
Bangladesh Oath Ceremony 2026: ढाका। बांग्लादेश में हालिया संसदीय चुनावों के बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। 17 फरवरी को राजधानी ढाका स्थित Jatiya Sangsad Bhaban के साउथ प्लाजा में सायं 4 बजे शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर लगभग 1,200 विशिष्ट अतिथियों के सम्मिलित होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। Tarique Rahman Oath Ceremony
तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार
Tarique Rahman के नेतृत्व में Bangladesh Nationalist Party (बीएनपी) ने संसदीय चुनाव में उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है। घोषित परिणामों के अनुसार, पार्टी ने बहुमत के साथ सरकार गठन का मार्ग प्रशस्त किया है। यदि तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते हैं, तो बांग्लादेश को लगभग 35 वर्षों बाद पुरुष प्रधानमंत्री प्राप्त होगा।
समारोह में विभिन्न देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। भूटान के प्रधानमंत्री Tshering Tobgay, भारत के लोकसभा अध्यक्ष Om Birla तथा पाकिस्तान के योजना मंत्री Ahsan Iqbal के उपस्थित रहने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त नेपाल, श्रीलंका, ब्रिटेन और मालदीव सहित अन्य देशों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है। हालांकि कुछ देशों की ओर से औपचारिक पुष्टि अभी शेष है।
भारत की ओर से आधिकारिक पुष्टि | Tarique Rahman Oath Ceremony
Ministry of External Affairs ने पुष्टि की है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। मंत्रालय ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह सहभागिता भारत और बांग्लादेश के मध्य लोकतांत्रिक मूल्यों, ऐतिहासिक संबंधों और पारस्परिक सम्मान की सुदृढ़ परंपरा को रेखांकित करती है।
13वें संसदीय चुनाव के अंतर्गत 300 में से 299 सीटों पर मतदान सम्पन्न हुआ। चुनाव आयोग द्वारा 297 सीटों के अनौपचारिक परिणाम घोषित किए जा चुके हैं, जबकि चटगांव-2 और चटगांव-4 सीटों के परिणाम न्यायिक निर्देशों के कारण लंबित हैं।
घोषित आंकड़ों के अनुसार बीएनपी ने 209 सीटों पर विजय प्राप्त की है। जमात-ए-इस्लामी को 68 सीटें मिलीं, जबकि उसके सहयोगी दलों ने भी कुछ सीटों पर सफलता दर्ज की। अन्य दलों और निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी सीमित संख्या में सीटें जीती हैं।
ये रहेंगी प्रमुख चुनौतियां | Tarique Rahman Oath Ceremony
विशेषज्ञों का मत है कि नई सरकार के समक्ष सामाजिक समरसता, आर्थिक स्थिरता तथा कट्टरपंथ से निपटने जैसी चुनौतियां प्रमुख रहेंगी। पूर्व अंतरिम प्रशासन के दौरान जिन मुद्दों ने ध्यान आकर्षित किया, उन्हें सुलझाना नई सरकार की प्राथमिकता होगी। इस प्रकार 17 फरवरी का यह शपथ ग्रहण समारोह न केवल राजनीतिक परिवर्तन का प्रतीक होगा, बल्कि क्षेत्रीय कूटनीति और दक्षिण एशिया की राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।












