आर्थिकी को मजबूत करने में त्योहारों का योगदान

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सतीश सिंह कोरोना के बाद दुर्गा पूजा के लिए धन का सबसे प्रमुख स्रोत प्रायोजन है। बैंकों से लेकर रोजमर्रा के इस्तेमाल में कारोबार करने वाली कंपनियां, उपभोक्ता सामान से जुड़ी कंपनियाँ ने इस वर्ष दुर्गा पूजा को प्रायोजित किया है। नामचीन पूजा पंडाल, पंडाल के द्वार, खंभे, बैनर और स्टॉल प्रायोजन के लिए मुहैया करवाते हैं। विज्ञापन से भी दुर्गा पूजा के लिए पैसे आते हैं।

भारत उत्सवधर्मियों का देश है। यहाँ त्योहारों को उत्सव की तरह मनाने का चलन है। त्योहार लोगों के जीवन में उल्लास का रंग भर देते हैं साथ ही साथ देश की आर्थिकी को भी मजबूत करने का काम करते हैं। ये रोजगार सृजन के भी स्रोत हैं। त्योहारों से स्थायी रोजगार सृजित नहीं होते हैं, लेकिन स्थानीय कामगारों, कलाकारों और शिल्पकारों को अस्थायी तौर पर कुछ दिनों या कुछ महीनों के लिए जरूर रोजगार मिल जाता है। इससे निजी अंतिम उपभोग में इजाफा होता है, जिससे मांग और आपूर्ति में बेहतरी आती है। साथ ही, विविध क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों में इजाफा होता है। पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के बिहार, झारखंड और ओडिसा में यह पर्व विशेष रूप से मनाया जाता है। हालांकि, कमोबेश यह त्योहार देशभर में मनाया जाता है। इस पूजा के दौरान प्रतिमा बनाने वाले कुम्हार, दुर्गा माँ के जेवर बनाने वाले कलाकार, नाटक करने वाले कलाकार, नृत्य-संगीत, होटल, रेस्टोरेंट, पर्यटन आदि उद्योगों को बढ़ावा मिलता है।

यूनेस्को ने 2021 में दुर्गा पूजा को अमूर्त सांस्कृतिक विरासत घोषित कर दिया है, जिससे कयास लगाये जा रहे हैं कि हर साल पूजा के दौरान पर्यटकों की आवक में तेजी आयेगी, जिसमें विदेशी पर्यटकों की संख्या अधिक रहेगी। कोलकाता के रहवासियों ने यूनेस्को के प्रति अपनी कृतज्ञता एक कार्निवल आयोजित करके की है। इस साल 1 अक्तूबर से 5 अक्तूबर के दौरान भी कोलकाता में देश और विदेश से दुर्गा माँ के भक्त शामिल होकर इस त्योहार का आनंद लेंगे। वर्ष 2019 में दुर्गा पूजा के दौरान हुए कारोबार पर ब्रिटिश काउंसिल ने एक अध्ययन किया है, जिसके अनुसार वर्ष 2019 के दौरान दुर्गा पूजा में 32,377 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ, जो पश्चिम बंगाल की कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 2.58 प्रतिशत था। इस राशि में खुदरा क्षेत्र की हिस्सेदारी 27,364 करोड़ रुपये की थी। एक अनुमान के अनुसार इस साल देश में दुर्गा पूजा के दौरान लगभग 1.25 से 1.5 लाख करोड़ रुपए के कारोबार होने का अनुमान है।

कोरोना के बाद दुर्गा पूजा के लिए धन का सबसे प्रमुख स्रोत प्रायोजन है। बैंकों से लेकर रोजमर्रा के इस्तेमाल में कारोबार करने वाली कंपनियां, उपभोक्ता सामान से जुड़ी कंपनियों ने इस वर्ष दुर्गा पूजा को प्रायोजित किया है। नामचीन पूजा पंडाल, पंडाल के द्वार, खंभे, बैनर और स्टॉल प्रायोजन के लिए मुहैया करवाते हैं। विज्ञापन से भी दुर्गा पूजा के लिए पैसे आते हैं। इस वर्ष दीवाली पूरे देश में 24 अक्तूबर को धूमधाम से मनाया जायेगा। दीवाली में लक्ष्मी माँ की पूजा की जाती है, जिन्हें धन की देवी माना जाता है। इस त्योहार में दोस्तों और रिश्तेदारों के बीच मिठाइयों का आदान-प्रदान किया जाता है। कुम्हार दीये और खिलौने बनाते हैं। लोग पटाखा जलाकर खुशी का इजहार करते हैं, जिसके कारण पटाखे का कारोबार बड़े पैमाने पर किया जाता है। दीवाली से दो दिन पहले धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन सोना, चांदी और धातु के बर्तन खरीदने का रिवाज है। नए वाहन भी इस त्योहार में खूब खरीदे जाते हैं।

अखिल भारतीय व्यापार परिसंघ (सीएआईटी) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार कोरोना महामारी के बावजूद वर्ष 2021 में दीवाली के दौरान 1.25 लाख करोड़ रुपए का कारोबार किया गया था, जो विगत 10 सालों का रिकॉर्ड था। सीएआईटी के मुताबिक देशभर में चीनी उत्पादों के बहिष्कार की मुहिम चलाये जाने की वजह से चीन को वर्ष 2019 में लगभग 50 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था और स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों, कुम्हारों आदि की कमाई में तेजी आई थी। ई-कॉमर्स कंपनियां भी इस साल दीवाली में जबरदस्त कारोबार होने की उम्मीद कर रही हैं।

सीएआईटी के अनुमान के अनुसार दीवाली में कुल कारोबार 1.5 से 1.75 लाख करोड़ रुपए की सीमा को पार कर सकता है, क्योंकि विगत 2 सालों से आमजन कोरोना महामारी की वजह से परेशान थे और इस साल वे खुद को उत्सव के रंग में सराबोर करना चाहते हैं। भारत विविधताओं से भरा देश है और यहाँ हर 12 कोस में बोली, रहन-सहन, भाषा और पानी बदल जाती है, लेकिन इस बदलाव को त्योहार एक रंग में रंग देते हैं। इंसान की जिंदगी में अनेक मुश्किलें हैं, जिससे वह अक्सर घबरा जाता है। त्योहार हमें मुश्किलों के बीच जीना सिखाते हैं। साथ ही, हमें आर्थिक रूप से सबल बनाने का काम भी करते हैं।

-युवा लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार

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