हमसे जुड़े

Follow us

17.4 C
Chandigarh
Friday, April 10, 2026
More
    Home कारोबार खाद्य तेलों क...

    खाद्य तेलों के दामों में आग, एक साल में हुए दोगुने

    oil

    राहत के लिए कदम उठा सकती है सरकार

    नई दिल्ली। अच्छे दिनों का इंतजार करते आमजन के गुस्से से अब सरकार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। खाद्य तेलों के दामों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी के चलते आमजन का मोदी सरकार से मोह भंग होता जा रहा है और उसमें बेहद नाराजगी देखी जा रही है। क्योंकि पिछले एक साल में ही इन तेलों के दाम दोगुने हो चुके हैं। लोगों के बीच सरकार की छवि को हुए नुक्सान की भरपाई के लिए अब सरकार ने खाद्य तेलों पर आयात कर को घटाने की तैयारी की है। ऐसा करने से शायद आमजन को थोड़ी राहत मिले।

    बता दें कि देश में फिलहाल सरसों, पाम, सोया आॅयल आदि तेलों की कीमत 175 से 200 रुपये लीटर के करीब पहुंच चुकी है। एक न्यूज एजेंसी ने कुछ वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के हवाले से बताया कि आमजन को राहत देने के लिए सरकार अब टैक्स घटाने की तैयारी हो रही है। भारत विश्व के सबसे ज्यादा वनस्पति तेल आयात करने वाले देशों में शुमार है। आयात कर कम होने से जहां घरेलू बाजार में तेल कीमतें घटेंगी और खपत में इजाफा होगा। वहीं मलेशिया से आने वाले पाम, सोया, सनफ्लावर आयल के आयात को बल मिलेगा। ऐसा होने से घरेलू सरसों, सोयाबीन और मुंगफली तेल के दाम भी कम होंगे।

    गौरतलब है कि भारत खाद्य तेलों की दो तिहाई आपूर्ति के लिए इसका आयात करता है। वर्तमान में पाम आॅयल पर 32.5% और क्रूड सोयाबीन तथा सोया आॅयल पर 35 प्रतिशत टैक्स वसूला जा रहा है। अगर पाम आॅयल की बात करें तो इसका ज्यादातर आयात इंडोनेशिया, मलेशिया सेस और सोया, सनफ्लावर आॅयल अर्जेंटीना, ब्राजील, यूक्रेन और रूस आदि देशों से मंगवाया जाता है।

     

    अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।