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Wednesday, January 21, 2026
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    पूर्वोत्तर की स्थिति पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग

    meeting

    राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता आनंद शर्मा ने नागरिकता संशोधन विधेयक पर कहा (meeting)

    • असम , मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम आदि राज्यों में स्थिति चिंताजनक

    नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। कांग्रेस ने संसद में नागरिकता विधेयक पारित होने के(meeting)  बाद पूर्वोत्तर विशेष रूप से असम में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के कारण उत्पन्न स्थिति को चिंताजनक बताते हुए प्रधानमंत्री से इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता आनंद शर्मा ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए नियम 267 के तहत कार्यस्थगन का नोटिस दिया था लेकिन सभापति एम वेंकैया नायडू ने इसे स्वीकार करने के बजाय शर्मा को शून्यकाल में यह विषय उठाने की अनुमति दी।

    • शर्मा ने कहा कि असम , मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम आदि राज्यों में स्थिति चिंताजनक है
    •  लोग बड़ी संख्या में सड़क पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
    •  ये सभी राज्य सीमावर्ती हैं इसलिये यह मुद्दा और भी संवेदनशील हो जाता है।
    • यह विधेयक पारित होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों के लिए अनिश्चितता की स्थिति उत्पन्न हो गयी है।
    •  नागरिकता मिलने के कारण बड़ी संख्या में लोग उनके राज्योंं में आयेंगे
    •  उनकी संस्कृति तथा पहचान गड़बड़ा जाने की आशंका है।

    यदि स्थिति बिगड़ती है तो पड़ोसी देशों पर असर पड़ेगा (meeting)

    उन्होंने कहा कि सरकार को स्थिति को बिगड़ने नहीं देना चाहिए और यह सबका दायित्व है कि वहां स्थिति सामान्य बने। राज्यसभा की भी जिम्मेदारी बनती है और हम इस मामले में चुप नहीं रह सकते। उन्होंने कहा कि सरकार को सभी दलों के साथ पहले ही संवाद करना चाहिए था। अब भी प्रधानमंत्री को इस पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए और इसमें इन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी बुलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि स्थिति बिगड़ती है तो पड़ोसी देश बंगलादेश के साथ भी संबंधों पर असर पड़ सकता है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के विनय विश्वम ने भी कहा कि पूर्वोत्तर के लोग भी इसी देश के हैं और उन्हें इस हाल में नहीं छोड़ा जा सकता।

    सभापति ने नेता सदन से इस मुद्दे को सरकार के संज्ञान में लाने को कहा

    कांग्रेस की अंबिका सोनी ने शून्यकाल में लेह लद्दाख पर्वतीय क्षेत्र के लोगों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि लेह लद्दाख पर्वतीय परिषद के सदस्यों ने सदन में विपक्ष के नेता और उनसे मुलाकात की थी। इन सदस्यों ने लेह लद्दाख परिषद को संविधान की छठी सूची में शामिल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस मांग को लेकर क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन बढ़ता जा रहा है। श्रीमती सोनी ने कहा कि केन्द्र शासित प्रदेश बनने पर शुरू में वहां के लोग खुश थे लेकिन अब लेह लद्दाख परिषद के मुद्दे को लेकर निराश हैं। सभापति ने नेता सदन से इस मुद्दे को सरकार के संज्ञान में लाने को कहा।

     

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