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    LIVE : हिमाचल के धर्मशाला में साध-संगत के जनसैलाब ने तोड़ा रिकॉर्ड, छोटा पड़ा पंडाल

    छाया - सुशील कुमार

    नामचर्चा की शुरूआत से पहले ही पूरा भरा पंडाल

    • मानवता भलाई के 138 कार्यों को दी नई रफ्तार

    धर्मशाला (सच कहूँ न्यूज)। डेरा सच्चा सौदा रूहानी स्थापना माह की खुशी के पहाड़ों की रानी धर्मशाला के पुलिस ग्राउंड में आयोजित पावन भंडारे की नामचर्चा में रविवार को हिमाचल प्रदेश से भारी तादाद में साध-संगत उमड़ पड़ी। साध-संगत के उत्साह का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नामचर्चा शुरू होने से पहले ही पंडाल पूरी तरह से भर गया और साध-संगत का आना लगातार जारी रहा। वहीं साध-संगत पावन भंडारे में शिरकत करने के लिए हिमाचली वेशभूषा और पारंपरिक वाद्यों पर नृत्य करते हुए पहुंची। 45 मैंबर सदस्यों ने बताया कि पावन भंडारे पर धर्मशाला के इतिहास का सबसे बड़ा जनसमूह पहुंचा।

    इसका अलावा नामचर्चा पंडाल में ही नि:शुल्क चिकित्सा शिविर लगाया गया, जिसमें शाह सतनाम जी स्पेशलिटी अस्पताल से डॉक्टर गौरव इन्सां के नेतृत्व में टीम अपनी सेवाएं दी। बड़ी संख्या में लोगों ने शिविर का लाभ उठाया।
    पावन भंडारे की नामचर्चा के दौरान हिमाचल प्रदेश के डेरा श्रद्धालुओं ने पूज्य गुरु जी के दिशा-निर्देशन में किये जा रहे 138 मानवता भलाई कार्यों को रफ्तार देते हुए जरूरतमंद बच्चों को पौष्टिक आहार की किटें, बैग, जरूरतमंद महिलाओं को सिलाई मशीनें दी गई।

     

    29 अप्रैल 1948 को बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने की थी डेरा सच्चा सौदा की स्थापना

    बता दें कि  डेरा सच्चा सौदा की पहली पातशाही पूजनीय बेपरवाह  साईं  शाह मस्ताना जी महाराज ने 29 अप्रैल 1948 को डेरा सच्चा सौदा की स्थापना की थी। आप जी ने लोगों को गुरु मंत्र दे कर मानवता भलाई कार्यो पर चलने का रास्ता बताया। इनके पश्चात दूसरी पातशाही परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने देश के विभिन्न हिस्सों में हजारों सत्संग किये और लाखों लोगों को गुरु मंत्र देकर इंसानियत की राह पर चलाया और अब पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन शिक्षाओं पर चलते हुए डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालु 138 मानवता भलाई कार्यो में जुटे हुए हैं।

    जिनमें  29 अप्रैल 2007 को पूज्य गुरु जी ने रूहानी जाम की शुरूआत कर मर रही इंसानियत को जिंदा करने का बीड़ा उठाया। 138 मानवता भलाई कार्यो में रक्तदान, शरीर दान, गुर्दा दान, पौधारोपण, गरीबों को मकान बनाकर देना, गरीब कन्याओं की शादी करवाना, राशन वितरण, नेत्रदान, लोगों का नशा छुड़वाना, आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों का निशुल्क इलाज करवाना, निशक्त जनों को सहारा देने के लिए ट्राई साइकिल देना सहित अनेक कार्य शामिल है।

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