गजब: नामचर्चा घर पर तिरंगा फहराकर किया सैल्यूट व देश सेवा लिया संकल्प

Patriotism

खारियां (सुनील कुमार)। हरिद्वार धाम रामपुरथेड़ी में शुक्रवार को ब्लॉक रामपुरथेड़ी-चक्कां की ओर से ब्लॉकस्तरीय नामचर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें सभी गांवों से सैकड़ों की तादाद में साध संगत ने शिरकत् की। नामचर्चा का शुभारंभ ब्लॉक भंगीदास राजाराम इन्सां ने इलाही नारा लगाकर किया। तदुपरांत कविराजों ने भजनों के माध्यम से साध संगत को राम नाम से लाभान्वित किया। इसी दौरान ब्लॉक के 15 मैम्बर तार सिंह इन्सां ने पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के आशीर्वाद से डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत द्वारा चलाए जा रहे 142 मानवता भलाई के कार्यों में बढ़चढ़ कर भाग लेने व निस्वार्थ भाव से इन्सानियत की सेवा में हमेशा तत्पर रहने के लिए प्रेरित किया।

नामचर्चा के पश्चात पूज्य गुरू जी द्वारा हाल ही में शुरू किए 142वें मानवता भलाई कार्य हर घर में हो तिरंगा अभियान का अनुसरण करते हुए समस्त साध संगत ने नामचर्चा घर के मुख्य द्वार पर राष्ट्रगान के साथ तिरंगा फहराकर सैल्यूट किया तथा देश की आन-बान-शान व गौरव का प्रतिक राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को हर घर पर स्थापित करने का आह्वान किया। इस अवसर पर ब्लॉक के 15 मैम्बर नवतेज इन्सां, सभी गांव भंगीदास, शाह सतनाम जी ग्रीन एस वैलफेयर फोर्स विंग के सदस्य, सभी समितियों के जिम्मेवारों सहीत बड़ी संख्या में साध सगंत मौजूद रही।

1. झंडा संहिता के एक अन्य प्रावधान में बदलाव करते हुए कहा गया, राष्ट्रीय ध्वज हाथ से काता और हाथ से बुना हुआ या मशीन से बना होगा। यह कपास/पॉलिएस्टर/ऊन/ रेशमी खादी से बना होगा। इससे पहले, मशीन से बने और पॉलिएस्टर से बने राष्ट्रीय ध्वज के उपयोग की अनुमति नहीं थी।

झंडे का आकार आयताकार होना चाहिए। इसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 का होना चाहिए। केसरिया रंग को नीचे की तरफ करके झंडा लगाया या फहराया नहीं जा सकता।

2. अब भारतीय झंडा संहिता, 2002 के भाग-दो के पैरा 2.2 के खंड (11) को अब इस तरह पढ़ा जाएगा, ‘जहां झंडा खुले में प्रदर्शित किया जाता है या किसी नागरिक के घर पर प्रदर्शित किया जाता है, इसे दिन-रात फहराया जा सकता है। इससे पहले, तिरंगे को केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराने की अनुमति थी।

3. झंडे को कभी पानी में नहीं डुबोया जा सकता। किसी भी तरह फिजिकल डैमेज नहीं पहुंचा सकते। झंडे के किसी भाग को जलाने, नुकसान पहुंचाने के अलावा मौखिक या शाब्दिक तौर पर इसका अपमान करने पर तीन साल तक की जेल या जुमार्ना, या दोनों हो सकते हैं।

4. झंडे का कर्मशियल इस्तेमाल नहीं कर सकते। किसी को सलामी देने के लिए झंडे को झुकाया नहीं जाएगा। अगर कोई शख्स झंडे को किसी के आगे झुका देता हो, उसका वस्त्र बना देता हो, मूर्ति में लपेट देता हो या फिर किसी मृत व्यक्ति (शहीद आर्म्ड फोर्सेज के जवानों के अलावा) के शव पर डालता हो, तो इसे तिरंगे का अपमान माना जाएगा।

5. तिरंगे की यूनिफॉर्म बनाकर पहनना गलत है। अगर कोई शख्स कमर के नीचे तिरंगे को कपड़ा बनाकर पहनता हो तो यह भी अपमान है। तिरंगे को अंडरगार्मेंट्स, रुमाल या कुशन आदि बनाकर भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

6. झंडे पर किसी तरह के अक्षर नहीं लिखे जाएंगे। खास मौकों और राष्ट्रीय दिवसों जैसे गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के मौके पर झंडा फहराए जाने से पहले उसमें फूलों की पंखुड़ियां रखने में कोई आपत्ति नहीं है।

7. किसी कार्यक्रम में वक्ता की मेज को ढकने या मंच को सजाने में झंडे का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। गाड़ी, रेलगाड़ी या वायुयान की छत, बगल या पीछे के हिस्से को ढकने में यूज नहीं कर सकते। झंडे का इस्तेमाल किसी इमारत में पर्दा लगाने के लिए नहीं किया जा सकता।

8. फहराए गए झंडे की स्थिति सम्मानजनक बरकरार होनी चाहिए। फटा या मैला-कुचैला झंडा नहीं फहराया जाना चाहिए। झंडा फट जाए, मैला हो जाए तो उसे एकांत में मर्यादित तरीके से पूरी तरह नष्ट कर दिया जाए।

9. यदि झंडे को किसी मंच पर फहराया जाता है, तो उसे इस प्रकार लगाया जाना चाहिए कि जब वक्ता का मुंह श्रोताओं की ओर हो तो झंडा उसके दाहिनी ओर रहे। एक तरीका यह भी है कि झंडे को वक्ता के पीछे दीवार के साथ और उससे ऊपर लेटी हुई स्थिति में प्रदर्शित किया जाए।

10. किसी दूसरे झंडे या पताका को राष्ट्रीय झंडे से ऊंचा या उससे ऊपर या उसके बराबर नहीं लगाया जा सकता। इसके अलावा, फूलमाला, प्रतीक या अन्य कोई वस्तु झंडे के पोल के ऊपर रखी जाए।

11. भारतीय नागरिक अब रात में भी राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहरा सकते हैं। इसके लिए शर्त होगी कि झंडे का पोल वास्तव में लंबा हो और झंडा खुद भी चमके।

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