा रहे हैं। Coaching Centres

    इसके साथ ही, यह शिक्षा के मूल सिद्धांतों और नैतिकताओं से पीछे हटने का संकेत भी है, जहां शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना और प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ना बन गया है। इसका परिणाम यह है कि विद्यार्थी केवल रटंत और परीक्षा-आधारित शिक्षा तक सीमित रह गए हैं, और उनकी सृजनात्मक, बौद्धिक और नैतिक क्षमताओं का समुचित विकास नहीं हो पा रहा है। यह स्थिति शिक्षा प्रणाली के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है, जिसे दूर करने के लिए शिक्षा के मूलभूत उद्देश्यों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। Commercialisation of Education

    (यह लेखक के अपने विचार हैं)

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