जोजिला सुरंग पर कार्य प्रगति की गडकरी करेंगे समीक्षा

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ZOJILA

नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। जम्मू कश्मीर में साढ़े तीन हजार मीटर की ऊंचाई पर जोजिला दर्रा में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या एक पर निमार्णाधीन सुरंग हर मौसम में श्रीनगर और लेह के बीच सुगम आवाजाही के साथ ही देश की उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा के लिए भी सामरिक रूप से महत्वपूर्ण साबित होगी। जोजिला दर्रा पर बन रही सुरंग श्रीनगर को कारगिल तथा लेह से जोड़ेगी। श्रीनगर से लेह पहुंचने में तीन घंटे से ज्यादा का समय लगता है और अत्यधिक बर्फबारी के कारण सर्दियों में इस मार्ग को छह माह के लिए बंद किया जाता है जिसके कारण लेह-लद्दाख देश के शेष भू-भाग से एक तरह से कट जाता है।

जोजिला में सुरंग पर निर्माण कार्य की शुरूआत सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नतिन गडकरी ने अक्टूबर 2020 में वर्चुअल माध्यम से ब्लास्ट कर की थी और अगले सप्ताह की शुरूआत में वह मौके पर जाकर सुरंग के निर्माण के काम की प्रगति का जायजा लेंगे। सुरंग पर काम पूरा होने के बाद यह मार्ग बारह मास खुला रहेगा और इससे न सिर्फ आम लोगों को फायदा होगा बल्कि सेना को भी रणनीतिक लाभ मिलेगा। सेना के वाहन तथा साजो सामान वर्षभर श्रीनगर से कारगिल, लेह और लद्दाख तक इस मार्ग से आवागमन कर सकेंगे।

सुरंग निर्माण पर 6800 करोड़ रुपये का खर्च

श्रीनगर से लेह के बीच सड़क का सफर तीन घंटे का बताया जाता है और इस मार्ग के बनने के बाद यह सफर घटकर कुछ ही मिनट का रह जाएगा। जोजिला दर्रा 3528 फुट की ऊंचाई पर स्थित है और श्रीनगर-कारगिल-लेह को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या एक पर इसका निर्माण का कार्य चल रहा है। यह सुरंग करीब 15 किलोमीटर लम्बी है जिसके निर्माण पर 6800 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस सुरंग के बनने के बाद लेह और श्रीनगर के बीच आवाजाही सुगम हो जाएगी तथा सफर को बहुत कम समय में तय किया जा सकेगा।

लद्दाख के लोगों की यह करीब तीन दशक पुरानी मांग है और केंद्र सरकार 2005 में इस मांग पर ध्यान देते हुए जोजिला सुरंग बनाने की परिकल्पना की गई थी। अक्टूबर 2013 में मंत्रिमंडल ने इसको मंजूरी दी और फिर 2018 में केंद्र सरकार ने इसे पांच साल में पूरा करने का निर्णय लिया। उसी वर्ष मई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुरंग के निर्माण की नींव रखी और फिर श्री गडकरी ने पिछले साल इसके निर्माण की शुरूआत कराई। यह दर्रा अत्यधिक हिमपात के कारण शीतकाल में बंद कर दिया जाता है और इस पर यातायात नहीं चलता है। यह मार्ग ज्यादा से ज्यादा समय तक खुला रहे इसके लिए सीमा सड़क संगठन-बीआरओ बराबर बर्फ हटाकर इसे अधिकतर अवधि तक खोले रखने की कोशिश करता है।

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