हमसे जुड़े

Follow us

17.7 C
Chandigarh
Wednesday, February 18, 2026
More
    Home राज्य दिल्ली/यूपी जीबी पंत अस्प...

    जीबी पंत अस्पताल के भाषा संबंधी फरमान पर छिड़ा विवाद

    GB Pant Hospital

    राहुल सहित कांग्रेस नेताओं ने किया कड़ा विरोध

    नई दिल्ली। दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल द्वारा विवादित फरमान पर भाषा विवाद छिड़ गया है। दरअसल अस्पताल ने आदेश जारी किया था कि सभी नर्सिंग स्टाफ सदस्य सिर्फ हिन्दी या इंग्लिश भाषा में ही बात करें वरना उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी कूद पड़े हैं। राहुल ने कहा कि मलयालम भी उतनी भी सम्मानित भारतीय भाषा है, जितनी कि अन्य भाषाएं। इसके साथ ही उन्होंने नसीहत दी कि भाषाओं के नाम भेदभाव का चलन बंद होना चाहिए। बता दें कि अस्पताल प्रबंधन को एक शिकायत मिली थी कि नर्सिंग स्टाफ के सदस्य अपने राज्य की लोकल भाषा में बात करते हैं, जिसके चलते मरीजों को असुविधा का सामना करना पड़ता है।

    क्या था आदेश

    5 जून को जीबी पंत अस्पताल के नर्सिंग सुपरिटेंडेंट ने सर्कुलर जारी किया है कि हमें ऐसी शिकायत मिली है कि अस्पताल के कार्य स्थल पर बातचीत में मलयालम भाषा बोली जा रही है। जबकि यहां अधिकतर मरीज, और अन्य लोग इस भाषा को नहीं समझते, जिसके कारण वे असहाय और असुविधा महसूस करते हैं। इसलिए नर्सिंग स्टाफ के सभी सदस्यों को निर्देश दिया जाता है कि बातचीत में सिर्फ हिन्दी और अंग्रेजी भाषा का ही प्रयोग करें। वरना उन पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

    सर्कुलर को तुरंत वापसी की मांग

    इसके अलावा कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी अस्पताल के फैसले पर कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने ट्विट करके लिखा, ‘‘ये आश्चर्यजनक है कि भारत जैसे लोकतान्त्रिक देश में एक सरकारी संस्थान अपनी नर्सों से कह सकता है कि वे उन लोगों से भी अपनी मातृभाषा में बात न करें जो उन्हें समझ सकते हैं। ये एकदम अस्वीकार्य है। मानवाधिकारों का उल्लंघन है’’। गौरतलब है कि इस अस्पताल में बड़ी संख्या में केरल की नर्सें कार्यरत हैं और उनकी भाषा मलयालम है।

    केरल के वायनाड से सांसद राहुल गांधी ने इस सर्कुलर पर रोष जाहिर किया है। उन्होंने कहा कि मलयालम उतनी ही भारतीय है, जितनी कि कोई और भाषा। कांग्रेस सांसद और पार्टी के जनरल सेक्रेटरी के.सी. वेणुगोपाल ने तो इस मामले पर नाराजगी जताते हुए केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन को पत्र तक लिख दिया और इस सर्कुलर को जल्द से जल्द वापिस लेने की मांग की।

     

    अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।