जीवन से हार कर न करें आत्महत्या, मजबूत हौंसले सेफिर बढ़े आगे

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don't commit suicide

परिचर्चा: पिछले काफी दिनों से युवा किसी न किसी कारण आत्महत्या कर रहे है

सच कहूँ/सन्नी कथूरिया
पानीपत। युवा देश का भविष्य होते हैं युवा ही है जो देश को इतनी ऊंचाइयों पर लेकर जा सकते हैं लेकिन जब यही युवा गलत सोच के कारण आत्महत्या करने लग जाए तो यह एक गंभीर विषय बन जाता है। जी हां शहर में पिछले काफी दिनों से युवा किसी न किसी कारण आत्महत्या कर रहे हैं। आजकल के युवा छोटी-छोटी बातों को दिल से लगा लेते हैं और इतना बड़ा कदम उठा लेते हैं कि बाद में उनके परिवार वालों के लिए गम के सिवा कुछ नहीं रहता। पिछले दिनों शहर के तहसील कैंप के रहने वाले उभरते सिंगर की डेड बॉडी नहर से मिली थी।

उसके चचेरे भाई प्रवीण सम्मी ने युवाओं से अपील की है कि वह ऐसा कदम ना उठाएं, जिससे उनके परिवार वालों को सारी जिंदगी गमों के साथ जीना पड़े। अगर आपको कोई प्रॉब्लम है तो उसका सामना करें समस्या को अपने बड़ो के साथ सांझा करें। वहीं सच कहूँ भी देश के सभी युवाओं से एक अपील भी करता है कि युवाओं आत्महत्या से पाप न करें। इस गंभीर विषय को लेकर सच कहूँ संवाददाता ने समाज के डॉक्टरों व गणमान्यजनों से चर्चा की।

माता-पिता को चुके व्यस्त, बच्चों के लिए समय नहीं

आजकल के युवा जो इतना बड़ा कदम उठा रहे हैं कुछ हद तक बच्चों के माता-पिता के साथ दोस्त भी जिम्मेदार हैं। माता-पिता इतने व्यस्त हो चुके हैं कि वह बच्चों की ओर ध्यान नहीं दे पाते। बच्चे घर पर क्या करते हैं, बाहर क्या करते हैं, इनका माता-पिता को जानकारी नहीं होती। आजकल के युवाओं का खानपान भी काफी पहले से बदल हो चुका है बाहर की जंग फूड खाने से दिमाग स्वस्थ नहीं रहता और इस तरह के नेगेटिव विचार जल्दी आते हैं।
-डॉक्टर सजय सैन, पानीपत।

अशिक्षा व डिप्रेशन आत्महत्या का बड़ा कारण

आत्महत्या का किसी व्यक्ति विशेष से कोई संबंध नहीं है। 21 से 23 साल के नौजवानों की आत्महत्या की खबर रोज सुर्खियां बन रही हैं। भारतीय युवा आज तेजी से अपने जीवन जीने के अंदाज में बदलाव ला रहे हैं। ऐसे में आधुनिक संस्कृति के किसी बुरे हिस्से को अपनाना उनके लिए बड़ी बात नहीं है। आत्महत्या करने के कारण व्यक्तिगत, सामजिक या आर्थिक हो सकते हैं। अशिक्षा आत्महत्या का एक बहुत बड़ा कारण है। लोग अक्सर यह सोचते हैं कि मृत्यु के बाद सारी जिम्मेदारियों से मुक्ति मिल जाएगी और आत्महत्या को ही अंतिम समाधान मान लेते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण डिप्रेशन है।
-डॉ. रंजू, सहायक प्रोफेसर, आईबी महाविद्यालय।

युवाओं में खत्म हो चुकी सहनशक्ति

नौजवान युवाओं द्वारा आत्महत्या जैसा कदम उठाना एक गंभीर विषय है। युवाओं में सहनशक्ति खत्म होती जा रही है। वहीं काफी हद तक सोशल मीडिया भी इसका जिम्मेदार है। क्योंकि युवा हर समय मोबाइल में व्यस्त रहता हैं। इंटरनेट के गलत इस्तेमाल से उनके दिमाग भी भटक जाता है। अकसर कई वीडियो वायरल होती है जिसमें युवा लाइव सुसाइट करने की कौशिश करते हैं और अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं। वहीं युवाओं का स्वभाव इतना चिड़चिड़ा हो चुका है कि छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना आम बात है।
-गौरव भटेजा,मनोवैज्ञानिक चिकित्सक

बढ़ रही तनाव पूर्ण जीवनशैली व जीवन संघर्ष

जीवन में बढ़ते संघर्ष और तनाव पूर्ण जीवनशैली के कारण आज का युवा बहुत ज्यादा तनाव ग्रस्त रहने लगा है। आधुनिक जीवनशैली और दौड़-भाग भरी जिंदगी के कारण युवाओं में बढ़ता तनाव, पारिवारिक उलझनें, धोखेबाजी, अकेलापन आदि वजहों से आज का युवा खुद को बहुत हारा हुआ महसूस करता है। पिछले कुछ वर्षों में देश में खुदकुशी की घटनाओं में इजाफा हुआ है। जिंदगी की जद्दोजहद और गगनचुंबी सपनों के पीछे भाग रही नौजवान पीढ़ी तेजी से इसकी चपेट में आ रही है। इतना ही नहीं हर दिन मजदूरी करने वाला मजदूर भी जिंदगी से हताश होकर मौत को गले लगा रहा हैं।
-मालती अरोड़ा, एडवोकेट।

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