खबर आपके काम की: पानीपत घटना से सबक लेने की आवश्यकता…

Gas-Cylinder

सावधान! गैस सिलेंडर की भी होती है ‘एक्सपायरी’, रखें पूरा ध्यान

  • हिलाएं उपयोग के दौरान बरतें आवश्यक सावधानियां

ओढां (सच कहूँ/राजू)। एक वो समय था जब लोग गैस की बजाए चुल्हे पर ही खाना बनाते थे। सिलेंडर ज्यादातर शहरी लोग ही उपयोग करते थे। लेकिन आधुनिकता के इस युग में आज एलपीजी गैस घर-घर की जरूरत बन गई है। ऐसा शायद ही कोई घर होगा जहां गैस सिलेंडर न हो। सिलेंडर के इस्तेमाल से भले ही हमारे रोजमर्रा के कार्य आसान हो गए हों, लेकिन हम इस पर पूर्ण रूप से निर्भर होने के चलते कहीं अनदेखी तो नहीं कर रहे। इसलिए हमें जरूरत है कि सिलेंडर की खरीद से लेकर इस्तेमाल तक पूरी सावधानी बरतें। क्योंकि हमारी अनदेखी व लापरवाही कई बार बड़े हादसे का सबब भी बन सकती है।

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बीते वीरवार को पानीपत में तहसील कैंपस में एलपीजी गैस सिलेंडर में लीकेज होने के बाद लगी आग से पति-पत्नी व 4 बच्चों के जिंदा जलने की घटना ने सभी को झकझोर कर रखा दिया है। घटना उस वक्त हुई जब घर के सदस्य ने खाना बनाने के लिए गैस चालू किया। ये हादसा इतना भयावह था कि घर के सभी छह सदस्य जलकर कंकाल मेंं बदल गए। ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए हमें सतर्कता के साथ-साथ सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

ये बरतें सावधानियां

सिलेंडर हमेशा खुले में रखें, सिलेंडर लेते समय उसकी जांच जरूर करें, आईएसआई मार्का चुल्हा व सुरक्षा पाइप का ही प्रयोग करें, सिलेंडर के ऊपर लगी तीन पत्तियों पर एक्सपायरी डेट लिखी होती है जिसे अवश्य चेक करें, गैस चुल्हे को सिलेंडर से ऊपर या थोड़ा दूर रखें, चुल्हे को हमेशा सेल्फ पर रखें, रात में रेगुलेटर बंद जरूर करें, लीकेज का अंदेशा होने पर बल्ब, माचिस या पूजा सामग्री न जलाएं, लीकेज का अंदेशा होने पर खिड़की दरवाजे तुरंत खोलें गैस पाइप कंपनी की होनी चाहिए। पारदर्शी पाइप से गुरेज करें, गैस पाइप को समय-समय पर बदलते रहें, सिलेंडर के उपकरणों को गैस एजेंसी के माध्यम से प्राप्त करना सुरक्षित और लाभकारी होता है, सिलेंडर को हमेशा सीधा खड़ा करके रखें।

सिलेंडर फटने पर इन बातों का रखें ध्यान

सबसे पहले पुलिस को सूचित करें, फिर गेस एजेंसी को सूचना दें।
जांच रिपोर्ट के आधार पर उपभोक्ता क्लेम राशि के लिए दावा कर सकता है। बिना किसी औपचारिकता के सभी गैस सिलेंडर स्वत: बीमाकृत होते हैं।

एक्सपायर सिलेंडर बन सकता है हादसे का कारण

अक्सर देखा जाता है कि हम जब गैस सिलेंडर लेने जाते हैं तो केवल उस पर लगी सील की ही जांच करते हैं, लेकिन आपकी ये जांच पूरी नहीं है। यदि गैस सिलेंडर एक्सपायर हुआ है तो वह आपके लिए दुर्घटना का करण बन सकता है। हालांंकि गैस सिलेंडर जांच उपरांत ही आते हैं, लेकिन फिर भी हमारी सजगता बेहद जरूरी है। क्योंकि कई बार कंपनियों की अनदेखी या लापरवाही की वजह से भी हादसे हो जाते हैं। बाद में कंपनियां उपभोक्ताओं को ही दोषी ठहराती हैं। इसलिए बेहतर यही है कि सिलेंडर सील एवं एक्सपायरी डेट सहित पूरी जांच पड़ताल करने उपरांत ही लें।

एक्सपायरी डेट पढ़ने का तरीका

गैस सिलेंडर की एक्सपायरी डेट जानने काफी आसान है। हर सिलेंडर पर जहां रेगुलेटर लगाया जाता है वहां पर तीन पत्तियां लगी होती है। उन पर कुछ शब्द लिखे होते हैं। यह गैस सिलेंडर की एक्सपायरी डेट होती है। उदाहरण के तौर पर अगर उस पर डी-19 लिखा है तो मतलब है कि उसकी एक्सपायरी डेट दिसंबर 2019 है। इसके बाद इसका उपयोग करना खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे सिलिंडर में लीकेज सहित अन्य तरह की शिकायतें अधिक मिलती हैं।

लीकेज ऐसे चैक करें: गैस रेगुलेटर से लीकेज चैक करने का तरीका साबुन या डिटेरजेंट पाउडर की झाग बनाकर रेगुलेटर के आसपास लीकेज की जगह पर डालें। लीकेज होने पर वहां पानी में बुलबुले निकलने लगेंगे। यदि लीकेज नहीं है तो बुलबुले नहीं निकलेंगे। लीकेज होने पर रेगुलेटर को निकाल कर दोबारा लगाएं। जरूरत पड़े तो सिलेंडर के अंदर का रबड़ रिंग चेंज कर दें।

क्लेम की व्यवस्था: गैस कनेक्शन लेने पर उपभोक्ता को 50 लाख रुपये तक का बीमा मिलता है। जोकि उपभोक्ता के कंज्यूमर राइट के तहत आता है। इस पॉलिसी को एलपीजी इंश्योरेंस कवर कहते हैं। इसके बारे में हर उपभोक्ता को जानकारी होना बेहद जरूरी है। गैस कनेक्शन के लेते ही उपभोक्ता का 40 लाख रुपये का एक्सीडेंटल बीमा हो जाता है। इसके साथ ही यदि सिलेंडर फटने से किसी इंसान की मृत्यु होती है तो 50 लाख रुपये तक का क्लेम देने का प्रावधान है। इसके लिए उपभोक्ता को किसी भी तरह का कोई अतिरिक्त प्रीमियम नहीं भरना पड़ता। उपभोक्ता जब कनेक्शन लेता है तो उसके साथ ही इस पॉलिसी के लिए इंश्योर्ड हो जाता है।

उपभोक्ता सिलेंडर लेते समय उस पर एक्सपायरी डेट व सील की जांच करें। इसके अलावा उपयोग में भी सावधानियां जरूर बरतें। हम समय-समय पर एलपीजी एजेंसियों के यहां निरीक्षण करते हैं। जिसमें ये देखा जाता है कि एजेंसी जरूरी निर्देशों की पालना करती है या नहीं। उपभोक्ताओं के लिए बनाए गए नियम सहित अन्य विवरण का बोर्ड बाहर लगाया जाता है। उपभोक्ता का कंपनी की ओर से इंश्योरेंस किया जाता है। गैस सुरक्षा को लेकर किसी तरह की लापरवाही सामने आई तो हम कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
                                                                     -संदीप कुमार, जिला अतिरिक्त खाद्य आपूर्ति अधिकारी।

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