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Wednesday, March 18, 2026
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    आनंदपाल एनकाउंटर में चौंका देने वाला खुलासा

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    राजू के जेल जाने के बाद बढ़ी पुलिस की टेंशन

    सीकर (सच कहूँ न्यूज)। शेखावाटी में करीब 20 साल पहले पनपा गैंगवार एक बार फिर पुलिस की नजरों में रहेगा। आनंदपाल के एनकाउंटर व राजू ठेहट के जेल में जाने के कारण उनके गुर्गे छोटी-छोटी वारदात कर पुलिस की परेशानी बढ़ा सकते हैं। पहले राजू ठेहट, फिर बलबीर बानूड़ा व आनंदपाल और अब इनके गुर्गे। ठेहट की गिरफ्तारी और बानूड़ा व आनंदपाल की मौत के बाद माना जा रहा था कि अब करीब 20 साल से चली आ रही यह गैंगवार की जंग अब खत्म हो सकती है, लेकिन इन्हीं गैंग से जुड़कर आगे बढ़े गुर्गे अब भी मुसीबत बन सकते हैं।

    कुछ नए गैंग पनप रहे हैं तो कुछ गुर्गे ऐसे भी हैं जो आनंदपाल और ठेहट गिरोह के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं और आज भी फरार चल रहे हैं। चूरू में हिस्ट्रीशीटर महेंद्र गोदारा की गोली मारकर की गई हत्या के बाद सामने आया है कि शेखावाटी में गैंगवार पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है।

    शराब तस्करी से शुरू हुए थे गैंग

    शेखावाटी में गैंगवार शराब तस्करी से ही शुरू हुआ था। बलबीर बानूड़ा व ठेहट के बीच विवाद की जड़ भी शराब ठेका ही था। करीब 20 साल से चल रहे गैंगवार व नई पनप रही गैंग के बीच अब भी शराब तस्करी ही विवाद का मुख्य कारण है। महेंद्र गोदारा की हत्या के मामले में भी जिन बदमाशों का नाम सामने आ रहा है वे इसी से जुड़े हुए हैं।

    अजय रिणवां गैंग फिर से सक्रिय

    पिछले कुछ समय से अपराध से दूर होने का प्रयास किया, लेकिन जब से दूसरी गैंग से दुश्मनी हुई तब से फिर से सक्रिय होने लगी है। पांडिया से दुश्मनी के चलते इसके गुर्गे भी लगातार सक्रिय हो रहे हैं। महेंद्र गोदारा की हत्या के मामले में भी मुख्यतौर पर रिणवां के खिलाफ ही रिपोर्ट दी गई है और उसे साजिश का मुख्य सूत्रधार बताया जा रहा है।

    आनंदपाल गैंग के फरार गुर्गे

    भले ही आंनदपाल और सीकर जिले में उसके सबसे खास रहे बलबीर बानूड़ा दोनों मारे जा चुके हैं लेकिन इस गिरोह के कुछ गुर्गे अभी भी फरार हैं और सीकर से जुड़े हैं। इन पर इनाम भी घोषित है लेकिन पुलिस की पकड़ में नहीं आए हैं। ये भी पुलिस के लिए बड़ी टेंशन हैं क्यों कि ये पहले सीधे तौर पर आनंदपाल से जुड़े हुए थे।

    ठेहट के गुर्गे

    राजू ठेहट व उसका भाई ओमा भले ही जेल में बंद हैं लेकिन इस गैंग के कई गुर्गे भी अभी तक फरार चल रहे हैं। साथ ही ठेहट व उसका भाई भी जेल से ही इस गिरोह को आॅपरेट कर रहे हैं।

    अनिल उर्फ पांडिया गैंग

    पांडिया के अजमेर हाईसिक्योरिटी जेल में जाने के बाद से वह आनंदपाल के साथ जुड़ गया। हालांकि आंनदपाल के एनकाउंटर के बाद से इनके हौसले जरूर पस्त हुए हैं। इस गैंग की सीधे तौर पर फतेहपुर के हिस्ट्रीशीटर अजय रिणवां की गैंग से दुश्मनी है। इस गिरोह ने अप्रैल के महीने में ही अजय रिणवां या उसके खास किशोर कुमावत को ठिकाने का प्लान बना लिया था।

    17 अप्रैल को फतेहपुर कोर्ट में पेशी के दौरान यह गैंग वारदात करने वाली थी लेकिन पुलिस को पहले ही इसकी भनक लग गई। इसके बाद फतेहपुर पुलिस ने ही हथियारों के साथ महेंद्र गोदारा को गिरफ्तार किया था। उससे पूछताछ में यह भी सामने आया था कि इन्होंने रिणवां को मारने का प्लान बनाया था।

    इनका कहना है

    ‘‘संदिग्धों पर लगातार नजर है। अपराधियों के सक्रिय गुर्गो पर शिकंजा कसने के लिए जिले के सभी थानाप्रभारियों को भी नजर रखने के लिए निर्देश दिए है।

     डॉ. तेजपाल सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक

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