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Sunday, March 15, 2026
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    साईं जी ने दिया प्रसाद और बीमारी हो गई दूर

    Mastana Balochistani - Sach Kahoon

    एक बार पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने सरसा शहर के लोगों की सत्संग की माँग को पूरा करने हेतु सत्संग करने आना था। आप जी का उतारा बहन विद्या देवी मदान के निवास पर था। बहन विद्या देवी आप जी के प्रति बहुत श्रद्धा-विश्वास रखती थी। उससे यह सुनकर कि मेरे कच्चे व छोटे से मकान में शहनशाह जी आ रहे हैं खुशी हज़म नहीं हो रही थी। यह सोचकर कि मेरे सतगुरु जी मौज के मालिक हैं आने से इंकार भी कर सकते हैं। विद्या देवी की तबीयत अचानक खराब हो गई। उसे दस्त व उल्टियाँ लग गईं। बीमारी ज्यादा बढ गई। आप जी के आने के समय घर की महिला सदस्यों को छत के ऊपर भेज दिया गया। छत पर ईंधन के तौर पर जलाने हेतु बनछटियों का ढेर पड़ा था।

    विद्यादेवी व उसकी तीनों ननदें छत पर चली गईं। कनातें (टैंट) लगी हुई थीं। सतगुरु जी के शुभ आगमन पर सभी ने प्रेमपूर्वक नारा लगाया। रोगी बहन विद्या देवी अपनी ननदों सहित कनातों के बीच में से आप जी के दर्शन पाने लगी। बहन विद्या देवी अपने भाग्य को कोस रही थी कि मुझे आज ही यह रोग होना था। मेरे घर साईं जी आए हैं। मैं अभागिन संगत की सेवा भी नहीं कर सकती। वैराग्य में आँखों में आँसू बह रहे थे। पास खड़ी ननदों ने प्रेमपूर्वक यह भजन गया-

    ‘‘वाटां वेखदी दीयां अक्खां थक गईयां, हुण तां आ सतगुरु फेरा पा सतगुरु।
    रस्ता जाणदी नहीं तेरे प्रेम वाला, मैंनू सके ना कोई पहुँचा सतगुरु।
    महल माड़ीयां वी मेरे पास नहीं ओं, कुल्ली कक्खां दी फेरा पा सतगुरु। वाटां वेखदी दीयां अक्खां…।’’

    यह वैराग्य भजन सुनकर पूज्य मस्ताना जी ने सेवादार गोबिंद मदान से कहा-‘‘यह आवाज कित्थों आ रही है, भाई पर्दे उतार दो।’’ कनातें उतार दी गईं। बहनों ने सतगुरु जी के पास आदरपूर्वक नारा लगाया। गोबिंद मदान बोला कि साईं जी, मेरी भाभी विद्या देवी को बहुत बुखार है। इस पर आप जी ने हँसते हुए फरमाया, ‘‘हमें पता है इसको जो बुखार है। वह सोचती है कि पता नहीं असीं आयेंगे कि नहीं इस को ये ही बुखार है।’’ कृपालु दाता जी ने एक चीकू के फल का प्रसाद अपने पवित्र कर कमलों से बहन विद्या देवी को दिया। बहन की तबीयत उसी समय ठीक हो गई। सभी रोग प्रसाद खाने से दूर हो गए। बहन खुशी-खुशी संगत की सेवा में जुट गई। वह अपने सतगुरु जी का लाख-लाख शुक्राना करने लगी। उस खुशमिजाज़ बहन को जीवन में कभी भी कोई कठिनाई नहीं आई।

     

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