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    विरासत पर न हो निंदा प्रचार

    Narendra Modi, Seoul Peace Prize

    महान देशभक्त बाबू सुभाष चंद्र बोस द्वारा स्थापित की गई आजाद हिंद सरकार के 75वें स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल किले पर तिरंगा लहराया। देश भक्तों को याद रखना जरूरी व अच्छी बात है लेकिन इस दौरान प्रधानमंत्री ने जिस प्रकार कांग्रेस पर शाब्दिक प्रहार किए वह इस समारोह की महत्वता को फीका कर गए। यह समारोह भी नेहरू-गांधी परिवार के खिलाफ बयानबाजी बनकर रह गया। प्रधानमंत्री पर अक्सर यह सवाल उठते हैं कि वह देश भक्तों पर पार्टियों के ठप्पे लगा रहे हैं।

    आजाद हिंद सरकार का दिवस धूमधाम से मनाया जाना चाहिए लेकिन ऐसे समारोह किसी दूसरी पार्टी को नीचा दिखाएं तो यह बात अपने आप में छोटी नजर आती है। यूं भी प्रधानमंत्री मोदी इस बात को न भूलें कि उनकी सरकार के चार साल बाद भी शहीद भगत सिंह को सरकारी तौर पर शहीद का दर्जा नहीं मिल सका। दरअसल प्रधानमंत्री इससे पूर्व सरदार पटेल व डॉ. अम्बेदकर के बारे में भी ऐसा ही प्रचार करते आ रहे हैं कि कांग्रेस के 60 साल के कार्यकाल में इन महान नेताओं का सम्मान नहीं हुआ।

    ऐसा कहकर प्रधानमंत्री यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि सरदार पटेल व बाबू सुभाष चंद्र बोस कांग्रेसी थे और आज भाजपा उनकी कीमत लगा रही है, दूसरी तरफ सच्चाई यह है कि सुभाष चंद्र बोस व सरदार पटेल को दिल से प्यार करने वाले करोड़ों भारतीय उन्हें कांग्रेसी होने के कारण प्यार नहीं करते, बल्कि देश के महान स्वतंत्रता सेनानी के तौर पर सम्मान देते हैं। स्वतंत्रता से लेकर आज तक करोड़ों गैर-कांग्रेसी सरदार पटेल व बोस के प्रशंसक हैं।

    यह बात किसी को समझाने या बताने की जरूरत नहीं कि सुभाष चन्द्र बोस ने देश के लिए क्या-क्या कुर्बानियां दी हैं। 10-15 सालों के बच्चे भी दिल से बोस का सम्मान करते हैं, जिन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं कि बोस कौन थे और वह पार्टी के साथ कब जुड़े? सुभाष बाबू लोगों के दिलों में बसतें हैं। नेता जी की भाषा, क्षेत्र, संस्कृति बेमिसाल है, बिल्कुल उसी तरह जैसे शहीद भगत सिंह आज देश के लोगों के नायक हैं।

    कोई शहीद भगत सिंह को आर्य समाजी कोई सिख, कोई नास्तिक बताता रहा लेकिन यह सब प्रयास नाकाम रहे और आखिर शहीद भगत सिंह पूरे हिंदूस्तान व अब पाकिस्तानियों के भी प्यारे नेता हंै। राजनेताओं को देश भक्तों के नाम पर देशवासियों को बांटने से परहेज करना चाहिए। बेहतर है यदि देश-भक्तों के समारोह राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर मनाए जाएं। किसी पार्टी विशेष पर निशाना साधने से समारोह के संदेश, महत्व एवं उद्देश्य में भी राजनीति झलकती है।

     

     

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