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Sunday, March 22, 2026
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    World Water Day: बूंद-बूंद बचाने की मुहिम में फतेहाबाद बना उदाहरण, जिला सलाहकार शर्मा चंद लाली की पहल से बढ़ी जनभागीदारी

    World Water Day
    World Water Day: बूंद-बूंद बचाने की मुहिम में फतेहाबाद बना उदाहरण, जिला सलाहकार शर्मा चंद लाली की पहल से बढ़ी जनभागीदारी

    World Water Day:  सच कहूँ/विनोद शर्मा फतेहाबाद। जल ही जीवन है यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है। गिरते भू-जल स्तर और बढ़ते जल संकट के बीच फतेहाबाद जिले में जल संरक्षण की मुहिम को धरातल पर उतारने में जिला सलाहकार शर्मा चंद लाली की भूमिका काफी अहम रही है। उनके प्रयासों से न केवल सरकारी योजनाएं गांवों तक पहुंचीं, बल्कि लोगों को भी पानी बचाने के लिए प्रेरित किया गया। दरअसल हर साल 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को जल संरक्षण के महत्व के प्रति जागरूक करना है। इसी कड़ी में फतेहाबाद जिले में भी जल संरक्षण को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

    हररड की भी अहम भूमिका | World Water Day

    विश्व जल दिवस के अवसर पर हररड (वाटर एंड सैनिटेशन सपोर्ट आॅगेर्नाइजेशन) भी जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित करता है। यह संस्था सरकार की योजनाओं और आम जनता के बीच एक कड़ी का काम करती है, जिससे जल प्रबंधन के प्रयासों को मजबूती मिलती है। जिला सलाहकार शर्मा चंद लाली के मार्गदर्शन में जल संरक्षण के क्षेत्र में जो प्रयास किए जा रहे हैं, वे आने वाले समय के लिए एक मजबूत नींव साबित हो सकते हैं। इन प्रयासों से न केवल वर्तमान पीढ़ी को लाभ मिल रहा है, बल्कि भविष्य में संभावित जल संकट से निपटने की दिशा में भी जिले को मजबूती मिल रही है।

    जल शक्ति अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाया

    जिला सलाहकार शर्मा चंद लाली ने केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं, खासकर जल शक्ति अभियान, को प्रभावी तरीके से लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने प्रशासन और आम जनता के बीच एक सेतु बनकर काम किया, ताकि जल संचयन की तकनीकें केवल कागजों तक सीमित न रहकर गांवों में व्यवहारिक रूप से अपनाई जा सकें। फतेहाबाद के कई क्षेत्र लगातार गिरते भू-जल स्तर के कारण ह्यडार्क जोनह्ण की श्रेणी में आ रहे थे। इस स्थिति को सुधारने के लिए लाली ने जल पुनर्भरण प्रणालियों को बढ़ावा दिया। साथ ही पुराने तालाबों के जीर्णोद्धार और वर्षा जल संचयन के प्रयासों पर विशेष जोर दिया गया, जिससे भू-जल स्तर को संतुलित रखने में मदद मिल सके।

    किसानों को दी नई तकनीकों की जानकारी

    खेती-प्रधान जिला होने के कारण यहां पानी की सबसे ज्यादा खपत सिंचाई में होती है। इसे ध्यान में रखते हुए किसानों को आधुनिक सिंचाई तकनीकों के बारे में जागरूक किया गया।किसानों को टपक सिंचाई (ड्रिप इरिगेशन) और सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। इसके अलावा कम पानी में पकने वाली फसलों जैसे मक्का और दलहन की खेती तथा धान की सीधी बिजाई तकनीक को बढ़ावा दिया गया, ताकि पानी की बचत हो सके। जल संरक्षण के इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत जनभागीदारी रही। स्कूलों, पंचायतों और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से ह्लपानी बचाओह्व का संदेश लोगों तक पहुंचाया गया। जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से इसे एक जन-आंदोलन का रूप देने की कोशिश की गई।