Mass Movement: नई दिल्ली। पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने वाला विश्व का सबसे बड़ा जन आंदोलन है अर्थ आवर। मार्च महीने के अंतिम शनिवार को अर्थ आवर मनाया जाता है। आज दुनियाभर में 8.30 से 9.30 के बीच यह मनाया जाएगा। अर्थ आवर दुनियाभर के लोगों से अपील करता है कि वे अपनी अनावश्यक बत्तियां बंद कर दें। यह अभियान एक घंटा (60 मिनट) पृथ्वी के लिए समर्पित करने को कहता है। इस दौरान कोई भी सकारात्मक कार्य करने की सलाह देता है जैसे बिजली बचाना, पेड़ लगाना या पर्यावरण की रक्षा के लिए छोटा कदम उठाना। Earth Hour
अर्थ आवर की शुरुआत साल 2007 में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर से हुई थी। विश्व वन्यजीव कोष द्वारा शुरू किया गया यह अभियान लोगों से अपील करता है कि वे रात में एक घंटे के लिए लाइट बंद कर दें। शुरुआत के समय यह सिर्फ एक शहर तक सीमित था और कुछ हजार लोगों ने इस मुहिम में हिस्सा लिया था, लेकिन पिछले 19 वर्षों में यह आंदोलन पूरे विश्व में फैल गया। आज 190 से ज्यादा देशों और क्षेत्रों में लाखों-करोड़ों लोग इसमें शामिल होते हैं।
एक घंटे के लिए अपने घरों, दफ्तरों और सार्वजनिक स्थानों की अनावश्यक बत्तियां बंद करने की सलाह
इसके लिए संगठन रात 8:30 बजे से 9:30 बजे तक एक घंटे के लिए अपने घरों, दफ्तरों और सार्वजनिक स्थानों की अनावश्यक बत्तियां बंद करने की सलाह देते हैं। इस साल 2026 में अर्थ ऑवर अपनी 20वीं वर्षगांठ मना रहा है। दो दशकों से यह अभियान पृथ्वी की रक्षा के लिए सामूहिक कार्रवाई और जागरूकता का प्रतीक बन गया है। Earth Hour
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सिर्फ एक घंटे की बिजली बचाना नहीं है। इसका मकसद लोगों को यह समझाना है कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी ऊर्जा का सही और जिम्मेदाराना उपयोग किया जा सकता है। बिजली की बचत से कार्बन उत्सर्जन कम होता है, जो जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में मदद करता है। एक घंटे की यह छोटी सी पहल बड़े स्तर पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है।
भारत में अर्थ आवर का प्रभाव हर साल बढ़ रहा है। देश के प्रमुख शहरों में प्रसिद्ध स्मारक, सरकारी भवन, होटल, मॉल और निजी संस्थान इस मुहिम में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। सिर्फ लाइट बंद करने के अलावा पर्यावरण अनुकूल गतिविधियां, पेड़ लगाने, प्लास्टिक कम करने और सस्टेनेबल जीवन शैली अपनाने जैसे संदेशों पर जोर दिया जा रहा है। समुदाय स्तर पर कहानी कहने और सामूहिक कार्रवाई को बढ़ावा दिया जा रहा है। Earth Hour















