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    आत्महत्या न करें, जीवन शैली बदलें मध्यम वर्ग

    Suicide

    देश में परिवार सहित आत्महत्या करने की दर्दनाक घटनाएं चिंताजनक हैं। गत दिवस गाजियाबाद में एक परिवार के सभी सदस्यों ने आठवीं मंजिल से छलांग लगाकर खुदकुशी कर ली। ऐसे मामलों पर सरकारी या राजनीतिक टिप्पणियां लगभग न के बराबर ही होती हैं। दरअसल यह दुखद घटनाएं सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों का परिणाम हैं। बदल रही व्यवस्था का समाज पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है, जो सरकार के एजेंडे में नहीं आती। सरकार की नजर में भौतिक विकास ही तरक्की है। सड़कें, इमारतें, पुलों का निर्माण सरकारों की प्राथमिकता है। कारों की बिक्री में विस्तार होना ही मजबूत आर्थिकता माना जाता है। विकास के इस पूंजीवादी माडल में सामाजिक संतुलन बिगड़ गया है। विशेष तौर पर मध्यम वर्ग इस परिवर्तन की आंधी में बुरी तरह पिस रहा है।

    महंगी व नई-नई गाड़ियां, महंगे मोबाइल व घरेलू प्रयोग का इलैक्ट्रोनिक सामान, महंगे विवाह और अन्य सामाजिक समारोह मध्यम वर्ग के लिए आर्थिक समस्याएं खड़े कर रहे हैं। किसान-मजदूर से लेकर व्यापारी वर्ग इन्हीं कारणों के चलते आत्महत्याएं करने के लिए विवश हो गया है। इस दौर में रूहानी मार्गदर्शन और खुद संतुलित जीवन शैली अपनाने की आवश्यकता है। रुहानियत के अनुसार आत्मघात महापाप है। आत्महत्या जैसे बुरे कदम से बचाने के लिए कोई सरकार या कानून लोगों की मदद नहीं कर सकता। मध्यम वर्ग को खुद ही सूझ-बूझ से काम लेना होगा। निजी टेलीकाम कंपनियों ने सस्ती, अनलिमिटड कालिंग और अनलिमिटड इंटरनेट डाटा मुहैया करवाकर कोठियों से लेकर झुग्गी-झौंपड़ियों में मोबाइल फोन और इंटरनेट पहुंचा दिया है।

    भले ही सस्ता देकर कंपनियां खुद घाटे में गई, लेकिन मोबाइल फोन और इंटरनेट की जो आदत लोगों को पड़ गई है वह कीमतें बढ़ने पर भी छूटने वाली नहीं लगती। किसी भी वैज्ञानिक वस्तु का आवश्यकता अनुसार प्रयोग जायज है लेकिन वित्तीय क्षमता से अधिक खर्च मध्यम वर्ग के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है। आटो मोबाइल कंपनियां गाड़ियां बेचने के लिए लोगों के घर तक पहुंचकर खरीदने के लिए मजबूर कर रही हैं।

    फाइनैंस की सुविधा और शब्दावाली की हेरफेर ने लोगों की जेबें खाली करने का जादूगरी की तरह काम किया है। मध्यम वर्गीय लोगों को खुदकुशी जैसे कदम उठाने की बजाय अपने आर्थिक स्रोतों और खर्चों का तालमेल बनाकर चलना होगा। हमें भूटान जैसे राजनीतिक प्रबंध से प्रेरणा लेनी होगी, जहां खुशहाली से विकास दर को मापा जाता है। सादगी और प्राकृतिक जीवन के अहमीयत को समझना होगा। प्राकृतिक और मानव में संबंध मुश्किलों से राहत प्रदान करने वाला है। ज्यादा आरामदायक जीवन रोगों को निमंत्रण देने के साथ-साथ खर्चीला भी है।

     

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