बागवानी से स्वस्थ रहता है मानव ‘मस्तिष्क’

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Coronavirus Affects

बच्चों को विज्ञान की जानकारी

नई दिल्ली (एजेंसी)। महामारी कोरोना वायरस (कोविड-19) के प्रकोप के दौरान बुजुर्ग न केवल बागवानी करके मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा कर सकते है बल्कि बच्चों को भी पेड़ पौधों के विकास और विज्ञान की जानकारी भी दे सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना के प्रकोप के दौरान मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा की जा सकती है। इस दौरान तनावपूर्ण समय और काम की कमी से होने वाली चिंताओं को बागवानी करके दूर किया जा सकता है। परिवार के लोगों के साथ ही पेड़ पौधों के साथ समय बिताया जा सकता है। नियमित रूप से पेड़ पौधों की देखरेख पर पर्याप्त समय दिया जा सकता है और उसकी गहन निगरानी की जा सकती है। इसका हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर होता है।

बागवानी हमें प्रकृति से जोड़ता है

काविड-19 पर चिंता करने के बजाय अपने बगीचे के विकास और पौधों के आकार प्रकार को व्हाटसएप के माध्यम से एक दूसरे से साझा किया जा सकता है। बागवानी का रखरखाव लोगों को पौधों की स्वास्थ्य सेवा और मानव सेवा से भी जोड़ता है। बागवानी के दौरान जाने अनजाने कई प्रकार के व्यायाम हो जाते हैं जो हमारे स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए जरूरी होता है।

इसके महत्व को इस प्रकार से समझा किया जा सकता है कि विदेशों में तो बागवानी के महत्व को समझते हुए कई प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम समय-समय पर चलाए जाते है लेकिन भारत में इस प्रकार की कोई विशेष सुविधा नहीं है। बुजुर्गों में बागवानी से सकारात्मक सोच का विकास होता है। वे पूर्णबंदी की अवधि के दौरान एक जीवंत समूह बना सकते है और अपने अनुभव को साझा कर सकते हैं। इससे आपसी संपर्क भी प्रगाढ़ होता है। बागवानी हमें प्रकृति से जोड़ता है। बुजुर्ग बगीचे के फल फूल का फोटो लेकर संचार माध्यमों से एक दूसरे से साझा कर सकते है जिससे दूसरे को भी प्रेरणा मिलेगी।

बच्चों को प्यार से बागवानी से जोड़ा जा सकता है

यह स्थापित सत्य है कि मनुष्य और पेड़ पौधों के संपर्क से जीवन स्तर सुधरता है। इसके साथ ही वातावरण में बदलाव भी आता है। व्हाट्सएप एक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराता है जिससे बागवानी से संबंधित अनुभव, समस्या और सलाह को साझा किया जा सकता है। इस पर अनेक मुद्दों पर लोगों के साथ चर्चा की जा सकती है। अनुभवों और समस्याओं को लेकर अनेक बार चर्चा की जा सकती है। परिवार के नटखट बच्चे जो बड़े बुजुर्ग की बातों को नहीं मानते है और शरारत करते है, जो फूल तोड़ने है और पौधों को उखाड़ देते इस तरह के बच्चों को प्यार से बागवानी से जोड़ा जा सकता है। इस प्रकार के बच्चों को पौधों से सम्बंधित विज्ञान की जानकारी दी जा सकती है। जो बाद में वे खुद इसमें अभिरुचि लेने लगेंगे।

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