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Tuesday, February 3, 2026
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    …किस बड़ी घटना का है इंतजार?

    गांव बारना में आए दिन जोहड़ में गिर कर प्राण त्याग रही गऊ माता

    • गांव की धरोहर जोहड़ हो रहे पंचायतों की उपेक्षा का शिकार
    • अनेकों बेजुबानों की हो चुकी इस जोहड़ में फंसने से मौत
    • ग्रामीणों ने की जोहड़ की सफाई करने की मांग

    कुरुक्षेत्र(सच कहूँ, देवीलाल बारना)। गांव बारना का जोहड़ बेजुबान पशुओंं के लिए मौत के कुंए के समान बन गया है। इस जोहड़ में उगे पान पत्ते में फंसने से अनेकों गऊएं व अन्य पशुओं की मौत चुकी है। आए दिन कोई न कोई गऊ या अन्य जानवर इसमें फंसा दिखाई पड़ता है। हालांकि अनेकों बार ग्रामीणों द्वारा इस जोहड़ में फंसी गऊओं को अपनी जान पर खेलकर बचाया भी है लेकिन ग्रामीण जोहड़ की इस स्थिति से बहुत परेशान हैं। ऐसा ही शनिवार सुबह भी देखने को मिला जब एक गऊ को जोहड़ में फंसा हुआ देखा गया। गऊ को जोहड़ में फंसा देख दर्जनभर ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद इस गऊ को जोहड़ से बाहर निकाला। जोहड़ में गिरने से हो रही गऊओं की मौत से ग्रामीणों में काफी रोष देखा जा रहा है।

    ग्रामीण सुखविंद्र सिंह, प्रवीण कश्यप, रामचंद्र, सुरेंद्र सैन, सुलतान सिंह, फूलकुमार, राहुल शर्मा, रामकुमार, रामजवाया, पाला राम, प्रिंस, बीरा राम सहित अन्य ग्रामीणों ने गाए को बाहर निकाला व गुड खिलाया व दवाई दी। ग्रामीण सुलतान ने कहा कि यह जोहड़ तकरीबन 20 फूट गहरा है। कश्यप बस्ती इस जोहड़ से बिल्कुल सटी हुई है। ऐसे में कोई बड़ा हादस होने का डर बना रहता है। वहीं जोहड़ की सफाई न होने से जहरीले जानवर भी जोहड़ से निकलकर घरों में घुसते रहते हैं। ग्रामीण रामचंद्र सहारण ने कहा कि सालों से इस जोहड़ की यही स्थिति है लेकिन प्रशासन व पंचायत ने इस ओर कभी ध्यान नही दिया। उन्होने कहा कि अनेकों बार ग्रामीणों द्वारा इस जोहड़ में फंसी गऊओं को अपनी जान पर खेलकर निकाला गया है। लेकिन पंचायत द्वारा कभी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि मौत के कुंए बने इस जोहड़ की सफाई करवाई जाए।

    जोहड़ होते हैं गांव की धरोहर : सुरेंद्र सैन

    ग्रामीण सुरेंद्र सिंह ने कहा कि जोहड़ को गांव में पूजनीय माना जाता है और ये गांव की धरोहर हैं लेकिन पंचायत की लापरवाही के चलते इस ओर कोई ध्यान नही दिया जा रहा है। इसलिए सरकार को इस ओर कड़े कदम उठाए जाने चाहिए। बारना गांव में तीन जोहड़ है और सभी जोहड़ों की स्थिति दयनीय बनी हुई है। कोई जोहड़ ऐसा नही है जहां पर पशुपालक अपने पशुओं को पानी पिला सकें व नहला सकें।

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