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Wednesday, April 1, 2026
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    झूठ व मक्कारी की लीला

    पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां का संघर्ष झूठ एवं बुराई के खिलाफ है, भले वह बुराई जीवन के किसी भी क्षेत्र में फैली हो। सत्य की राह पर चलने की प्रेरणा पाए सच कहूँ से जुड़े पत्रकारों, उपसंपादकों, प्रिटिंग प्रैस में काम करने वाले स्टॉफ को झूठ का साथ देना बर्दास्त नहीं। उधर 25 अगस्त के बाद इस समाचार पत्र के खिलाफ झूठों एवं षडयंत्रकारियों के झांसे में आई सरकार आॅफ द रिकॉर्ड कई बाधाएं खड़ी कर रही है।

    पहले यहां 25 से 29 अगस्त तक मुख्य कार्यालय सरसा की बिजली व इंटरनेट लीजलाईन काट दी गई वहीं पुलिस एवं अर्धसैनिक बलों द्वारा कार्यालय के बाहर सड़कों की घेराबंदी कर सच कहूँ से जुड़े स्टॉफ को आॅफिस नहीं आने दिया गया। जोकि अब भी बदस्तूर जारी है। हद तो तब हो जाती है जब लाख बंदिशों के बाद भी सच के प्रति समर्पित एवं तटस्थ पत्रकारिता का प्रहरी सच कहूँ स्टॉफ समाचार पत्र प्रकाशित कर सप्लाई के लिए भेज देता है।

    तब इसके वितरकों को धमकाया जाता है कि वह सच कहूँ के लिए काम करना छोड़ दें अन्यथा उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। जब इतने पर भी सच कहने वाले कलम के निडर सिपाही पीछे नहीं हटते तब इसके सदस्यों पर बुराई के फेर में उलझी सरकार पुलिसिया कार्रवाई कर उन्हें जेल में बंद करने लगी है। जिसकी शुरूआत पंजाब के फिरोजपुर से सच कहूँ के जिला संवाददाता एवं संगरूर से भीमसैन को पुलिस द्वारा उठा कर झूठा मामला दर्ज कर लिया है। इसके अलावा सच कहूँ की पेपर न्यूजप्रिंट सप्लाई बाधित करने के लिए एवं दैनिक खर्चों का मोहताज बना देने के लिए बैंक खातों से लेन-देन पर भी रोक-टोक हो गई है।

    जबकि इन खातों का डेरा सच्चा सौदा संस्था से कोई लेना देना भी नहीं है। बुराई में जीने वालों जितनी मर्जी झूठी कहानियां बनाकर प्रसारित कर लो, लेकिन आप बहुत जल्द बेनकाब होने वाले हो। आप फिलहाल झूठ की लल्लो चप्पो की पत्रकारी में जितना मर्जी गदगद हो लो लेकिन एक दिन सच की ताकत के सामने आपकी स्क्रीन भी काली होगी, आपके भी बैंक लेन-देन पर रोक होगी, आपको भी सच्ची सरकार के दरोगे उठाकर जीप में बैठा लेंगे, तब आपके लिए ठंडा पेश करने वाले, तिजोरियां खोलने वाले झूठे व मक्कार साथ नहीं होंगे।

    बहुत से अभिव्यक्ति के सूरमा सिर्फ पार्टियों को कोसते हैं, नेताओं को कोसते हैं लेकिन उन्हें बता दूं कि असल समस्या झंडे-डंडे नहीं, असल समस्या इस देश की अफसरशाही, लोकतंत्र के सभी स्तंभों, समाज में पैठ बनाए बैठी मक्कार, एवं बिकाऊ नस्ल है जो हर जगह सच्चे व ईमानदार लोगों को प्रताड़ित कर अपना डरपोक होना भी छिपा लेती है एवं सच्चे होने का ढोंग भी करती है। लेकिन कौरव (भ्रष्ट, षडयंत्रकारी) भले सौ हों लेकिन पांडव (सच के लिए लड़ने वाले) पांच ही काफी होते हैं।