हमसे जुड़े

Follow us

22.1 C
Chandigarh
Friday, February 6, 2026
More
    Home राज्य हरियाणा स्टोन क्रशर ज...

    स्टोन क्रशर जॉन बल्लेवाला और डोईवाला में आबादी पैरामीटर रिपोर्ट में धांधली, रेवेन्यू विभाग पर उठे गंभीर सवाल

    Pratap Nagar
    Pratap Nagar: खनन क्षेत्र में पैरामीटर को लेकर सच कहूं में प्रकाशित किया गया था समाचार

    खनन क्षेत्र में पैरामीटर को लेकर सच कहूं में प्रकाशित किया गया था समाचार

    प्रताप नगर (सच कहूँ/राजेंद्र कुमार)। Pratap Nagar: प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा खनन क्षेत्र बल्लेवाला और डोईवाला में आबादी और वन विभाग के पैरामीटर को लेकर रेवेन्यू विभाग को एक पत्र लिखा गया है जिसमें अब एक बड़े घोटाले की परतें खुलने का अंदेशा नजर आ रहा है। पत्र सामने आते ही यह स्पष्ट हो गया है कि जिले के 58 स्टोन क्रशरों के मामले में रेवेन्यू विभाग द्वारा प्रस्तुत आबादी संबंधी रिपोर्ट संदेह के घेरे में है।

    सूत्रों के अनुसार, इन 58 स्टोन क्रशरों के लिए आबादी के पैरामीटर की रिपोर्ट रेवेन्यू विभाग ने तैयार की थी, लेकिन अब सामने आ रहा है कि वास्तविक स्थिति से कहीं अधिक दूरी और आबादी का आंकड़ा दर्शाया गया है। यही नहीं, जैसे ही रेवेन्यू विभाग की रिपोर्ट के आधार पर समाचार सच कहूं में प्रकाशित हुआ तो संबंधित विभाग पल्ला झाड़ते हुए जिम्मेदारी से बचते हुए नजर आ रहा है।

    गौरतलब है कि जिले के सभी स्टोन क्रशर संचालक हाईकोर्ट से केस हार चुके हैं। हाईकोर्ट ने अपने स्पष्ट आदेश में कहा था कि जो भी स्टोन क्रशर निर्धारित पैरामीटर पूरे नहीं करते, उन्हें तत्काल बंद कराया जाए। इसके बावजूद, कम पैरामीटर वाले स्टोन क्रशरों को रेवेन्यू विभाग की कथित “मेहरबान” रिपोर्ट के जरिए नियमों के भीतर दिखाकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से सीटीओ दिलाने का खेल खेला गया। Pratap Nagar

    प्रदूषण विभाग अब रेवेन्यू विभाग की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए आबादी के सही आंकड़ों की दोबारा जांच की बात कर रहा है। वहीं रेवेन्यू विभाग अपनी रिपोर्ट से किनारा करता दिखाई दे रहा है। अब बड़ा सवाल यह है कि जब हाईकोर्ट का आदेश स्पष्ट था, तो फिर गलत रिपोर्ट के आधार पर स्टोन क्रशरों को संचालन की अनुमति कैसे मिली। क्या इसमें विभागीय मिलीभगत शामिल है, या फिर जानबूझकर नियमों की अनदेखी की गई।

    फिलहाल यह मामला प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचाए हुए है और इसमें आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासों की आशंका जताई जा रही है।यदि सही तरीके से जांच की जाय तो इस तरह के कई खुलासे सामने आ सकते है।

    आपको बता दें कि यमुनानगर के उपमंडल छछरौली के डोईवाला और बल्लेवाला में लगे क्रशर जोन से एक सनसनीखेज मामला सामने आया था जिसको सच कहूं समाचार पत्र में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया जिसमें रेवेन्यू और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। खनन क्षेत्र बल्लेवाला और डोईवाला के आसपास स्टोन क्रशरों की आबादी से निर्धारित दूरी को लेकर ऐसी धांधली उजागर हुई है, जिसे सामान्य प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि बड़े खेल के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। डोईवाला क्रशर जोन में एक ही स्थान पर आमने-सामने लगे दो क्रशर जय गणेश स्टोन क्रशर व श्री गणेश स्टोन क्रशर की दूरी को रेवेन्यू विभाग ने अपनी रिपोर्ट में अलग-अलग दर्शाया है।

    श्री गणेश स्टोन क्रशर की दूरी 1300 मीटर ओर उससे भी 50 मीटर ओर आगे लगे जय गणेश की आबादी से दूरी 350 मीटर रेवेन्यू विभाग ने दर्शा रखी है। श्री गणेश क्रशर की दूरी आबादी से महज तीन सौ मीटर है पर रेवेन्यू विभाग के पटवारी ने इसकी दूरी अपनी रिपोर्ट में 1300 मीटर दर्शा रखी है। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि दोनों क्रशर एक ही स्थान पर स्थापित हैं। रेवेन्यू विभाग की इस रिपोर्ट ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। सवाल यह है कि एक ही जगह पर लगे क्रशरों की दूरी में 950 मीटर का अंतर आखिर कैसे आ गया। सवाल ये है कि प्रदूषण विभाग द्वारा बिना मौके पर गए बिना पैरामीटर पूरे किए स्टोन क्रेशर को चलने की मंजूरी कैसे दे दी यह सवाल जांच का विषय है। Pratap Nagar

    इस बारे में प्रदूषण विभाग के आरओ प्रदीप का कहना है कि इस मामले में रेवेन्यू विभाग से दोबारा रिपोर्ट कराई जाएगी अगर अनियमितता पाईं जाती है तो ऐसे सभी स्टोन क्रशरों का सीटीओ कैंसिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदूषण विभाग द्वारा वन विभाग और रेवेन्यू विभाग की पैरामीटर की रिपोर्ट के बाद ही मंजूरी दी गई। यदि कही अनियमितता है तो इसकी जांच करवाई जाएगी।