बरनावा आश्रम में उमड़े श्रद्धालु, रामनाम से भक्तिमय हुआ पंडाल

भीषण गर्मी के बावजूद विभिन्न राज्यों से पहुंची साध-संगत

  • पूज्य गुरु जी के रिकॉडिड अनमोल वचन सुन श्रद्धालु हुए निहाल

सरसा/बरनावा(रकम सिंह)। डेरा सच्चा सौदा आश्रम बरनावा, बागपत (उत्तर प्रदेश) व शाह सतनाम जी धाम (सरसा) में रविवार को नामचर्चाओं का आयोजन किया गया। जिसमें उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों से भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में डेरा श्रद्धालुओं ने शिरकत कर राम नाम का गुणगान किया। इससे पूर्व नामचर्चाओं का शुभारंभ इलाही नारा ‘‘धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा’’ बोलकर किया गया। जिसके बाद कविराजों पवित्र ग्रंथों से भजन बोलकर नामचर्चा पड़ाल को भक्तिभय कर दिया। नामचर्चा से पूर्व विभिन्न ब्लॉकों की साध-संगत ने बरनावा आश्रम की साफ-सफाई एवं खेती-बाड़ी की सार संभाल की।

गर्मी के मौसम को देखते हुए पानी समिति के सेवादारों द्वारा जगह-जगह ठंडे पानी की छबील भी लगाई गई एवं थोड़ी ही देर में श्रद्धालुओं को ठंडा पानी पिलाया गया। कविराज भाइयों द्वारा। इस अवसर पर बड़ी-बड़ी स्क्रीनों के माध्यम से पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के अनमोल रिकॉडिड वचन सुनाये गये। नामचर्चा के पश्चात लंगर समिति के सेवादारों कुछ ही देर में समस्त साध-संगत को लंगर ग्रहण कराया।

डेरा श्रद्धालुओं ने दोहराया ‘अनाथ मातृ-पितृ सेवा’ का संकल्प

नामचर्चाओं के दौरान पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा भेजगा गया 10वां रूहानी पत्र साध-संगत के बीच पढ़कर सुनाया गया। जिसे सुनकर साध-संगत साध-संगत की आँखों से वैराग्यमयी अश्रु बहने लगे। पत्र में पूज्य गुरु जी द्वारा शुरू किये गए 139वें मानवता भलाई कार्य ‘अनाथ मातृ-पितृ सेवा’ को बढ़ चढ़कर करने का डेरा अनुयायियों ने दोनों हाथ उठाकर संकल्प दोहराया। साध-संगत ने बीमार मरीजों की तन्दुरूस्ती के लिए भी अरदास की।


‘‘यदि इंसान का ‘गुरु’ पूर्ण हो और उसका अपने सतगुरु पर दृढ़ विश्वास हो और शिष्य अपने गुरु के बताए मार्ग पर सच्चाई व विश्वास के चलें तो वह बड़ी से बड़ी परेशानियों व मुश्किलों को भी आसानी से पार कर लेता है। भगवान, दाता है मंगता नहीं, वह अपने पीर-फकीरों के माध्यम से भक्तों की खाली झोलियां भरता रहता है। संत, पीर, फकीर का मकसद पूरी दुनियां में भाईचारे की स्थापना कर तड़पती रूहों को जीते जी गम चिंता परेशानी से आजाद करवाकर मोक्ष मुक्ति दिलाना होता है।
-पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां।


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