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    गाजियाबाद में जिला मुख्यालय पर गरजा अन्नदाता, कहा- “खेती घाटे का सौदा बन गई है”

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    Ghaziabad News: गाजियाबाद में जिला मुख्यालय पर गरजा अन्नदाता, कहा- "खेती घाटे का सौदा बन गई है"

    किसानों की 17 सूत्रीय मांगों को लेकर भाकियू का प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

    गाजियाबाद (सच कहूं/रविंद्र सिंह)। Ghaziabad News: कृषि संकट, बढ़ती लागत और अव्यवस्थाओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने शुक्रवार को जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने किसानों की समस्याओं को लेकर जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित 17 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन एडीएम रणविजय सिंह को सौंपा। इस मौके पर राष्ट्रीय सचिव ओमपाल सिंह,प्रदेश उपाध्यक्ष रामकुमार चौधरी और जनपद के तहसील, नगर, ब्लॉक, ग्राम अध्यक्ष, भाकियू के सभी पदाधिकारी और किसान मौजूद रहे।

    भाकियू के गाजियाबाद जिला अध्यक्ष बिजेंद्र सिंह ने कहा कि देश का अन्नदाता आज गहरे संकट में है। एक ओर प्राकृतिक आपदाएं और आवारा पशुओं का प्रकोप है, तो दूसरी ओर बढ़ती लागत और घटता उत्पादन मूल्य किसानों की कमर तोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि खेती अब लाभ का नहीं, घाटे का सौदा बन गई है। किसान की मेहनत का उचित मूल्य और सम्मान नहीं मिल रहा। Ghaziabad News

    भाकियू नेताओं ने कहा कि ये मांगें प्रदेश के लाखों किसानों की आवाज हैं और इन पर अगर समयबद्ध कार्रवाई होती है, तो किसान आत्मनिर्भर बन सकेगा। साथ ही, कृषि प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बनेगी। मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया है कि जल्द सकारात्मक निर्णय लेकर किसानों को राहत प्रदान की जाए।

    ज्ञापन में मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि किसानों की समस्याओं का स्थायी समाधान निकालते हुए उनकी आर्थिक और सामाजिक स्थिति में सुधार लाया जाए। इसके लिए भाकियू ने निम्नलिखित 17 सूत्रीय मांगें रखीं हैं:-

    भाकियू की 17 सूत्रीय प्रमुख मांगें | Ghaziabad News

    1-गन्ना मूल्य -450 प्रति क्विंटल घोषित किया जाए और बकाया भुगतान ब्याज सहित शीघ्र कराया जाए।
    2-छोटे एवं सीमांत किसानों के कृषि ऋण पूरी तरह माफ किए जाएँ।
    3. -स्मार्ट मीटर प्रणाली समाप्त की जाए, किसानों को मुफ्त या रियायती बिजली मिले।
    4.-आवारा पशु नियंत्रण हेतु ठोस नीति बने, हर गाँव में गो-आश्रय स्थल सुचारू रूप से संचालित हों।
    5-फसल बीमा योजना में पारदर्शिता लाई जाए और शीघ्र मुआवजा मिले।
    6-बीज, खाद, डीजल, कीटनाशकों पर टैक्स में छूट दी जाए।
    7-एमएसपी को कानूनी दर्जा दिया जाए।
    8-प्राकृतिक आपदाओं में फसल क्षति का तत्काल मुआवजा दिया जाए।
    9.-किसान पेंशन योजना लागू की जाए।
    10-हर जिले में कृषि मंडी और भंडारण केंद्र बनाए जाएँ।
    11.-कृषि उपयोग हेतु डीजल-पेट्रोल पर टैक्स माफ किया जाए।
    12-प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि 12,000 प्रति वर्ष की जाए।
    13-भूमिहीन किसानों को खेती के लिए सरकारी भूमि पर लीज़ दी जाए।
    14-हर जनपद में कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र खोले जाएँ।
    15-किसानों व आंदोलनों से जुड़े झूठे मुकदमे वापस लिए जाएँ।
    16-कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देकर किसानों की आय में वृद्धि की जाए।
    17-नीति निर्माण में किसान संगठनों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

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